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CG NEWS:बस्तर में फौती नामांतरण अभियान सफल: 8,241 परिवारों को मिला जमीन पर वैध अधिकार, वर्षों पुरानी समस्या का समाधान

611 गांवों में चला विशेष अभियान, चार साल से लंबित मामलों का हुआ निपटारा; मृत खातेदारों की जमीन अब वारिसों के नाम दर्ज बस्तर जिले में पिछले चार वर्षों से लंबित फौती नामांतरण मामलों के निपटारे के लिए जनवरी 2026 से विशेष अभियान शुरू किया गया था। इस अभियान का उद्देश्य मृत खातेदारों की जमीन को उनके कानूनी उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज कराना था, ताकि परिवारों को भविष्य में किसी प्रकार की प्रशासनिक या कान
बस्तर में फौती नामांतरण अभियान सफल: 8,241 परिवारों को मिला जमीन पर वैध अधिकार, वर्षों पुरानी समस्या का समाधान

PREM KUMAR,RAIPUR/ BASTAR NEWS छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में राज्य सरकार द्वारा चलाए गए विशेष फौती नामांतरण अभियान ने हजारों परिवारों को बड़ी राहत दी है। अभियान के तहत अब तक 8,241 परिवारों को उनकी जमीन पर कानूनी अधिकार दिलाया जा चुका है। वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे के लिए प्रशासन गांव-गांव पहुंचा और मृत खातेदारों की भूमि को वैध उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी की। इससे ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सुविधाओं और भूमि संबंधी कार्यों में आने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी।

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बस्तर में फौती नामांतरण अभियान से हजारों परिवारों को राहत

बस्तर जिले में पिछले चार वर्षों से लंबित फौती नामांतरण मामलों के निपटारे के लिए जनवरी 2026 से विशेष अभियान शुरू किया गया था। इस अभियान का उद्देश्य मृत खातेदारों की जमीन को उनके कानूनी उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज कराना था, ताकि परिवारों को भविष्य में किसी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी समस्या का सामना न करना पड़े।

क्या है फौती नामांतरण प्रक्रिया?

फौती नामांतरण राजस्व विभाग की वह प्रक्रिया है, जिसके तहत किसी भूमि मालिक की मृत्यु के बाद उसकी जमीन को कानूनी वारिसों के नाम सरकारी अभिलेखों में दर्ज किया जाता है। नामांतरण नहीं होने की स्थिति में भूमि रिकॉर्ड में मृत व्यक्ति का नाम बना रहता है, जिससे परिवारों को जमीन से जुड़े कई कार्यों में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

611 गांवों से जुटाई गई जानकारी

जिला प्रशासन ने अभियान की शुरुआत गांव स्तर से की। ग्राम सचिवों ने पिछले चार वर्षों में हुई मौतों का डेटा तैयार किया, जबकि पटवारियों ने उन मामलों की पहचान की जिनमें भूमि रिकॉर्ड अपडेट करना आवश्यक था। कोटवारों और तहसीलदारों की निगरानी में 611 गांवों से जानकारी एकत्र की गई।

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8,651 मामलों की हुई पहचान

प्रशासन को प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में चार वर्षों के दौरान 17,405 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई थी। इनमें से 8,651 ऐसे मामले पाए गए, जिनमें फौती नामांतरण जरूरी था। इसके बाद संयुक्त टीमों ने घर-घर पहुंचकर दस्तावेजों का सत्यापन किया और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराई।

मृत्यु प्रमाणपत्र से लेकर वंशवृक्ष तक तैयार कराया

अभियान के दौरान जिन परिवारों के पास मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं थे, उनके लिए प्रमाणपत्र बनवाए गए। साथ ही उत्तराधिकारियों का विवरण और वंशवृक्ष तैयार कर भूमि अभिलेखों में संशोधन कराया गया। अब तक 8,241 मामलों का निपटारा किया जा चुका है, जबकि शेष 410 मामलों पर कार्रवाई जारी है।

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मुख्यमंत्री साय ने बताया सुशासन का उदाहरण

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि हजारों परिवारों को समय पर उनका अधिकार दिलाना सरकार की प्राथमिकता है और यह अभियान संवेदनशील प्रशासन एवं जनसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचा प्रशासन

बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा ने बताया कि दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भूमि संबंधी कार्यों के लिए लंबे समय तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। विशेष अभियान के माध्यम से प्रशासन स्वयं गांवों तक पहुंचा और हजारों परिवारों की समस्या का समाधान किया।

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भूमि विवादों में आएगी कमी

प्रशासन का मानना है कि भूमि अभिलेख अपडेट होने से भविष्य में जमीन संबंधी विवादों में कमी आएगी। साथ ही पात्र परिवारों को बैंकिंग सुविधाओं, ऋण और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी आसानी होगी।

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...Read More

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