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कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ हाईकोर्ट ने दिए FIR दर्ज करने के आदेश, फर्जी दस्तावेजों से ली थी इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज की मान्यता

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कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ हाईकोर्ट ने दिए FIR दर्ज करने के आदेश, फर्जी दस्तावेजों से ली थी इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज की मान्यता
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    जबलपुर। भोपाल के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद पर हाईकोर्ट ने तीन दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करने के आदेश पुलिस आयुक्त को दिए हैं। मसूद पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी सेल डीड के जरिए इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज की मान्यता और संबद्धता हासिल की है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने सोमवार को करीब ढाई घंटे चली सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। मामले पर अगली सुनवाई 1 माह बाद होगी।

    क्या है पूरा मामला?

    यह याचिका इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज की ओर से दायर की गई थी। यह कॉलेज अमन एजुकेशन सोसायटी का है, जिसके सचिव विधायक आरिफ मसूद हैं। इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज की मान्यता निरस्त करके उसकी संबद्धता समाप्त करने के निर्देश भी बरकतउल्ला विवि को दिए थे। सरकार द्वारा 9 जून 2025 को जारी आदेश की वैधानिकता को चुनौती देकर यह याचिका दायर की गई थी। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत रूपराह व पैनल अधिवक्ता आकाश मालपाणी ने पक्ष रखा।

    एसआईटी करेगी जांच

    सुनवाई के बाद अपना विस्तृत आदेश सुनाते हुए बेंच ने डीजीपी कैलाश मकवाना को कहा है कि वे एक एसआईटी का गठन करें। पीएचक्यू के टेलीकम्युनिकेशन विभाग के एडीजी संजीव शमी को इस एसआईटी का प्रमुख बनाया जाए और उनकी पसंद के दो और अधिकारियों को इसमें शामिल किया जाए। पुलिस द्वारा दर्ज किए जाने वाले मामले की जांच की जिम्मेदारी एसआईटी की रहेगी और सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी आरोपी बचने न पाए।

    सरकार पर उठाए सवाल

    बेंच ने सुनवाई के दौरान मामले में सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए फटकार भी लगाई। बेंच ने कहा कि यह फर्जीवाड़ा पिछले दो दशक से चल रहा है। सब कुछ सरकार की जानकारी में था। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए उनके गुनाहों पर पर्दा डाला गया। वर्ष 2023 में नेतृत्व परिवर्तन के बाद इस मामले पर कार्रवाई को हुई, लेकिन फिर भी दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

    Mithilesh Yadav
    By Mithilesh Yadav

    वर्तमान में पीपुल्स समाचार के डिजिटल विंग यानी 'पीपुल्स अपडेट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर कार्यरत हूं।...Read More

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