मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाया गया महाभियोग प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। राज्यसभा के सभापति ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया जिससे विपक्ष को बड़ा झटका लगा है। टीएमसी के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने उन्हें पद से हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में नोटिस दिया था।
राज्यसभा सभापति ने जजेस इंक्वायरी एक्ट 1968 की धारा 3 के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए इस प्रस्ताव को खारिज किया। इसके साथ ही महाभियोग की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
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यह प्रस्ताव 12 मार्च को राज्यसभा में पेश किया गया था।
नियमों के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए कम से कम 100 लोकसभा सांसद या 50 राज्यसभा सांसदों का समर्थन जरूरी होता है जो इस मामले में पूरा भी हुआ था।
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें शामिल हैं:
टीएमसी की ओर से दिए गए नोटिस में कुल सात प्रमुख आरोपों का जिक्र किया गया था।
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भारत में यह पहला मामला है जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग का नोटिस लाया गया। हालांकि सभापति के फैसले के बाद यह प्रक्रिया शुरुआती स्तर पर ही रुक गई।