जाति प्रमाण पत्र मामला : छानबीन समिति के सामने राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का तर्क-1950 में स्टेट नहीं तो कास्ट कैसे?

भोपाल। नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र मामले में सोमवार को अनुसूचित जाति मामलों की छानबीन समिति के सामने सुनवाई हुई। लगभग एक घंटे तक शिकायतकर्ता और कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने छानबीन समिति अध्यक्ष और प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य के सामने अपना-अपना पक्ष रखा। सतना और पन्ना जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग भोपाल पहुंचे। अब समिति दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और तर्कों का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी।
प्रदीप अहिरवार का पक्ष-1950 के गजट में बागरी SC नहीं
बागरी का परिवार मूल रूप से राजपूत वर्ग से: अहिरवार ने समिति के समक्ष कहा कि भारत सरकार के वर्ष 1950 के गजट में बागरी समुदाय अनुसूचित जाति सूची में नहीं था। वर्ष 1977 में मप्र गजट जारी होने के बाद बागरी समुदाय की कुछ उपजातियां राजपूत वर्ग में और कुछ अनुसूचित जाति में शामिल हुईं। प्रतिमा बागरी का परिवार मूल रूप से राजपूत वर्ग में था, जो वर्ष 1977 की अधिसूचना के बाद वर्ष 1981 की जनगणना में अनुसूचित जाति के रूप में दर्ज कराया गया।
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मंत्री प्रतिमा बागरी का पक्ष-राजपूत से रोटी-बेटी का संबंध नहीं
मंत्री प्रतिमा बागरी ने शिकायतों को राजनीतिक बताते हुए कहा कि कांग्रेस अनुसूचित जाति वर्ग की एक महिला के मंत्री बनने को स्वीकार नहीं कर पा रही है। उन्होंने अपने समर्थन में अनुसूचित जाति से जुडेÞ 110 साल पुराने रिकॉर्ड और खसरा-खतौनी के दस्तावेज पेश किए। राज्यमंत्री बागरी ने कहा कि वर्ष 1950 में मध्य प्रदेश राज्य का गठन ही नहीं हुआ था, इसलिए उस समय की अधिसूचना के आधार पर जाति का सवाल उठाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि राजपूत से रोटी- बेटी का संबंध नहीं है।
क्या है विवाद
यह पूरा विवाद प्रतिमा बागरी के कास्ट सर्टिफिकेट को लेकर है और उन्होंने अनुसूचित जाति के प्रमाणपत्र के आधार पर सतना जिले की आरक्षित रैगांव विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उन्होंने चुनाव में जीत हासिल की थी। इसके बाद उन्हें राज्य सरकार में नगरीय विकास राज्यमंत्री बनाया गया। कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने शिकायत की है कि राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र अवैध है।
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