HDFC Bank:चेयरमैन के इस्तीफे से मचा हड़कंप, शेयर 52 हफ्ते के निचले स्तर तक फिसला

देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक HDFC Bank इस समय गवर्नेंस से जुड़े गंभीर सवालों के बीच घिरा हुआ है। बैंक के पार्ट टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे ने बाजार और निवेशकों को चौंका दिया है। इस घटनाक्रम का असर सीधे शेयर पर दिखा, जो गिरकर 52 हफ्तों के निचले स्तर तक पहुंच गया।
‘एथिक्स’ पर सवाल उठाकर दिया इस्तीफा
अतनु चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे में कहा कि पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर कुछ ऐसी गतिविधियां सामने आईं जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और एथिक्स के अनुरूप नहीं थी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस्तीफे के पीछे कोई अन्य ठोस कारण नहीं है लेकिन इस तरह का बयान अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
शेयर पर तगड़ा असर, 52 हफ्ते का निचला स्तर छुआ
इस्तीफे की खबर सामने आते ही बैंक के शेयर में तेज गिरावट देखने को मिली। शेयर गिरकर 772 रुपये के स्तर तक पहुंच गया, जो इसका 52 हफ्तों का निचला स्तर है। बाद में हल्की रिकवरी के साथ यह करीब 803.90 रुपये पर ट्रेड करता दिखा, लेकिन फिर भी दिनभर में करीब 5% की गिरावट बनी रही। इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।
बैंक ने कहा- ऑपरेशन सामान्य, कोई बड़ा जोखिम नहीं
बैंक मैनेजमेंट ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि इस्तीफा किसी रेगुलेटरी या ऑपरेशनल समस्या से जुड़ा नहीं है। बैंक के अनुसार उसकी सभी गतिविधियां सामान्य रूप से चल रही हैं और किसी तरह का बड़ा जोखिम नहीं है। इसी बीच केकी मिस्त्री को अगले तीन महीनों के लिए अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया गया है। इस दौरान बोर्ड नए फुल-टाइम नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की तलाश करेगा।
RBI की नजर, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी है।

RBI ने कहा है कि बैंक की वित्तीय स्थिति मजबूत है, पर्याप्त लिक्विडिटी मौजूद है और फिलहाल गवर्नेंस को लेकर कोई गंभीर चिंता दर्ज नहीं हुई है। हालांकि नियामक आगे भी बैंक के साथ संपर्क में रहेगा।
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भरोसे की परीक्षा में HDFC Bank
HDFC बैंक लंबे समय से मजबूत गवर्नेंस और स्थिर प्रदर्शन के लिए जाना जाता रहा है। ऐसे में चेयरमैन का इस तरह इस्तीफा देना बैंक की छवि पर असर डाल सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बैंक इस मुद्दे को कितनी पारदर्शिता के साथ सुलझाता है। आने वाले समय में बैंक की प्रतिक्रिया और कदम यह तय करेंगे कि निवेशकों का भरोसा कितना मजबूत बना रहता है और शेयर पर इसका असर कितना लंबा चलता है।












