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छत्तीसगढ़ में तूफान ‘अर्नब’ का अलर्ट: 4 जिलों में रेड अलर्ट, 90 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, 779 राहत शिविर तैयार

बस्तर से रायपुर तक बिगड़ेगा मौसम, दंतेवाड़ा-सुकमा में स्कूल बंद; एक लाख लोगों को सुरक्षित रखने की तैयारी, आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर 1070 जारी,छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ को लेकर मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है। बस्तर से रायपुर तक बारिश और तेज हवाओं का असर बढ़ने की आशंका है। दंतेवाड़ा और सुकमा में स्कूलों की छुट्टी घोषित की गई है, जबकि सरकार ने 779 राहत शिविर तैयार रखे हैं।
छत्तीसगढ़ में तूफान ‘अर्नब’ का अलर्ट: 4 जिलों में रेड अलर्ट, 90 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, 779 राहत शिविर तैयार

रायपुर: बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ को लेकर छत्तीसगढ़ में अलर्ट जारी किया गया है। 27 और 28 अक्टूबर को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, तेज हवाओं और बिजली गिरने की आशंका के बीच प्रशासन ने राहत एवं बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, दक्षिण छत्तीसगढ़ में हवाओं की रफ्तार 60 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। कुछ इलाकों में भारी से अति भारी बारिश का खतरा है। दंतेवाड़ा और सुकमा में 28 अक्टूबर को स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। वहीं, सरकार ने 779 राहत शिविर तैयार रखे हैं, जहां जरूरत पड़ने पर करीब एक लाख लोगों को ठहराया जा सकेगा।

4 जिलों में रेड अलर्ट, कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए मौसम विभाग ने 28 अक्टूबर के लिए चार जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। रायपुर समेत कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट की जानकारी दी गई है। बस्तर संभाग से शुरू होने वाला बारिश का दौर अगले दो दिनों में मध्य और फिर उत्तर छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों तक पहुंच सकता है। मौसम विज्ञानी गायत्री वाणी के अनुसार, 28 अक्टूबर को दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में मौसम का असर ज्यादा रहने की संभावना है। इसके बाद 29 अक्टूबर को उत्तर-पश्चिम और उत्तर छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

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90 KM की रफ्तार से हवाएं

मंगलवार को प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका है। एक-दो स्थानों पर भारी बारिश के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। दक्षिण छत्तीसगढ़ में चक्रवात का प्रभाव बढ़ने पर हवा की रफ्तार 60 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। कुछ स्थानों पर 200 मिलीमीटर तक बारिश होने की आशंका भी जताई गई है।

दंतेवाड़ा-सुकमा में स्कूल बंद, किसानों को अलर्ट

चक्रवात के खतरे को देखते हुए दंतेवाड़ा और सुकमा जिले में 28 अक्टूबर को स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। प्रशासन मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने भी किसानों के लिए मौसम आधारित सलाह जारी की है। किसानों को अगले दो से चार दिनों तक धान और अन्य फसलों की कटाई रोकने की सलाह दी गई है। जिन किसानों ने फसल काट ली है, उन्हें उपज सुरक्षित स्थान पर रखने और खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करने को कहा गया है।

किसानों के लिए जरूरी सलाह:

मौसम सामान्य होने तक कटाई टालें।

कटी हुई फसल को बारिश से बचाकर सुरक्षित रखें।

खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था करें।

मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर नजर रखें।

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रायपुर में छाए बादल, बारिश और तेज हवा की संभावना

राजधानी रायपुर में सुबह से बादल छाए हुए हैं और ठंडी हवाएं चल रही हैं। मंगलवार को शहर में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, अधिकतम तापमान करीब 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। सोमवार को रायपुर में अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो सामान्य से 1.2 डिग्री अधिक रहा। न्यूनतम तापमान 20.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से 0.3 डिग्री कम था।

अंबिकापुर में सबसे ठंडी रात

प्रदेश में सोमवार को कहीं भी बारिश दर्ज नहीं की गई। रायपुर में अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 12.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बिलासपुर में अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री, माना एयरपोर्ट में 31.2 डिग्री और जगदलपुर में 31.1 डिग्री सेल्सियस रहा।

12 जिलों पर विशेष नजर, संवेदनशील गांवों की पहचान

चक्रवात से निपटने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने राहत एवं बचाव की कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, बालोद और रायपुर को अति संवेदनशील जिलों में शामिल किया गया है। इन 12 जिलों के 763 बाढ़ प्रभावित गांवों की पहचान की गई है। इसके अलावा अन्य 21 जिलों में 1,006 संवेदनशील गांव चिह्नित किए गए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि गांवों में मुनादी कर लोगों को सतर्क किया जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।

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779 राहत शिविर तैयार, एक लाख लोगों के ठहरने की व्यवस्था

