नई दिल्ली। कंटेंट क्रिएटर्स और मीडिया हाउस से जुड़े पेशेवरों की मेहनत को लेकर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जरूरी बातें कही है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग के बीच यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि रचनात्मक कार्य करने वाले लोगों को उनका उचित पैसा मिले। तकनीक काम को आसान बना सकती है, लेकिन रचनात्मकता, शोध, मौलिकता और मानवीय दृष्टिकोण का कोई विकल्प नहीं है।
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल और AI आधारित प्लेटफॉर्म्स को ऐसे ढांचे विकसित करने चाहिए, जहां कंटेंट तैयार करने वालों के अधिकार सुरक्षित रहें। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इस दिशा में नीतिगत स्तर पर संतुलन बनाने के पक्ष में है। ताकि नवाचार भी जारी रहे और इसे बढ़ावा देने वालों के आर्थिक हित भी सुरक्षित रहें। कंटेंट की दुनिया बदल रही है, लेकिन मेहनत की कीमत नहीं बदलनी चाहिए यही स्पष्ट संदेश केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw ने दिया।
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एक मीडिया संस्थान के कार्यक्रम में AI के नैतिक उपयोग पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि देश और दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को आगे बढ़ाने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स और मीडिया संस्थानों को उनके कार्य का उचित पारिश्रमिक मिलना ही चाहिए।
आगे उन्होंने यह भी बताया कि युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और विश्वास पर आधारित एआई इकोसिस्टम में वित्तीय पहलू की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने स्वदेशी एआई प्लेटफॉर्म विकसित करने और घरेलू एआई मॉडलों में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उनकी बातों से साफ है कि क्रिएटर्स की तरफ से कोई भी काम को नजरअंदाज नहीं कर सकते।
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राजस्व मॉडल पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि संसदीय समितियां और न्यायपालिका भी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़े संभावित खतरों पर चिंतित हैं। यदि किसी उपयोगकर्ता को शिकायत है, तो उसकी सुनवाई और सुरक्षा का प्रभावी हल निकलना चाहिए। ऑनलाइन मंचों के रेवेन्यू ढांचे पर बोलते हुए मंत्री ने साफ किया कि समाचार निर्माताओं, पारंपरिक मीडिया, प्रभावशाली व्यक्तियों और शोधकर्ताओं के साथ राजस्व का निष्पक्ष बंटवारा होना चाहिए। इसके लिए स्पष्ट नीतिगत व्यवस्था आवश्यक है।
उन्होंने तकनीकी कंपनियों से अपील की कि वे अपनी राजस्व-साझाकरण नीतियों की दोबारा गहन समीक्षा करें। साथ ही यह संकेत भी दिया कि यदि स्वैच्छिक रूप से संतुलन नहीं बनाया गया, तो कई देशों की तरह कानूनी ढांचा तैयार करना पड़ सकता है।