Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

वेदांता पावर प्लांट ब्लास्ट :10 दिन बाद भी दर्द कायम, 25 मजदूरों की मौत ने उठाए बड़े सवाल; NHRC ने मांगी रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट में हुए ब्लास्ट में अब तक 25 मजदूरों की मौत हो चुकी है। शुरुआती जांच में प्लांट प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। NHRC ने मामले में संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी है। जानिए कैसे अचानक बढ़े प्रेशर और तकनीकी खामियों ने इस बड़े हादसे को जन्म दिया।
10 दिन बाद भी दर्द कायम, 25 मजदूरों की मौत ने उठाए बड़े सवाल; NHRC ने मांगी रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में 14 अप्रैल को हुए वेदांता पावर प्लांट ब्लास्ट ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। हादसे के 10 दिन बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। अब तक 25 मजदूरों की जान जा चुकी है और कई लोग अभी भी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। इस घटना ने औद्योगिक सुरक्षा और जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तीन लोगों की हालत अब भी गंभीर

हादसे में कुल 36 मजदूर झुलस गए थे। इनमें से 25 की मौत हो चुकी है, जबकि तीन लोगों की हालत अब भी बेहद गंभीर बनी हुई है। पांच घायलों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है और दो मजदूर इलाज के बाद घर लौट चुके हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि विस्फोट कितना भयावह था और इसका असर कितना गहरा है।

NHRC ने राज्य सरकार को जारी किया नोटिस

घटना के 10 दिन बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने साफ कहा है कि इस हादसे की जिम्मेदारी तय की जाए और पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए। इसके लिए राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से दो हफ्ते के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

हादसे के तुरंत बाद औद्योगिक सुरक्षा विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की थी। शुरुआती जांच रिपोर्ट में प्लांट प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। जांच का दायरा अब उन अधिकारियों तक भी पहुंच गया है, जो प्लांट के संचालन और रखरखाव से जुड़े थे।

बॉयलर फटने से 25 लोगों की मौत

1.    थांडा राम लहरे, छत्तीसगढ़
2.    नदीम अंसारी, छत्तीसगढ़
3.    उधाब सिंह यादव, छत्तीसगढ़
4.    रितेश कुमार, बिहार
5.    अमृत लाल पटेल, छत्तीसगढ़
6.    तरुण कुमार ओझा, झारखंड
7.    आकिब खान, बिहार
8.    सुसांता जना, पश्चिम बंगाल
9.    अब्दुल करीम, झारखंड
10.    शेख सैफुद्दीन, पश्चिम बंगाल
11.    पप्पू कुमार, उत्तर प्रदेश
12.    अशोक परहिया, झारखंड
13.    मानस गिरी, पश्चिम बंगाल
14.    बृजेश कुमार, उत्तर प्रदेश
15.    रामेश्वर महिलांगे, छत्तीसगढ़
16.    कार्तिक महतो, पश्चिम बंगाल
17.    शिबनाथ मुर्मू, पश्चिम बंगाल
18.    चिंतरंजन डोली, मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल
19.    दीपांकर सिंह, मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल
20.    राजू राम, सोनभद्र, यूपी
21.    किस्मत अली, सिंगरौली, एमपी
22.    सुब्रोतो जेना, पश्चिम बंगाल
23.    उमेंद्र शाह
24.    मनीष कुमार, सोनभद्र, यूपी
25.    बिस्वजीत साहू

ये भी पढ़ें: वेदांता प्लांट ब्लास्ट : कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत 10 लोगों पर FIR, सुरक्षा की अनदेखी ने ली 20 जिंदगियां

मामले में हर पहलुओं पर हो रही जांच

सिंघीतराई प्रोजेक्ट में एनजीएसएल की टीम तैनात थी, जहां प्रोजेक्ट हेड के रूप में राजेश सक्सेना जिम्मेदारी संभाल रहे थे। यूनिट-1 के संचालन की सीधी जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास थी। इसके अलावा मेंटेनेंस टीम बॉयलर, टरबाइन और अन्य मशीनों की देखरेख कर रही थी। अब इन सभी की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है।

बॉयलर के अंदर जमा हुआ था फ्यूल

जानकारी के अनुसार, वेदांता कंपनी ने पिछले साल ही प्लांट के ऑपरेशन और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी एनजीएसएल को सौंपी थी। इसमें मशीनों की निगरानी, तकनीकी खामियों को समय पर ठीक करना और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना शामिल था। अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि बॉयलर यूनिट-1 का संचालन एनजीएसएल के पास था।

जांच में सामने आया कि ब्लास्ट की वजह बॉयलर के अंदर जमा हुआ अत्यधिक फ्यूल था। इससे अचानक बहुत ज्यादा दबाव बन गया। दबाव बढ़ने के कारण बॉयलर का निचला पाइप अपनी जगह से हट गया और तेज धमाका हो गया। फॉरेंसिक जांच में भी इसी कारण की पुष्टि हुई है।

14 अप्रैल को हुआ था हादसा

हादसा 14 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 33 मिनट पर हुआ। उस समय बॉयलर में दबाव इतनी तेजी से बढ़ा कि सिर्फ एक से दो सेकेंड में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। सिस्टम को बंद करने या तकनीकी खराबी को रोकने का कोई मौका नहीं मिला और अंदर विस्फोट हो गया। इस विस्फोट की चपेट में बाहरी पाइपलाइन भी आ गई।

ये भी पढ़ें: Sakti Boiler Blast : वेदांता प्लांट हादसे में अब तक 17 की मौत, मृतकों के परिजनों को मुआवजे और नौकरी देने का ऐलान

जांच में यह भी सामने आया कि प्लांट में कम समय में उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की जा रही थी। करीब एक घंटे के भीतर बॉयलर का लोड 350 मेगावाट से बढ़ाकर 590 मेगावाट कर दिया गया। इतनी तेजी से लोड बढ़ाना जोखिम भरा साबित हुआ। इसके साथ ही पीए फैन में लगातार खराबी, अनबर्न फ्यूल का जमा होना, पाइपिंग सिस्टम का फेल होना और बैकअप सिस्टम का समय पर काम न करना भी हादसे की बड़ी वजह बने।

कलेक्टर ने मजिस्ट्रियल जांच के दिए आदेश

इस पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश कलेक्टर अमृत विकास टोपनो ने दे दिए हैं। 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि हादसा कैसे हुआ, इसके लिए कौन जिम्मेदार है, तकनीकी या मानवीय गलती क्या थी और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि सिस्टम की गंभीर विफलता का उदाहरण बनकर सामने आया है। अगर समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता, तो शायद इतने मजदूरों की जान नहीं जाती। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है कि क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी या यह मामला भी धीरे-धीरे ठंडा पड़ जाएगा।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...

Latest Posts