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दलाई लामा के अगले उत्तराधिकारी पर चीन :यह हमारा आंतरिक मामला; भारत न करें दखलअंदाजी

चीन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब धर्मशाला स्थित निर्वासित तिब्बती सरकार यानी सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) के प्रमुख पेनपा त्सेरिंग दूसरी बार शपथ लेने जा रहे हैं।
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यह हमारा आंतरिक मामला; भारत न करें दखलअंदाजी

बीजिंग। चीन ने भारत को दलाई लामा के मामले से दूरी बनाने की सलाह दी है। दलाई लामा के पुर्नजन्म के मामले की प्रक्रिया में दखल न देने की सलाह दी है। इतना ही नहीं चीन ने दलाई लामा को अगला अवतार बताया है। दरअसल चीन तिब्बत कके आध्यात्मिक गुरु के चयन को लेकर मुद्दा गरमाया हुआ है। यह पूरा मामला चीनी दूतावास द्वारा नई दिल्ली में दिए गए एक बयान के बाद से गरमाया है। 

भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने बयान जारी कर कहा कि दलाई लामा का पुनर्जन्म सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक प्रक्रियाओं के अनुसार तय होता है।

चीन ने क्यों दिया यह बयान?

चीन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब धर्मशाला स्थित निर्वासित तिब्बती सरकार यानी सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) के प्रमुख पेनपा त्सेरिंग दूसरी बार शपथ लेने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि दलाई लामा भी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। चीन को आशंका है कि भारत में मौजूद निर्वासित तिब्बती नेतृत्व भविष्य में उसकी मंजूरी के बिना नए दलाई लामा की घोषणा कर सकता है।

पेनपा त्सेरिंग को लेकर चीन की क्या है चिंता ?

CTA प्रमुख पेनपा त्सेरिंग की जीत को चीन गंभीरता से देख रहा है। उन्होंने फरवरी के चुनाव में 61% से ज्यादा वोट हासिल किए थे और सीधे विजेता बने थे। कर्नाटक के बायलाकुप्पे में जन्मे पेनपा त्सेरिंग लंबे समय से निर्वासित तिब्बती राजनीति में सक्रिय हैं। चीन को डर है कि उनके नेतृत्व में नया दलाई लामा चुनने की प्रक्रिया बीजिंग के नियंत्रण से बाहर जा सकती है।

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क्या है दलाई लामा के पुनर्जन्म पर विवाद?

दलाई लामा पहले साफ कह चुके हैं कि उनके पुनर्जन्म को पहचानने का अधिकार सिर्फ गादेन फोद्रांग ट्रस्ट के पास है। उनका कहना है कि किसी सरकार या दूसरे पक्ष को इसमें दखल का अधिकार नहीं है। इसके उलट चीन का कहना है कि किसी भी नए दलाई लामा को मान्यता देने से पहले बीजिंग की मंजूरी जरूरी होगी। चीन इस प्रक्रिया में अपने कानून और पारंपरिक ‘गोल्डन अर्न’ सिस्टम का हवाला देता है।

कैसे होता है दलाई लामा का चयन?

  • दलाई लामा की मृत्यु के बाद शोक अवधि पूरी होने पर नए दलाई लामा की खोज शुरू होती है। माना जाता है कि मौजूदा दलाई लामा अपने अगले जन्म यानी उत्तराधिकारी से जुड़े कुछ संकेत पहले ही छोड़ जाते हैं।
  • नए दलाई लामा की तलाश में बौद्ध भिक्षु कई धार्मिक तरीकों का सहारा लेते हैं। मृत्यु के समय दलाई लामा के शरीर की दिशा, भिक्षुओं को आए सपने और धार्मिक संकेतों के आधार पर खोज की दिशा तय की जाती है। इस प्रक्रिया में ज्योतिषीय गणनाएं भी अहम भूमिका निभाती हैं।
  • इसके बाद एक विशेष खोज दल उन बच्चों की तलाश शुरू करता है, जिनका जन्म दलाई लामा की मृत्यु के समय या उसके आसपास हुआ हो। इन बच्चों में खास धार्मिक और व्यवहारिक संकेतों की जांच की जाती है।

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चीन अगला दलाई लामा खुद क्यों चुनना चाहता है?

विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन चाहता है कि अगला दलाई लामा उसकी पसंद का हो, ताकि तिब्बत और बौद्ध समुदाय पर उसका नियंत्रण बना रहे। बीजिंग को यह भी चिंता है कि अगर नया दलाई लामा भारत या चीन से बाहर किसी जगह चुना गया, तो इससे तिब्बत पर चीन के दावों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनौती मिल सकती है।

भारत का क्या है स्टैंड

भारत आधिकारिक तौर पर ‘वन चाइना’ नीति का सम्मान करता है। हालांकि भारत के कुछ नेताओं और मंत्रियों ने कहा है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को चुनने का अधिकार धार्मिक परंपराओं, दलाई लामा और उनके अनुयायियों के पास होना चाहिए। यही मुद्दा अब भारत-चीन रिश्तों में एक नया संवेदनशील विषय बनता दिख रहा है।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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