8 अक्टूबर से MP में आयुष्मान योजना का अनिश्चितकालीन बहिष्कार, निजी अस्पतालों ने NABH शर्त और लंबित भुगतान पर खोला मोर्चा

भोपाल। मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज करने वाले निजी अस्पतालों ने अब आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) मध्यप्रदेश, यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल्स डायरेक्टर्स एसोसिएशन (UPHDA) सहित विभिन्न अस्पताल संगठनों ने कहा है कि उनकी मांगों का समाधान नहीं होने पर 8 अक्टूबर 2026 से आयुष्मान भारत योजना का प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन बहिष्कार किया जाएगा। इसका सीधा असर योजना के तहत निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों पर पड़ सकता है। अस्पताल संगठनों का मुख्य विरोध लंबित भुगतान, क्लेम रिजेक्शन और अनावश्यक कटौती के साथ आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए NABH सर्टिफिकेट की अनिवार्यता को लेकर है। संगठनों ने मांग की है कि भुगतान और क्लेम से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए और NABH को अनिवार्य करने के बजाय इसे स्वैच्छिक एवं प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था बनाया जाए।
अस्पतालों का दावा- करोड़ों रुपये का भुगतान अटका
निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज अस्पताल पहले अपने संसाधनों और खर्च पर करते हैं। उपचार से पहले बीमारी, प्रस्तावित इलाज और पैकेज के आधार पर प्री-ऑथराइजेशन लिया जाता है। इसके बाद उपचार पूरा होने पर अस्पताल क्लेम दाखिल करता है। अस्पताल संगठनों के मुताबिक पुराने और वर्तमान पोर्टल पर भुगतान लंबित है। कुछ क्लेम CPD स्तर पर अटके हैं, जबकि कई मामलों में क्लेम रिजेक्ट किए जा रहे हैं या भुगतान में कटौती की जा रही है। भोपाल के ज्यादातर अस्पतालों का औसतन करीब 1.5 से 2 करोड़ रुपये तक का भुगतान अटका होने का दावा भी अस्पताल संगठनों की ओर से किया गया है। उनका कहना है कि यदि प्री-ऑथराइजेशन के बाद वास्तविक मरीज का वास्तविक उपचार किया गया है तो बाद में बिना स्पष्ट कारण बड़ी राशि काटना या पूरा क्लेम खारिज करना अस्पतालों के लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा करता है।
IMA ने कहा- कई स्तरों पर समाधान नहीं हुआ
IMA मध्यप्रदेश के अध्यक्ष डॉ. भजनलाल शरणागत ने कहा कि अस्पताल लंबे समय से लंबित भुगतान, पोर्टल की समस्याओं, CPD स्तर पर अटके क्लेम, क्लेम रिजेक्शन और अनावश्यक कटौतियों से जुड़े मुद्दे शासन के सामने उठाते रहे हैं। उनके मुताबिक अस्पताल संगठनों की ओर से ज्ञापन दिए गए, बैठकें की गईं, प्रतिनिधिमंडल मिले और सांकेतिक विरोध भी किया गया। इसके बावजूद समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हो सका। ऐसे में अब संयुक्त रूप से निर्णायक आंदोलन का फैसला लिया गया है।
UPHDA बोला- भुगतान की समय-सीमा भी तय हो
UPHDA मध्यप्रदेश के अध्यक्ष डॉ. विशाल सिंह बघेल ने कहा कि अस्पताल लंबे समय से लंबित भुगतान और नीतिगत एवं प्रक्रियागत समस्याओं के व्यावहारिक समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस तरह मरीज के उपचार की प्रक्रिया तय होती है, उसी तरह अस्पतालों के भुगतान के लिए भी स्पष्ट TAT यानी निर्धारित समय-सीमा होनी चाहिए। भुगतान में अनिश्चित देरी के कारण अस्पतालों को कर्मचारियों का वेतन, दवाइयों और दूसरी मेडिकल सामग्री के भुगतान सहित कई खर्चों का प्रबंधन करने में परेशानी होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समस्याओं का संतोषजनक समाधान होने तक अस्पताल संगठन संयुक्त आंदोलन जारी रखेंगे।
इलाज कैशलेस हो सकता है, कस्टलेस नहीं
UPHDA के चेयरमैन एडवाइजरी डॉ. जीशान अहमद ने कहा कि वास्तविक मरीज, वास्तविक बीमारी और वास्तविक उपचार होने के बावजूद केवल तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से वैध क्लेम रोकना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान योजना में मरीज का इलाज कैशलेस हो सकता है, लेकिन अस्पतालों के लिए यह प्रक्रिया कस्टलेस नहीं हो सकती। उनके मुताबिक अस्पताल इलाज पूरा करने के बाद यदि वैध भुगतान का इंतजार करते रहते हैं या क्लेम में बड़ी कटौती हो जाती है तो पूरी व्यवस्था पर आर्थिक दबाव पड़ता है। डॉ. जीशान अहमद ने यह भी कहा कि अपनी मांगों को लेकर अस्पताल संगठन दिल्ली में करीब 1 हजार एम्बुलेंस के साथ पहुंचकर संबंधित जिम्मेदारों के सामने अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रहे हैं।
