चमोली में 5 दिन बाद खत्म हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन, 10 मजदूरों की मौत; 12 घायल

चमोली। उत्तराखंड के चमोली में पीपलकोटी टनल हादसे के बाद पिछले पांच दिनों से चल रहा राहत और बचाव अभियान अब खत्म कर दिया गया है। रेस्क्यू टीमों ने टनल में फंसे आखिरी लापता मजदूर का शव भी बरामद कर लिया है। इसके साथ ही 13 अगस्त को शुरू हुए इस हादसे में मृतकों की कुल संख्या 10 हो गई है, जबकि 12 मजदूर घायल हुए हैं। आखिरी शव को पोस्टमार्टम और अन्य जरूरी कानूनी प्रक्रिया के लिए जिला अस्पताल गोपेश्वर भेजा गया है। यह हादसा 13 अगस्त 2026 को चमोली के हाट-सियासैंण, मायापुर (पीपलकोटी) क्षेत्र में स्थित THDC की निर्माणाधीन टेल रेस टनल में हुआ था। अचानक टनल के अंदर पानी और भारी मात्रा में मलबा आने से वहां काम कर रहे मजदूर फंस गए थे। हादसे के बाद जिला प्रशासन, पुलिस, NDRF, SDRF और अन्य एजेंसियों ने मिलकर बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया था।
टनल में पानी और मलबा भरने से फंसे थे मजदूर
निर्माणाधीन टनल में अचानक पानी और मलबा घुसने के बाद हालात बेहद मुश्किल हो गए थे। अंदर कई फीट तक पानी और कीचड़ जमा था। इसके कारण बचाव दलों के लिए टनल के भीतर पहुंचना और फंसे मजदूरों की तलाश करना आसान नहीं था। रेस्क्यू टीमों ने पानी निकालने और मलबा हटाने के लिए बड़े सक्शन पंपों और आधुनिक उपकरणों की मदद ली। लगातार कई दिनों तक दिन-रात अभियान चलाया गया। बचावकर्मी टनल के अलग-अलग हिस्सों में जाकर लापता मजदूरों की तलाश करते रहे।
आखिरी लापता मजदूर का शव भी मिला
रेस्क्यू ऑपरेशन के अंतिम चरण में टीमों ने टनल के अंदर खोज अभियान जारी रखा। आखिरी लापता मजदूर का शव बरामद होने के बाद प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान समाप्त करने का फैसला किया। शव को बाहर निकालने के बाद उसे जिला चिकित्सालय गोपेश्वर भेजा गया, जहां पोस्टमार्टम समेत जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इस शव की बरामदगी के साथ हादसे में लापता सभी मजदूरों की तलाश पूरी हो गई है।
10 मजदूरों की गई जान, 12 घायल
इस हादसे में कुल 10 मजदूरों की मौत हुई है, जबकि 12 मजदूर घायल हुए हैं। घायल मजदूरों को हादसे के बाद अस्पताल पहुंचाया गया था और उनका इलाज कराया गया। हादसे के शुरुआती चरण में बचाव दलों ने कई मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। इसके बाद टनल के अंदर फंसे और लापता लोगों की तलाश पर पूरा ध्यान केंद्रित किया गया। खराब परिस्थितियों के बावजूद रेस्क्यू टीमें लगातार काम करती रहीं।
NDRF, SDRF और पुलिस ने संभाला मोर्चा
हादसे के तुरंत बाद जिला प्रशासन के साथ NDRF, SDRF, ITBP, पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं। संयुक्त टीमों ने टनल के अंदर जमा पानी और मलबे के बीच खोज अभियान चलाया। टनल के भीतर पानी और कीचड़ की मौजूदगी के कारण रेस्क्यू टीमों के सामने लगातार जोखिम बना हुआ था। इसके बावजूद बचावकर्मियों ने अलग-अलग हिस्सों में सर्च ऑपरेशन जारी रखा और उपलब्ध संसाधनों की मदद से मलबा हटाने का काम किया।
कई दिनों तक चला मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन
13 अगस्त को हादसा होने के बाद से ही बचाव अभियान लगातार जारी था। टनल के अंदर पानी का दबाव, कीचड़ और मलबा रेस्क्यू टीमों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए थे। शुरुआती दिनों में कई मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद भी कुछ लोग अंदर लापता थे। जैसे-जैसे मलबा हटाया गया और पानी की निकासी हुई, टीमों ने टनल के उन हिस्सों में भी तलाशी शुरू की जहां पहुंचना पहले मुश्किल था। मंगलवार को आखिरी लापता मजदूर का शव मिलने के साथ ही इस अभियान का अंतिम चरण भी पूरा हो गया।
Durg Bhilai: भिलाई में तीन मासूम बच्चियों से हैवानियत,59 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार
हादसे के बाद सुरक्षा को लेकर भी उठे सवाल
पीपलकोटी टनल हादसे ने निर्माणाधीन सुरंगों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। शुरुआती रिपोर्टों में टनल के भीतर पानी और मलबा आने की बात सामने आई थी। अब रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म होने के बाद हादसे की परिस्थितियों और सुरक्षा इंतजामों की जांच भी अहम होगी। फिलहाल प्रशासन का ध्यान मृत मजदूरों के शवों की कानूनी प्रक्रिया पूरी कराने, घायलों के इलाज और हादसे से जुड़े अन्य जरूरी कामों पर है। पांच दिन तक चले इस अभियान के बाद आखिरी मजदूर का शव बरामद होने के साथ चमोली टनल हादसे का रेस्क्यू चरण समाप्त हो गया है।












