‘मैं हिंदुओं के लिए काम करूंगा…’नंदीग्राम से भवानीपुर तक सुवेंदु की लहर, बंगाल में डबल जीत के बाद बोले- अब TMC खत्म

हल्दिया। ‘नंदीग्राम के हिंदू मतदाताओं ने मुझे जिताया, जबकि मुस्लिम वोट पूरी तरह टीएमसी को गया…’ यह बयान देते ही सुवेंदु अधिकारी ने अपनी जीत को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों पर जीत का प्रमाण पत्र लेने के बाद दिया गया यह बयान अब पूरे पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है। भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों पर जीत के साथ उन्होंने ममता बनर्जी को बड़ा झटका दिया है, इसके साथ ही राज्य की सियासत का समीकरण बदलता नजर आ रहा है।
पहले ही बयान में दिखे तीखे तेवर
जीत के बाद सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि, नंदीग्राम में उन्हें हिंदू मतदाताओं का समर्थन मिला, जबकि मुस्लिम वोट पूरी तरह तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में गया। उन्होंने कहा कि, इस बार उन्होंने करीब 10 हजार वोटों से चुनाव जीता है और वे नंदीग्राम के हिंदुओं के लिए काम करेंगे।
उनके इस बयान को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे राज्य में वोटिंग पैटर्न और सामाजिक समीकरणों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष इस बयान को मुद्दा बना सकता है, जबकि बीजेपी इसे अपने समर्थन के रूप में पेश कर रही है।
भवानीपुर में ममता को बड़ा झटका
पश्चिम बंगाल की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट भवानीपुर में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। यहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को करारी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव नतीजों के मुताबिक, सुवेंदु अधिकारी को 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 वोट मिले। इस तरह उन्हें 15,105 वोटों के अंतर से हार मिली। भवानीपुर सीट लंबे समय से टीएमसी का गढ़ मानी जाती रही है, ऐसे में यह हार राजनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है।
नंदीग्राम में भी कायम रहा प्रभाव
नंदीग्राम सीट पर भी सुवेंदु अधिकारी ने अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी। उन्होंने टीएमसी के उम्मीदवार पबित्र कर को 9,665 वोटों से हराया। यह वही सीट है, जहां 2021 में भी उन्होंने ममता बनर्जी को हराया था। लगातार दूसरी बार इस सीट पर जीत दर्ज करना उनके बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है और बताता है कि क्षेत्र में उनका जनाधार मजबूत बना हुआ है।
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TMC पर सीधा हमला
सुवेंदु अधिकारी ने जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि, टीएमसी एक भ्रष्ट और परिवारवादी पार्टी है और इसकी कोई स्पष्ट विचारधारा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि, यह पार्टी जल्द ही खत्म हो जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी चुनाव से पहले किए गए सभी वादों को पूरा करेगी। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को लागू करने की बात दोहराई।
लगातार दूसरी बार ममता को मात
यह दूसरी बार है जब सुवेंदु अधिकारी ने सीधे मुकाबले में ममता बनर्जी को हराया है। 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से हार के बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर से उपचुनाव जीतकर सत्ता में वापसी की थी। लेकिन 2026 के चुनाव में एक बार फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा। खास बात यह है कि एक समय सुवेंदु अधिकारी, ममता बनर्जी के करीबी सहयोगियों में शामिल थे, लेकिन बाद में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया और अब वे उनके सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं।
भवानीपुर सीट का बदला इतिहास
भवानीपुर सीट का इतिहास भी इस हार को और खास बना देता है। 1951 में अस्तित्व में आई इस सीट पर शुरुआती दौर में कांग्रेस का दबदबा रहा। बाद में वामपंथी दलों ने यहां जीत दर्ज की। 2011 के बाद से यह सीट तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ बन गई थी और ममता बनर्जी यहां से विधायक रहीं। लेकिन 2026 के चुनाव में यह गढ़ ढह गया और बीजेपी ने यहां जीत हासिल कर नया इतिहास रच दिया।
चुनाव परिणाम- बीजेपी का दबदबा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की है और स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता की ओर बढ़ रही है।
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पार्टी |
सीटें |
|
बीजेपी |
206 |
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टीएमसी |
81 |
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कांग्रेस |
2 |
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AJUP |
2 |
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CPI(M) |
1 |
इन आंकड़ों के अनुसार, इस बार राज्य की जनता ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया है और बीजेपी को स्पष्ट जनादेश दिया है।
मतगणना के दौरान तनाव
भवानीपुर में मतगणना के दौरान माहौल तनावपूर्ण रहा। कई राउंड तक मुकाबला बेहद करीबी रहा और दोनों नेताओं के समर्थकों में उत्साह के साथ तनाव भी देखा गया। जब ममता बनर्जी काउंटिंग सेंटर पहुंचीं, तो उन्होंने बीजेपी और चुनाव आयोग पर मिलीभगत के आरोप लगाए। हालांकि, आधिकारिक आंकड़ों में सुवेंदु अधिकारी की बढ़त लगातार बनी रही और अंत में उन्होंने स्पष्ट जीत दर्ज की।
बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव
इन चुनाव नतीजों को पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। बीजेपी का 200 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करना और टीएमसी का सीमित रह जाना यह दर्शाता है कि राज्य की राजनीति अब नई दिशा में आगे बढ़ रही है। ममता बनर्जी की हार से टीएमसी के लिए यह आत्ममंथन का समय है, जबकि बीजेपी के लिए यह अपने वादों को पूरा करने की बड़ी जिम्मेदारी है।











