CG News :एक हफ्ते बाद छत्तीसगढ़ बनेगा नक्सल मुक्त, 4 हजार नक्सलियों में से सिर्फ 40 ही बचे

छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने की जो टाइमलाइन दी गई है उसमें एक हफ्ता ही बाकी है। राज्य में चलाए गए लगातार ऑपरेशन्स के परिणामस्वरूप 4 हजार नक्सलियों में से सिर्फ 40 ही बचे हैं।
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एक हफ्ते बाद छत्तीसगढ़ बनेगा नक्सल मुक्त, 4 हजार नक्सलियों में से सिर्फ 40 ही बचे
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    बस्तर से पुष्पेन्द्र सिंह। गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा के अनुसार 31 मार्च के पहले देश को नक्सलमुक्त करना है। इस टाइम लाइन पर छत्तीसगढ़ पुलिस का नक्सल ऑपरेशन जारी है। बस्तर रेंज के आईजी और नक्सल ऑपरेशन विशेषज्ञ सुंदरराज पी. का कहना है कि बचे सात दिन हमारे लिए कठिन चुनौती है, लेकिन विश्वास है कि अभियान सफल होगा। बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने भोपाल से छत्तीसगढ़ पहुंचे पीआईबी प्रेस टूर के दल को नक्सल समस्या और लाल सलाम को खत्म करने के अभियान पर कार्रवाई के साथ अपने अनुभव बांटे। बस्तर जिले के पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा भी इस मौके पर मौजूद थे।

    समर्पण कराने का अभियान जारी

    आईजी ने बताया कि छत्तीसगढ़ इलाके में नक्सलियों की कमर लगभग पूरी तरह तोड़ दी है। एक समय था जब नक्सलियों की संख्या चार हजार तक हो गई थी, वह आज करीब 40-45 तक बची है। इनमें मुख्य रूप से पश्चिम बस्तर डिवीजन का नक्सली पापा राव प्रमुख है । इनके समर्पण कराने का अभियान चल रहा है। चूंकि हमें 31 मार्च तक नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ राज्य बनाना है, इसके लिए हम पूरी ताकत से जुटे हैं। अगर सफल नहीं हो पाये तो भी ऑपरेशन जारी रहेगा।

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    ऐसे टूट रही नक्सलियों की कमर

    आईजी सुंदरराज पी.  का कहना है कि माओवादियों की संख्या अब लगातार घट रही है, उनके हथियार कम हो रहे हैं जिससे उनकी ताकत टूट रही है। उनका संख्या बल भी कम हुआ है । नक्सलियों को कथित मदद करने वाले गांव के लोग भी अब किनारा कर चुके हैं। हमारा सूचना तंत्र बहुत मजबूत हुआ है। यही कारण है कि वर्ष 2024- 25 में 600 माओवादियों के शव बरामद किए गए।

    जल, जंगल, जमीन के लिए सरकार के प्लान

    पीपुल्स समाचार के इस सवाल पर कि ‘नक्सलियों ने जल, जंगल, जमीन के लिए हथियार उठाए हैं और अब उनके समाप्त होने पर छत्तीसगढ़ में माइनिंग कंपनियां आ रही हैं । यानी हजारों, लाखों पेड़ काटे जाएंगे। इससे आदिवासियों के आक्रोश को कैसे रोका जाएगा?’ इस पर आईजी सुंदरराज पी. ने कहा कि आदिवासियों की संस्कृति और विरासत को हम देश दुनिया में पहुंचने के कसर नहीं छोड़ेंगे। इको टूरिज्म पर हमारा पूरा फोकस है और ग्रामीण आदिवासियों को रोजगार देने के साथ मार्केटिंग पर भी सरकार का पूरा ध्यान है। नक्सलियों के हिंसात्मक गतिविधि हमें खत्म करना है।

    सड़कों का विस्तार हो रहा, गांव-गांव में स्कूल-अस्पताल खुल रहे

    बस्तर आईजी सुंदरराज पी. का कहना है कि छत्तीसगढ़ में नक्सली मूवमेंट अब लगभग समापन पर है। यही कारण है कि राज्य में सड़कों का लगातार विस्तार हो रहा है गांव-गांव में स्कूल और अस्पताल खुल रहे हैं, बच्चों की शिक्षा पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है और आदिवासी बहुल क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं पर पूरा फोकस किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि डीआरजी में भर्ती कर रहे हैं, बस्तर फाइटर में लोकल भर्ती कर रहे हैं और मेगाफोर्स का गठन करने से  5 हजार से अधिक लोगों को आगे लाने का मौका मिला है।

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    नक्सल प्रभावित इलाकों में सघन अभियान चलाया

    छत्तीसगढ़ में पिछले चार दशकों से जमे नक्सलियों ने घने जंगलों में अपनी मजबूत पकड़ बना ली थी। आदिवासी क्षेत्रों को आधार बनाकर वे न केवल स्थानीय लोगों को प्रभावित कर रहे थे, बल्कि जल, जंगल और जमीन को अपनी शरणस्थली बना चुके थे। पड़ोसी राज्यों ओडिशा, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र से तालमेल कर उन्होंने समानांतर प्रभाव स्थापित करने की कोशिश की थी। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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