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कैंसर इलाज में नई उम्मीद :वैज्ञानिकों ने बनाया ट्यूमर पर असरदार इंजेक्शन, जानें कैसे करेगा काम

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक पेट, फेफड़े और लिवर जैसे ठोस ट्यूमर वाले कैंसर में खास तौर पर फायदेमंद हो सकती है। क्योंकि मैक्रोफेज ऐसे सेल हैं जो ट्यूमर के अंदर आसानी से पहुंच सकते हैं।
वैज्ञानिकों ने बनाया ट्यूमर पर असरदार इंजेक्शन, जानें कैसे करेगा काम

कैंसर को अक्सर शरीर के सामान्य नियमों को तोड़ने वाली बीमारी कहा जाता है। सामान्य तौर पर शरीर की कोशिकाएं एक तय प्रक्रिया के तहत काम करती हैं-जरूरत पड़ने पर बढ़ना, काम खत्म होने पर रुक जाना और खराब होने पर खुद खत्म हो जाना। लेकिन कैंसर कोशिकाएं इन नियमों को नहीं मानतीं। वे लगातार बढ़ती रहती हैं और धीरे-धीरे ट्यूमर बना लेती हैं या फिर खून और लिम्फ सिस्टम के जरिए शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल जाती हैं।

KAIST के वैज्ञानिकों ने ढूंढा इलाज

मीडिया खबरों के अनुसार, दक्षिण कोरिया के प्रतिष्ठित संस्थान कोरिया एडवांस इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (KAIST) के वैज्ञानिकों ने कैंसर के इलाज की दिशा में एक क्रांतिकारी खोज की है। प्रोफेस जी हो पार्क की टीम ने ऐसा इंजेक्शन बनाया है, जिसे सीधे ट्यूमर में दिया जाता है। इस इंजेक्शन की सबसे खास बात यह है कि यह ट्यूमर के अंदर पहले से मौजूद इम्यून सेल्स, जिन्हें मैक्रोफेज कहा जाता है, को ही कैंसर से लड़ने वाले फाइटर सेल्स में बदल देता है।

CAR-मैक्रोफेज कुछ यूं करता हैं काम

मैक्रोफेज ऐसे इम्यून सेल होते हैं जो शरीर में मौजूद बैक्टीरिया, गंदगी और खराब कोशिकाओं को खत्म करते हैं। नई तकनीक में यही मैक्रोफेज एक खास प्रोटीन बनाते हैं जिसे CAR कहा जाता है और इसके बाद ये कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने लगते हैं। जिससे इससे जूझने वाले मरीजों की सेहत पर सुधार देखने को मिलता है।

ठोस ट्यूमर के इलाज में हो सकता है कारगर

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक पेट, फेफड़े और लिवर जैसे ठोस ट्यूमर वाले कैंसर में खास तौर पर फायदेमंद हो सकती है। क्योंकि मैक्रोफेज ऐसे सेल हैं जो ट्यूमर के अंदर आसानी से पहुंच सकते हैं।

कैंसर क्यों बन जाता है इतना खतरनाक 

कैंसर को अक्सर शरीर के सामान्य नियमों को तोड़ने वाली बीमारी कहा जाता है। सामान्य परिस्थितियों में शरीर की कोशिकाएं जरूरत के अनुसार बढ़ती हैं और समय आने पर खुद खत्म भी हो जाती हैं। लेकिन कैंसर कोशिकाएं इन नियमों को नजरअंदाज कर लगातार बढ़ती रहती हैं और धीरे-धीरे ट्यूमर बना लेती हैं।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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