पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत लंबित दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए एक दिन की समयसीमा तय कर दी है। साथ ही, न्यायाधिकरणों को दस्तावेजों की दोबारा समीक्षा कर निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में भारत निर्वाचन आयोग ने बताया कि अब तक 59 लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा किया जा चुका है, जबकि बाकी मामलों को भी जल्द पूरा करने की प्रक्रिया जारी है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि बचे हुए दावों और आपत्तियों का निपटारा एक दिन के भीतर किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी मामलों को तेजी से निपटाने के लिए प्रशासन और न्यायाधिकरणों को मिलकर काम करना होगा, ताकि किसी भी मतदाता के साथ अन्याय न हो।
शीर्ष अदालत ने SIR से जुड़े ट्रिब्यूनलों को निर्देश दिया है कि वे पूरे दस्तावेजी रिकॉर्ड की दोबारा जांच करें। इसमें न्यायिक अधिकारियों द्वारा दिए गए फैसलों के कारणों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि किसी तरह की गलती या संदेह की गुंजाइश खत्म हो सके।
निर्वाचन आयोग ने कोर्ट को बताया कि अब तक 59 लाख से अधिक दावों और आपत्तियों पर फैसला किया जा चुका है। कोर्ट ने इस प्रगति पर संतोष जताया, लेकिन साथ ही बाकी मामलों को भी तय समयसीमा में पूरा करने पर जोर दिया।
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मामले की सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी के वकील ने बताया कि 19 न्यायाधिकरण अभी तक काम शुरू नहीं कर पाए हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि ऐसा माहौल बनाया जाए, जिससे सभी ट्रिब्यूनल तेजी से काम कर सकें और लंबित मामलों का निपटारा हो सके।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात को देखते हुए पश्चिम बंगाल से केंद्रीय बलों को वापस नहीं बुलाया जाएगा। कोर्ट का मानना है कि निष्पक्ष प्रक्रिया और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी कदम है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस के पत्र का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी मामलों पर तेजी से काम चल रहा है। साथ ही कोर्ट ने अपील प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए तीन जजों की समिति बनाने का सुझाव भी दिया।
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कोर्ट ने मालदा जिले में करीब 8 लाख मामलों के निपटारे पर संतोष जताया। हालांकि, कोर्ट ने साफ कहा कि बाकी जिलों में भी इसी गति से काम होना चाहिए, ताकि पूरी प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।
सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि राज्य की व्यवस्था इस प्रक्रिया को पूरा करने में विफल रहती है, तो वह हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगा। यह टिप्पणी न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने के संदर्भ में की गई।