NABH की अनिवार्यता पर भी निजी अस्पताल नाराज
अस्पताल संगठनों की दूसरी बड़ी आपत्ति NABH सर्टिफिकेशन की अनिवार्यता को लेकर है। उनका कहना है कि वे अस्पतालों में गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और बेहतर इलाज के मानकों के खिलाफ नहीं हैं लेकिन सभी अस्पतालों पर एक जैसी शर्त लागू करना व्यावहारिक नहीं है। संगठनों ने मांग की है कि NABH को स्वैच्छिक और प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था बनाया जाए। उनका तर्क है कि अस्पतालों की क्षमता, बेड संख्या, आधारभूत सुविधाएं और उपलब्ध संसाधन अलग-अलग होते हैं इसलिए मानकों को भी व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। हाल की रिपोर्टों के अनुसार भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के आयुष्मान से संबद्ध निजी अस्पतालों पर 1 अक्टूबर से NABH से जुड़ी नई व्यवस्था लागू हुई है और बड़ी संख्या में निजी अस्पतालों पर इसका असर पड़ने की बात सामने आई है।
चार शहरों में करीब 739 अस्पताल संबद्ध
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में आयुष्मान योजना से करीब 739 अस्पताल संबद्ध हैं। इनमें करीब 310 अस्पतालों के पास NABH सर्टिफिकेट होने की जानकारी दी गई है। निजी अस्पतालों के आंकड़ों को अलग रखने पर करीब 300 निजी अस्पताल ऐसे बताए जा रहे हैं जिनकी आयुष्मान संबद्धता नई शर्त से प्रभावित हो सकती है। हालांकि अलग-अलग संगठनों और रिपोर्टों में प्रभावित निजी अस्पतालों की संख्या में अंतर है। एक हालिया रिपोर्ट में चार शहरों में करीब 330 निजी अस्पतालों पर असर पड़ने का दावा अस्पताल संगठन की ओर से किया गया है।
क्लेम रिजेक्शन और कटौती के लिए पारदर्शी व्यवस्था की मांग
अस्पताल संचालकों ने TAT, प्रमाणीकरण, दस्तावेजीकरण, ट्रिगर और दूसरे तकनीकी कारणों से रिजेक्ट होने वाले क्लेम के लिए स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि यदि किसी क्लेम में कटौती या रिजेक्शन किया जाता है तो अस्पताल को उसका स्पष्ट लिखित कारण बताया जाना चाहिए। क्लेम की जांच योग्य चिकित्सकों से कराई जाए और अस्पतालों को प्रभावी अपील का अवसर मिले। इसके अलावा आयुष्मान योजना के पैकेज की दरों की समीक्षा कर उन्हें मौजूदा चिकित्सा खर्च के अनुरूप करने की मांग भी उठाई गई है।
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वास्तविक फर्जी मामलों में सख्त कार्रवाई का समर्थन
निजी अस्पताल संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी मामले में वास्तविक धोखाधड़ी पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि उनकी आपत्ति फर्जी दावों पर कार्रवाई को लेकर नहीं है। उनके अनुसार समस्या वहां पैदा होती है जहां मरीज वास्तविक है, बीमारी वास्तविक है, मरीज अस्पताल में भर्ती हुआ है और उपचार भी वास्तव में हुआ है लेकिन केवल किसी प्रक्रियागत कमी या तकनीकी कारण से पूरे उपचार का भुगतान रोक दिया जाता है या क्लेम रिजेक्ट कर दिया जाता है।
सरकार का दावा- पिछले छह महीने में 1,200 करोड़ रुपये भुगतान किए
दूसरी ओर, आयुष्मान भारत निरामयम् मध्यप्रदेश के CEO डॉ. अरविंद शाह ने हालिया रिपोर्टों में कहा है कि पिछले छह महीनों में निजी अस्पतालों के लंबित भुगतान में से करीब 1,200 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि जून से अब तक उनके स्तर से करीब 650 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इससे अस्पताल संगठनों और सरकार के दावों के बीच लंबित भुगतान की वास्तविक स्थिति को लेकर अंतर दिखाई देता है। अस्पताल संगठनों का कहना है कि अभी भी बड़ी राशि विभिन्न पोर्टल और प्रक्रिया के स्तर पर लंबित है।
8 अक्टूबर से इलाज बंद करने की तैयारी
IMA मध्यप्रदेश अध्यक्ष डॉ. भजनलाल शरणागत और UPHDA अध्यक्ष डॉ. विशाल सिंह बघेल ने स्पष्ट किया है कि यदि 8 अक्टूबर से पहले शासन अस्पताल संगठनों के साथ सार्थक बातचीत कर समस्याओं का ठोस और लिखित समाधान नहीं करता है, तो प्रदेशभर में आयुष्मान योजना का अनिश्चितकालीन बहिष्कार शुरू किया जाएगा। निजी अस्पतालों के इस फैसले से आयुष्मान कार्डधारक मरीजों के सामने इलाज को लेकर नई परेशानी खड़ी हो सकती है। खासकर उन मरीजों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है जो निजी अस्पतालों में योजना के तहत इलाज पर निर्भर हैं।



















