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Peoples Update Special :बीमा कंपनियों की दलील खारिज, फोरम के आदेश से मिला कोविड क्लेम का पैसा

कोविड के दौरान बीमार हुए लोगों को कंपनियों ने बीमा राशि का भुगतान करने से मना कर दिया तो वे उपभोक्ता आयोग पहुंचे। जिला उपभोक्ता आयोग ने भोपाल में 7, इंदौर में 2 और ग्वालियर में 1 बीमा क्लेम दिलाया।
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बीमा कंपनियों की दलील खारिज, फोरम के आदेश से मिला कोविड क्लेम का पैसा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    पल्लवी वाघेला, भोपाल। हेल्थ इंश्योरेंस कराते वक्त हर व्यक्ति के मन में यही विचार होता है कि अब उसे बीमारी का इलाज कराने में सोचना नहीं पड़ेगा। लेकिन, बीते दिनों उपभोक्ता आयोग में ऐसे कुछ मामले आए हैं, जिनमें कंपनी ने क्लेम तो नहीं दिया, उल्टा इलाज कराने पर सवालिया निशान लगा दिया।  दरअसल, यह मामले कोविड काल के हैं। बीमा कंपनियों ने क्लेम खारिज करने का आधार देते हुए कहा कि होम क्वारेंटाइन होकर घर बैठे ठीक हो सकते थे तो फिर बिना वजह अस्पताल क्यों गए?  इस तर्क और क्लेम न मिलने के बाद उपभोक्ताओं ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया।  भोपाल में ऐसे 7, इंदौर में 2 और ग्वालियर में एक मामला सामने आया है, जिसमें उपभोक्ता के हक में फैसला आया ।

    घर पर इलाज इसलिए कंपनी का इनकार

    ग्वालियर के 48 वर्षीय वकील सतेन्द्र सिंह यादव ने इफको टोकिया जनरल इंश्योरेंस कंपनी की कोरोना रक्षक पॉलिसी ली थी। पहली लहर में पॉजिटिव होने पर 8 दिन घर पर क्वारेंटाइन रहे। क्लेम मांगने पर कंपनी ने कहा कि घर पर इलाज कराने का सुझाव कोविड प्रकरण में लागू नहीं होता। आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को 70 हजार रुपए देने के आदेश दिए।

    कंपनी को जुर्माना देने के आदेश

    भोपाल की रेखा अग्रवाल और उनके पति ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी से   हेल्थ बीमा लिया था। कोविड में तबियत बिगड़ने पर 10 दिन अस्पताल में रही। क्लेम पर कंपनी ने कहा कि वह इतनी गंभीर रूप से भी बीमार नहीं थी कि अस्पताल जाना पड़े। लंबे  उन्होंने जनवरी 2024 में परिवाद दायर किया और ब्याज एवं जुर्माने सहित करीब एक लाख 60 हजार रुपए पाने के आदेश हुए।

    उपभोक्ता आयोग ने दिलाया क्लेम

    भोपाल के अंकित सिंह ने चोलामंडलम जनरल इंश्योरेंस कंपनी से बीमा पॉलिसी ली थी। यह कोरोना रक्षक पॉलिसी से नियमानुसार कवर्ड थी। पहले वह होम आइसोलेशन में रहे, उसके बाद डॉक्टर की सलाह पर निजी अस्पताल में भर्ती हुए। लेकिन बीमा कंपनी ने उनके क्लेम को खारिज कर दिया। आखिर 2023 में उपभोक्ता आयोग से उन्हें एक लाख 20 हजार रुपए पाने के आदेश जारी हुए।

    बीमा कंपनियां अनुचित तर्क पर क्लेम खारिज नहीं कर सकती

    क्लेम न देने के लिए कई बार बीमा कंपनियां डॉक्टर्स के परामर्श को भी नकार देती हैं। ऐसे में कोशिश होती है कि हम यह तर्क रख सकें कि डॉक्टर की सलाह की अनदेखी मरीज के लिए अनहोनी साबित हो सकती थी।  बीमा कंपनी अनुचित तर्क के आधार पर क्लेम खारिज नहीं कर सकती।

    विजय बहादुर सिंह तोमर, एडवोकेट

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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