CG NEWS:अब बदलेगी पढ़ाई की तस्वीर! छत्तीसगढ़ में 5वीं, 7वीं और 8वीं के लिए नया सिलेबस, नई किताबें तैयार

प्रेम कुमार, रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत अब कक्षा 5वीं, 7वीं और 8वीं के विद्यार्थियों के लिए नया पाठ्यक्रम और नई किताबें तैयार की जाएंगी। खास बात यह है कि इन पुस्तकों में केवल एनसीईआरटी का नया ढांचा ही नहीं होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, लोकजीवन, जनजातीय इतिहास, पर्यटन और स्थानीय महापुरुषों को भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।
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छत्तीसगढ़ में शिक्षा का नया अध्याय
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। पहली से तीसरी और छठी कक्षा की नई किताबें तैयार होने के बाद अब कक्षा 5वीं, 7वीं और 8वीं के पाठ्यक्रम में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
तीन महीने में तैयार होगा नया सिलेबस
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने 7 जुलाई से 30 सितंबर तक विस्तृत कार्ययोजना जारी की है। इस दौरान विषयवार कार्यशालाओं के जरिए नए पाठ्यक्रम का निर्माण, अध्याय लेखन, अभ्यास प्रश्न, ग्राफिक डिजाइन, प्रूफ रीडिंग और अंतिम संशोधन का कार्य पूरा किया जाएगा।
अब किताबों में दिखेगा छत्तीसगढ़
नई किताबें एनसीईआरटी के नए पाठ्यक्रम के अनुरूप होंगी, लेकिन उनमें छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा, लोककला, तीज-त्योहार, पर्यटन, धार्मिक स्थल, जनजातीय विरासत और स्थानीय महापुरुषों से जुड़ी सामग्री भी शामिल की जाएगी।
विरोध के बाद लिया गया बड़ा फैसला
पहले राज्य से जुड़े कई विषयों को हटाए जाने पर विवाद और विरोध हुआ था। इसके बाद स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने SCERT की बैठक में स्थानीय विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने के निर्देश दिए थे। अब उसी दिशा में काम शुरू हो गया है।
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किन कक्षाओं में क्या होगा बदलाव?
इस चरण में कक्षा 5वीं और 8वीं के सभी विषयों की नई किताबें तैयार की जाएंगी। वहीं कक्षा 7वीं में विशेष रूप से गणित और योग शिक्षा के पाठ्यक्रम को नया स्वरूप दिया जाएगा।
पहले भी तैयार हो चुकी हैं नई किताबें
SCERT इससे पहले पहली, दूसरी, तीसरी और छठी कक्षा की हिंदी और अंग्रेजी माध्यम की 23 नई पाठ्यपुस्तकें तैयार कर चुका है। इन्हें शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू करने की मंजूरी मिल चुकी है।
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क्या होगा फायदा?
नई शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को राष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता के साथ स्थानीय पहचान से जोड़ना है। इससे विद्यार्थियों को अपने प्रदेश की संस्कृति और इतिहास को समझने का अवसर मिलेगा और पढ़ाई अधिक व्यवहारिक एवं रोचक बनेगी।












