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‘ईरान को दुनिया के नक्शे से मिटा देंगे...’होर्मुज में अमेरिकी जहाज पर हमले के बाद ट्रंप की खुली चेतावनी

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है, जबकि ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के तहत अमेरिकी सेना जहाजों को सुरक्षा दे रही है। UAE में ड्रोन हमला और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
होर्मुज में अमेरिकी जहाज पर हमले के बाद ट्रंप की खुली चेतावनी

वॉशिंगटन डीसी। दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait Of Hormuz) एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन गया है। यहां बढ़ती सैन्य गतिविधियां और अमेरिका-ईरान के बीच तीखी बयानबाजी इस बात का संकेत दे रही हैं कि हालात किसी भी समय बिगड़ सकते हैं। व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित है और कई देश इस संकट को लेकर सतर्क हो गए हैं।

ट्रंप की सख्त चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि, अगर उसने अमेरिकी जहाजों पर हमला किया, तो उसे धरती के नक्शे से मिटा दिया जाएगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के तहत इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि, ईरान लगातार व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

क्या है ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ ऑपरेशन?

अमेरिका ने होर्मुज में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ ऑपरेशन शुरू किया है। इस मिशन के तहत अमेरिकी नौसेना व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान कर रही है। इस अभियान में गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक जहाज, आधुनिक लड़ाकू विमान और हजारों सैनिक तैनात किए जा सकते हैं। अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार, अब तक दो अमेरिकी झंडे वाले व्यापारिक जहाज सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार कर चुके हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि बाकी जहाजों को कब तक सुरक्षित निकाला जाएगा।

Donald Trump

ईरान पर हमले के आरोप और जवाब

ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने कई जहाजों पर हमला किया है, जिनमें एक दक्षिण कोरियाई मालवाहक जहाज भी शामिल है। अमेरिका का दावा है कि, उसने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान से जुड़ी सात छोटी नौकाओं को नष्ट कर दिया। वहीं दूसरी ओर ईरान ने इन आरोपों पर सीधे तौर पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है। ईरानी मीडिया ने जरूर यह दावा किया कि, उसने एक अमेरिकी पोत को निशाना बनाया, लेकिन अमेरिका ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। अमेरिकी केंद्रीय कमान का कहना है कि, उसके किसी भी युद्धपोत पर हमला नहीं हुआ है और सभी ऑपरेशन सामान्य रूप से जारी हैं।

दक्षिण कोरिया और अन्य देशों को संदेश

ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम के बीच दक्षिण कोरिया से भी इस मिशन में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि, ईरान सिर्फ अमेरिकी ही नहीं, बल्कि अन्य देशों के जहाजों को भी टारगेट कर रहा है। इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि, अमेरिका इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय समर्थन के साथ आगे बढ़ाना चाहता है। अगर अन्य देश भी इसमें शामिल होते हैं, तो यह टकराव और बड़ा रूप ले सकता है।

यह भी पढ़ें: होर्मुज में फिर गहराया संकट ! अमेरिका का दावा- 4 ईरानी नाव को डुबोईं, ट्रंप बोले ईरान के पास सिर्फ दो रास्ते...

UAE में ड्रोन हमले से बढ़ी चिंता

तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में ड्रोन हमले की घटना ने हालात को और गंभीर बना दिया है। फुजैराह स्थित एक पेट्रोलियम औद्योगिक साइट पर ड्रोन अटैक के बाद आग लग गई। इस हमले में तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं, जिससे भारत सहित अन्य देशों की चिंता भी बढ़ गई है। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव चरम पर है, और इसे एक बड़े संघर्ष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

ईरान बोला- बातचीत ही रास्ता

इस पूरे विवाद के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि इस संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बातचीत के जरिए ही इस स्थिति को सुलझाया जा सकता है। ईरान के अनुसार, पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत आगे बढ़ रही है। साथ ही अमेरिका और UAE को चेतावनी दी गई कि वे इस टकराव को और न बढ़ाएं।

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अमेरिका की सैन्य ताकत का प्रदर्शन

ट्रंप ने अपने बयान में अमेरिका की सैन्य क्षमता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया भर में सैन्य अड्डे हैं और वे अत्याधुनिक हथियारों से लैस हैं। उनका कहना था कि, जरूरत पड़ने पर अमेरिका अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। इस बयान को एक स्पष्ट शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, जो ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

वैश्विक असर और बढ़ती चिंता

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह का संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है। 28 फरवरी से शुरू हुए तनाव के बाद से इस मार्ग पर सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति में बाधा जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

अमेरिका के अंदर भी बढ़ रहा दबाव

अमेरिका में इस संभावित युद्ध को लेकर लोगों के बीच असंतोष भी देखने को मिल रहा है। कुछ सर्वे में इस युद्ध के समर्थन में कम आंकड़े सामने आए हैं, हालांकि ट्रंप ने इन सर्वे को फर्जी बताते हुए खारिज कर दिया है। इस बीच पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी चेतावनी दी है कि, ईरान पर हमला करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि कूटनीति ही बेहतर रास्ता है।

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...

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