
छत्तीसगढ़ की राजनीति में महिला आरक्षण को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार ने इसी बीच एक अहम फैसला लेते हुए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का ऐलान किया है। 30 अप्रैल को आयोजित एक दिवसीय सत्र में महिला आरक्षण और महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े मुद्यों पर विस्तार से चर्चा होगी।
इस विशेष सत्र की घोषणा अचानक नहीं हुई है। इससे पहले 20 अप्रैल को आयोजित 'जन आक्रोश पदयात्रा' के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा था कि उनकी सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाएगी। उन्होंने उस समय कहा था कि सरकार इस विषय पर गंभीर है और विधानसभा में इस पर खुलकर चर्चा कराना चाहती है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी संकेत दिए थे कि सत्र के दौरान विपक्ष के रुख की निंदा करने वाला प्रस्ताव भी लाया जा सकता है।
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20 अप्रैल को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने रायपुर में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इस दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पैदल मार्च निकालते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दल महिलाओं को आरक्षण देने के मामले में बाधा बन रहे हैं। इस प्रदर्शन के जरिए भाजपा ने इस मुद्दे को जनता के बीच भी जोर-शोर से उठाने की कोशिश की।
30 अप्रैल को होने वाले इस सत्र में सरकार महिला आरक्षण को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकती है। साथ ही महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक सरकार इस दौरान एक प्रस्ताव भी ला सकती है, जिसमें विपक्ष के रुख की आलोचना की जाएगी।