नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर दिए गए जहरीला सांप वाले बयान ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस टिप्पणी के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है और इसे सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश बताया है।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, कांग्रेस लंबे समय से ऐसी भाषा का इस्तेमाल करती रही है, जिसका समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता लोगों को धार्मिक आधार पर भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब असम में चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए खड़गे के बयान के बाद बीजेपी नेताओं ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई।
न्यूज एजेंसी ANI को दिए गए इंटरव्यू में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास ऐसे बयानों से भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि, कांग्रेस जब-जब इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करती है, जनता उसका जवाब चुनाव में देती है।
उनके मुताबिक, कांग्रेस की यह पुरानी परंपरा रही है कि वह ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करती है जिनसे समाज में नकारात्मक असर पड़ता है। लेकिन हर बार जनता भाजपा को जीत का आशीर्वाद देती है। नितिन नबीन ने यह भी कहा कि कांग्रेस के नेताओं की भाषा लोकतांत्रिक मर्यादा के अनुरूप नहीं है और इससे राजनीतिक माहौल खराब होता है।
बीजेपी अध्यक्ष ने इस पूरे विवाद के पीछे गांधी परिवार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी वास्तव में रिमोट कंट्रोल से चल रही है।
नितिन नबीन ने कहा कि, राहुल गांधी और सोनिया गांधी रिमोट कंट्रोल से कांग्रेस को चलाते हैं और उसी के तहत खड़गे बयान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खड़गे व्यक्तिगत रूप से एक सज्जन नेता रहे हैं, लेकिन अब उनके मुंह से ऐसे शब्द निकल रहे हैं जो कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को दिखाते हैं।
दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने असम में एक चुनावी रैली के दौरान एक उदाहरण देते हुए कहा था कि, अगर कोई जहरीला सांप सामने आ जाए, तो नमाज पढ़ते समय भी उसे मार देना चाहिए। इसी उदाहरण के जरिए उन्होंने बीजेपी और RSS की तुलना जहरीले सांप से की थी। इस बयान के बाद बीजेपी नेताओं ने इसे धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाला और राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया।
खड़गे के इस बयान के बाद बीजेपी ने औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है। केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा के नेतृत्व में दिल्ली बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को शिकायत सौंपी।
शिकायत में कहा गया कि, कांग्रेस अध्यक्ष ने बीजेपी और RSS की तुलना जहरीले सांप से की। बयान में एक विशेष समुदाय की धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास किया गया। यह चुनाव प्रचार नियमों का उल्लंघन हो सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस से मामले में एफआईआर दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
खड़गे के एक अन्य बयान पर भी बीजेपी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। खड़गे ने एक सभा में कहा था कि, केरल के लोग पढ़े-लिखे और समझदार हैं, जबकि गुजरात जैसे राज्यों के लोगों को गुमराह किया जा सकता है। इस बयान पर बीजेपी ने तीखी आपत्ति जताई। नितिन नबीन ने कहा कि गुजरात देश के महान नेताओं की भूमि है।
उन्होंने कहा कि, गुजरात महात्मा गांधी और सरदार पटेल की धरती है और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी भूमि से देश को आगे बढ़ा रहे हैं।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने भी खड़गे के बयान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि, किसी राज्य की जनता को अनपढ़ या मूर्ख कहना एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष के लिए बेहद शर्मनाक है।
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि, गुजरात की साक्षरता दर लगभग 82 प्रतिशत है और यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में और बेहतर हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि, क्या सिर्फ मोदी से राजनीतिक विरोध के कारण कांग्रेस नेता कुछ भी बोल सकते हैं।
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बीजेपी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि, कांग्रेस मुस्लिम वोट बैंक को साधने के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रही है। उनका कहना है कि ऐसे बयान समाज में धार्मिक विभाजन बढ़ाने का काम करते हैं। बीजेपी नेताओं का मानना है कि, देश की जनता अब इस तरह की राजनीति को पसंद नहीं करती और चुनाव में इसका जवाब देती है।
इस विवाद के बीच राजनीति में भाषा की मर्यादा को लेकर भी बहस तेज हो गई है। नितिन नबीन ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का विरोध होना चाहिए, लेकिन भाषा की मर्यादा नहीं टूटनी चाहिए। उन्होंने कहा कि, राजनीति में शब्दों की एक सीमा होनी चाहिए। राष्ट्रीय हित के मुद्दे उठाना जरूरी है, लेकिन व्यक्तिगत या अपमानजनक भाषा लोकतंत्र के लिए सही नहीं है।