छत्तीसगढ़ में आयुष्मान योजना पर बड़ा एक्शन! 15 अस्पतालों को नोटिस, दूसरे राज्यों से मरीज लाने के आरोप

रायपुर: छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों के इलाज और अस्पतालों द्वारा किए गए दावों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जांच तेज कर दी है। प्रदेश के 15 अस्पतालों को अनियमितताओं की शिकायतों पर स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया गया है। इनमें से 8 अस्पताल अपना जवाब दे चुके हैं, जबकि 7 अस्पतालों के जवाब का इंतजार है। जांच में दूसरे राज्यों से मरीज लाकर भर्ती कराने, इलाज के पैकेज और मेडिकल दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी जैसे मुद्दे सामने आए हैं। अब अस्पतालों के जवाब और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
30 सितंबर को कई जिलों में औचक जांच, अस्पतालों में मचा हड़कंप
स्वास्थ्य विभाग के राज्य स्तरीय जांच दल ने 30 सितंबर को रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया था। जांच का दायरा बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर, सरगुजा, कबीरधाम, कोंडागांव और कोरबा तक रहा। टीम ने आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को दिए जा रहे उपचार, अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और इलाज से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की। निरीक्षण के बाद तैयार रिपोर्ट के आधार पर राज्य नोडल एजेंसी ने संबंधित अस्पतालों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा था।
ओडिशा और मध्यप्रदेश से मरीज लाने के आरोप, बिचौलियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
जांच के दौरान कुछ अस्पतालों में छत्तीसगढ़ के बाहर से मरीज लाकर भर्ती कराने की शिकायतें भी सामने आईं। ओडिशा और मध्यप्रदेश से मरीजों को रायपुर लाने के मामलों की भी जांच की जा रही है। शिकायतों में आरोप है कि मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में बिचौलियों की भूमिका और कमीशन का लेनदेन हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के अंतिम निष्कर्षों से ही होगी। स्वास्थ्य विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि मरीजों की भर्ती और इलाज की प्रक्रिया योजना के नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
सामान्य बीमारी के इलाज को गंभीर बीमारी के पैकेज में दिखाने की शिकायत
आयुष्मान योजना के तहत इलाज के पैकेज और अस्पतालों द्वारा किए गए दावों को लेकर भी सवाल उठे हैं। शिकायतों में आरोप है कि कुछ मामलों में मरीजों की वास्तविक बीमारी और दर्ज किए गए उपचार पैकेज के बीच अंतर हो सकता है। यदि जांच में ऐसा कोई मामला प्रमाणित होता है, तो संबंधित अस्पताल के दावों और योजना के तहत किए गए भुगतान की भी पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल विभाग को रिकॉर्ड, मरीजों के उपचार और अस्पतालों के स्पष्टीकरण का मिलान करना है।
डॉक्टरों की उपलब्धता से लेकर भर्ती-डिस्चार्ज रिकॉर्ड तक जांच
जांच दल ने अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता, मरीजों को दी गई चिकित्सा सेवाओं और दस्तावेजों में दर्ज जानकारी से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की है। शिकायतों में इलाज के रिकॉर्ड में अंतर, मरीजों की भर्ती और डिस्चार्ज से संबंधित दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी जैसे मुद्दे शामिल हैं। विभाग यह जांच रहा है कि अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के तहत जिन उपचार सेवाओं के लिए दावा किया, वे वास्तव में मरीजों को उपलब्ध कराई गई थीं या नहीं।
8 अस्पतालों का जवाब आया, 7 के स्पष्टीकरण का इंतजार
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 15 अस्पतालों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया था। इनमें से 8 अस्पताल अपना पक्ष प्रस्तुत कर चुके हैं, जबकि 7 अस्पतालों के जवाब मिलने बाकी हैं। अब विभाग अस्पतालों के स्पष्टीकरण और जांच में जुटाए गए साक्ष्यों की समीक्षा करेगा। अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल नोटिस जारी होना आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं है।
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स्वास्थ्य विभाग का क्या कहना है?
इंद्रजीत बर्मन, अतिरिक्त संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं के अनुसार, 15 अस्पतालों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। अब तक 8 अस्पतालों ने अपना जवाब दिया है। शेष अस्पतालों के जवाब मिलने के बाद सभी मामलों की समीक्षा की जाएगी। जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।




















