Manali-Leh Highway:42 दिन, 6 बार रुका काम… फिर भी BRO ने जीत लिया दुनिया का सबसे मुश्किल रास्ता, मनाली-लेह हाईवे खुला

मनाली। सीमावर्ती इलाकों को जोड़ने वाला 427 किलोमीटर लंबा मनाली-लेह हाईवे इस बार फिर से सुर्खियों में है, जिसे सीमा सड़क संगठन (BRO) ने 42 दिनों की कठिन मेहनत के बाद बहाल कर दिया है। भारी बर्फबारी और खतरनाक हिमस्खलन के बीच 16,040 फीट ऊंचे बारालाचा दर्रे पर बर्फ की मोटी दीवारों को काटकर रास्ता खोला गया। इस बहाली से अब सेना की आपूर्ति और पर्यटकों की आवाजाही का रास्ता साफ हो गया है, प्रशासन की अंतिम मंजूरी अभी बाकी है।
भारत का सबसे चुनौतीपूर्ण हाईवे
मनाली-लेह हाईवे को देश के सबसे कठिन और खतरनाक रास्तों में गिना जाता है, जहां हर साल सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यातायात पूरी तरह ठप हो जाता है। इस बार भी अक्तूबर से बंद पड़ा यह मार्ग मई में जाकर फिर से खुल पाया है। सीमा सड़क संगठन के जवानों ने बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए 427 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को फिर से जोड़ दिया है। रास्ता खोलने का काम 27 मार्च को शुरू हुआ था और 42 दिनों की लगातार मेहनत के बाद सफलता मिली।
बारालाचा दर्रा बना सबसे बड़ी चुनौती
इस पूरे अभियान का सबसे कठिन हिस्सा 16,040 फीट ऊंचा बारालाचा दर्रा रहा, जहां बर्फ की मोटी परतें और तेज हवाएं लगातार बाधा बनती रहीं। जवानों को कई जगह 12 से 15 फीट तक जमी बर्फ को हटाना पड़ा। इसके अलावा 26 ऐसे स्थान थे जहां हिमस्खलन का खतरा हर समय बना रहता है। इन खतरों के बीच मशीनों और जवानों को कई बार पीछे भी हटना पड़ा लेकिन काम लगातार जारी रखा गया।
42 दिनों में 6 बार रोकना पड़ा काम
खराब मौसम और लगातार बर्फबारी ने इस ऑपरेशन को और मुश्किल बना दिया। कई बार तेज हिमपात और तूफान के कारण काम रोकना पड़ा लेकिन BRO के जवान हर बार फिर से मैदान में लौटे। अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे अभियान में कम से कम छह बार काम को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा, फिर भी टीम ने हार नहीं मानी और आगे बढ़ती रही।
गोल्डन हैंडशेक से मनाया गया ऐतिहासिक पल
जब दोनों ओर से सड़क जुड़ गई, तो सरचू में एक खास जश्न का माहौल देखने को मिला। BRO की ‘दीपक’ और ‘हिमांक’ परियोजना के अधिकारियों ने एक दूसरे से हाथ मिलाकर गोल्डन हैंडशेक किया। यह क्षण इस बात का प्रतीक था कि कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय इंजीनियरिंग और मेहनत ने जीत हासिल की है। इस मौके पर अधिकारियों और जवानों ने एक दूसरे को बधाई दी और सफलता का जश्न मनाया।

सेना और पर्यटन दोनों के लिए जीवनरेखा
यह हाईवे केवल पर्यटन के लिए ही नहीं बल्कि भारतीय सेना की आपूर्ति व्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। लद्दाख सीमा तक हथियार, राशन और जरूरी सामग्री पहुंचाने में यह मार्ग मुख्य भूमिका निभाता है। गर्मियों के मौसम में हजारों पर्यटक और बाइकर्स इस रास्ते से लेह-लद्दाख की यात्रा करते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा मिलता है।
पर्यटकों को इंतजार, जल्द खुलेगा रास्ता
सड़क पूरी तरह जोड़ दी गई है लेकिन आम वाहनों और पर्यटकों के लिए इसे खोलने का अंतिम निर्णय अभी बाकी है। लाहौल-स्पीति प्रशासन के साथ बैठक के बाद ही सुरक्षा जांच और स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में अगर सब कुछ ठीक रहा तो इस मार्ग पर नियमित आवाजाही शुरू कर दी जाएगी।
हर साल की चुनौती बन चुका है यह हाईवे
मनाली-लेह हाईवे हर साल अक्टूबर से बंद होकर मई-जून में खुलता है। 14,000 से 17,000 फीट ऊंचाई वाले कई दर्रे जैसे नाकिला, लाचुला और तंगलंगला इस मार्ग को और भी खतरनाक बनाते हैं। बदलते मौसम, बर्फीले तूफान और हिमस्खलन के बीच यह सड़क हमेशा चुनौती बनी रहती है, लेकिन फिर भी यह भारत के सबसे खूबसूरत और महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है।












