Kidney Failure in children :10 साल में 20% तक बढ़े बच्चों में किडनी फेल्योर के मामले, 4% गंभीर श्रेणी में

किडनी से जुड़ी बीमारियों के मामलों में बच्चों में तेजी से इजाफा हुआ है। 4.9 फीसदी बच्चे और किशोर किडनी फंक्शन की समस्या से जूझ रहे हैं।AIIMS भोपाल में पीडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। अगले माह से इसकी शुरुआत की जा सकती है।
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10 साल में 20% तक बढ़े बच्चों में किडनी फेल्योर के मामले, 4% गंभीर श्रेणी में
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। बदलते खानपान और बिगड़ती दिनचर्या का असर अब बड़ों के साथ बच्चों की किडनी पर साफ दिखाई देने लगा है। किडनी से जुड़ी बीमारियों के मामलों में बच्चों में तेजी से इजाफा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 4.9 फीसदी बच्चे और किशोर किडनी फंक्शन की समस्या से जूझ रहे हैं। यही नहीं, 10 वर्षों में पीडियाट्रिक किडनी डिजीज के मामले 20 फीसदी तक बढ़ गए हैं। इनमें से 2 से 4 फीसदी मामले गंभीर होते हैं, जिन्हें ट्रांसप्लांट की ज्यादा जरूरत होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक जंक फूड में अधिक नमक, प्रिजर्वेटिव्स और मोटापा बच्चों में किडनी पर दबाव बढ़ा रहा है। इसके साथ हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसे कारक भी कम उम्र में सामने आ रहे हैं, जो आगे जाकर किडनी फेल्योर तक ले जा सकते हैं।

    किडनी ट्रांसप्लांट के लिए तीन बच्चे चिह्नित

    इधर, AIIMS में पीडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मिली जानकारी के मुताबिक फिलहाल तीन बच्चों को चिह्नित किया गया है। इनके डोनर की जांच सहित प्रीवर्कअप किया जा रहा है। अगर सबकुछ ठीकठाक रहा तो अगले महीने प्रदेश का पहला पीडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट हो सकता है।

    इन कारणों से बच्चों में बढ़  जाते हैं किडनी के मामले

    • जन्मजात समस्याएं : जन्म से ही किडनी या मूत्रमार्ग का सही आकार में न होना (जैसे हॉर्सशू किडनी)।
    • गलत खान-पान : अधिक नमक, फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन, जिससे वजन और शुगर बढ़ सकती है।
    • जेनेटिक बीमारियां : परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास।
    • नेफ्रोटिक सिंड्रोम : किडनी से प्रोटीन का रिसाव, जो बच्चों में काफी आम है। 

    यह दिखाई देते हैं मुख्य लक्षण 

    • सूजन : सुबह के समय आंखों के आसपास, चेहरे, पैरों या पेट में सूजन।
    • पेशाब में बदलाव : पेशाब में बहुत झाग आना (प्रोटीन के कारण), या बहुत कम/ज्यादा पेशाब आना।
    • रंग में बदलाव : पेशाब का रंग गहरा (कोला जैसा) या उसमें खून आना।
    • शारीरिक परेशानी : भूख न लगना, बार-बार उल्टी होना, चिड़चिड़ापन।
    • विकास में रुकावट : उम्र के हिसाब से वजन या लंबाई न बढ़ना।

    प्रदेश की पहली पीडियाट्रिक हीमोडायलिसिस यूनिट शुरू

    एम्स भोपाल में किडनी रोग से जूझ रहे बच्चों के लिए प्रदेश की पहली समर्पित बाल डायलिसिस इकाई शुरू की गई है। इस विशेष यूनिट में अब बच्चों के लिए हीमोडायलिसिस सहित किडनी से जुड़े जटिल उपचार की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो गई हैं। पिछले एक वर्ष में120 से ज्यादा प्लाज्मा एक्सचेंज हो चुके हैं। 

    बच्चों में किडनी रोग के बढ़ते मामले चिंताजनक

    बच्चों में किडनी रोग के बढ़ते मामले बेहद चिंताजनक हैं। पहले यह समस्या मुख्य रूप से वयस्कों में देखी जाती थी, लेकिन अब कम उम्र में भी इसके केस सामने आ रहे हैं। जंक फूड किडनी के लिए हानिकारक है।

    डॉ. महेंद्र अटलानी, नेफ्रोलॉजिस्ट, एम्स

    किडनी ट्रांसप्लांट के मामले बढ़े

    पिछले कुछ वर्षों में पीडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच रही है। हांलाकि,  अब मर्ज की पहचान जल्दी होती है। 

    डॉ. विद्यानंद त्रिपाठी, नेफ्रोलॉजिस्ट, बंसल अस्पताल

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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