सरकार ने संभावित आपदा से प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने के लिए कुल 779 राहत शिविर तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। इनमें 12 संवेदनशील जिलों में 341 और अन्य जिलों में 438 शिविर शामिल हैं। शिविरों में पीने का पानी, भोजन, दवाइयां और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है। जरूरत पड़ने पर लोगों को इन शिविरों में पहुंचाया जाएगा। गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को सुरक्षित निकालने में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने तेज हवाओं से क्षतिग्रस्त हो सकने वाले मकानों की पहचान करने और जोखिम वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क करने पर भी जोर दिया है।

SDRF की 7 टीमें तैनात, NDRF भी संभालेगी मोर्चा

आपदा से निपटने के लिए राज्य में SDRF की सात टीमें तैयार की गई हैं। प्रत्येक टीम में 36 जवान हैं। इन टीमों को रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, दुर्ग और अंबिकापुर में तैनात करने की तैयारी है। दुर्ग में NDRF की एक टीम पहले से मौजूद है। सुकमा, बस्तर और बीजापुर में भी NDRF की एक-एक टीम तैनात करने की तैयारी की गई है। इसके अतिरिक्त नगर सेना के 828 प्रशिक्षित जवान और 3,895 आपदा मित्रों को भी बचाव कार्यों के लिए तैयार रखा जा रहा है। SDRF के पास बचाव अभियान के लिए 1,450 उपकरण उपलब्ध बताए गए हैं। इनमें पानी के भीतर देखने वाले कैमरे, हाइड्रोलिक कटर और रबर बोट शामिल हैं।

अस्पतालों को अलर्ट, डॉक्टर और दवाइयां तैयार रखने के निर्देश

संभावित आपदा के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए अस्पतालों को भी तैयार रहने को कहा गया है। 12 संवेदनशील जिलों में 12 जिला अस्पतालों, 65 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 215 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों तथा दवाइयों की पर्याप्त व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं। अन्य 21 जिलों में 21 जिला अस्पतालों, 153 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 609 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को तैयार रखने की योजना है। पशुओं की देखभाल और टीकाकरण के लिए पशु चिकित्सकों को भी आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

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आपात स्थिति में 1070 पर करें संपर्क

राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं। आपदा की स्थिति में लोग टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क कर सकते हैं। सभी जिलों के नियंत्रण कक्षों को भी सक्रिय रखने और संबंधित कर्मचारियों के संपर्क नंबरों का प्रचार करने को कहा गया है। इंद्रावती, शबरी और गोदावरी नदियों के जलस्तर पर नजर रखने के लिए केंद्रीय जल आयोग से समन्वय किया जा रहा है। गंगरेल डैम, ओडिशा के खातीगुड़ा डैम और मुरान बांध से भी संपर्क बनाए रखने की व्यवस्था की गई है। बांधों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में प्रशासन को 48 घंटे पहले सूचना देने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

बाढ़ में फंसे लोगों के लिए हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू की तैयारी

यदि भारी बारिश के कारण गांवों में पानी भरता है या लोग बाढ़ में फंस जाते हैं, तो जरूरत के अनुसार हेलीकॉप्टर से बचाव अभियान चलाया जा सकता है। इसके लिए रायपुर और बस्तर में उपलब्ध हेलीकॉप्टर बेस से संपर्क किया गया है। नदी, नालों, पुल-पुलियों और पानी में डूबी सड़कों पर खतरा बढ़ने की स्थिति में लोगों की आवाजाही रोकने तथा प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

तूफान के बाद नुकसान का आकलन, सड़क-बिजली बहाली पर फोकस

चक्रवात का असर खत्म होने के बाद नुकसान का सर्वे करने की भी तैयारी की गई है। राजस्व, कृषि, पंचायत, पशुपालन, नगरीय प्रशासन, लोक निर्माण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और दूरसंचार विभाग को मकानों, फसलों, पशुओं तथा संचार व्यवस्था को हुए नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की जांच, सफाई, संक्रमण की रोकथाम और बीमारियों की निगरानी पर भी ध्यान दिया जाएगा। क्षतिग्रस्त सड़कों, पुल-पुलियों, तटबंधों और नालियों की मरम्मत के साथ बिजली तथा दूरसंचार सेवाओं को बहाल करने की कार्ययोजना तैयार रखी गई है।

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लोगों के लिए जरूरी सावधानी

मौसम खराब होने पर बिना जरूरत घर से बाहर न निकलें।

तेज हवा और बिजली चमकने के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर संरचनाओं से दूर रहें।

नदी-नालों और जलभराव वाले रास्तों को पार करने का जोखिम न लें।

स्थानीय प्रशासन के निर्देशों और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करें।

आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क करें।

नोट: रेड अलर्ट वाले चार जिलों के नाम मूल समाचार सामग्री में स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध नहीं हैं। प्रकाशन से पहले मौसम विभाग के आधिकारिक बुलेटिन से जिलों के नाम, अलर्ट की अवधि और तूफान के पूर्वानुमान की पुष्टि जरूर करें।

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...

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