छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के कुमनार इलाके में सुरक्षाबलों ने नया कैंप स्थापित कर नक्सलियों के गढ़ पर निर्णायक चोट की है। कभी यह क्षेत्र नक्सलियों का अघोषित साम्राज्य माना जाता था, लेकिन अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।
नारायणपुर जिले के ओरछा से लगे कुमनार गांव को लंबे समय तक नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का सेफ जोन माना जाता रहा। यहां आम लोगों के बीच खौफ का माहौल था और बाहरी लोगों का आना-जाना लगभग नामुमकिन था। लेकिन अब इसी इलाके में पुलिस और सुरक्षा बलों ने कैंप खोलकर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है।
यह भी पढ़ें: CG News : एक हफ्ते बाद छत्तीसगढ़ बनेगा नक्सल मुक्त, 4 हजार नक्सलियों में से सिर्फ 40 ही बचे
इस क्षेत्र में नक्सलियों के टॉप लीडर बसवाराजू का खासा प्रभाव था। उसके खात्मे के बाद नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगा, जिसका असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिख रहा है। जहां पहले डर और बंदूक का राज था, वहां अब सुरक्षा बलों की निगरानी में सामान्य जीवन लौटने लगा है।
कुमनार जैसे इलाकों में कभी तिरंगा फहराना भी मुश्किल माना जाता था। नक्सलियों के डर से ग्रामीण सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय प्रतीकों से दूरी बनाए रखते थे। लेकिन अब हालात बदल गए हैं और ग्रामीणों में नई उम्मीद जगी है। सुरक्षा कैंप के खुलने के बाद यहां पहली बार खुले तौर पर तिरंगा फहराने की तैयारी हो रही है, जो लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक माना जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अब वे खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पहले जहां हर समय डर बना रहता था, अब वहां सुरक्षा बलों की मौजूदगी से विश्वास बढ़ा है। प्रशासन भी इस इलाके में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे लोगों का जीवन स्तर सुधर सके।
वर्ष 2025 तक यह पूरा क्षेत्र नक्सलियों के प्रभाव में था और इसे उनका अघोषित गढ़ माना जाता था। लेकिन लगातार ऑपरेशन और रणनीतिक कार्रवाई के बाद अब यह इलाका धीरे-धीरे नक्सल मुक्त होता जा रहा है।
कुमनार में सुरक्षा और जन सुविधा कैंप की स्थापना को केवल सुरक्षा के नजरिए से ही नहीं, बल्कि विकास की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी सुविधाओं के पहुंचने का रास्ता भी साफ होगा।
कुल मिलाकर, कुमनार में सुरक्षा बलों की यह पहल नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक अहम उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है, जहां अब डर की जगह भरोसा और विकास की उम्मीद ने ले ली है।