बस्तर में नक्सलवाद का अंत करीब?मोस्ट वॉन्टेड नक्सली पापा राव 17 साथियों के साथ कर सकता है सरेंडर, जानें क्या बोले CM साय

बस्तर में मोस्ट वॉन्टेड नक्सली कमांडर पापा राव के सरेंडर की खबर से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। 25 लाख का इनामी यह नक्सली अपने 17 साथियों के साथ हथियारों सहित आत्मसमर्पण कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी खत्म हो सकती है और नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को बड़ी सफलता मिलेगी।
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मोस्ट वॉन्टेड नक्सली पापा राव 17 साथियों के साथ कर सकता है सरेंडर, जानें क्या बोले CM साय
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लंबी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। बस्तर के बड़े नक्सली कमांडरों में शामिल मोस्ट वॉन्टेड पापा राव के सरेंडर की खबर ने सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन में हलचल मचा दी है। बताया जा रहा है कि करीब 25 लाख रुपए का इनामी यह नक्सली कमांडर अपने 17 साथियों के साथ हथियारों सहित आत्मसमर्पण कर सकता है। इसी बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी पापा राव के संभावित सरेंडर को लेकर बड़ा बयान दिया है।

    अगर ऐसा होता है तो इसे बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ सबसे बड़ी सफलताओं में गिना जाएगा, क्योंकि पापा राव को पश्चिम बस्तर में सक्रिय अंतिम बड़े फाइटर कमांडरों में से एक माना जाता रहा है।

    CM  साय बोले- नक्सलवाद खत्म होने के करीब

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पापा राव के संभावित सरेंडर को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त अभियान के कारण नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई निर्णायक चरण में पहुंच गई है।

    मुख्यमंत्री के मुताबिक, नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन 31 मार्च 2026 तय की गई है। कई बड़े नक्सली पहले ही सरेंडर कर चुके हैं या मारे जा चुके हैं। पापा राव का सरेंडर अभियान की बड़ी सफलता साबित हो सकता है।

    विजय शर्मा का बयान

    छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने भी इस संभावित सरेंडर को नक्सलवाद के अंत की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि, अगर पापा राव सरेंडर करता है तो यह नक्सलवाद के ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकता है।

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    कौन है पापा राव?

    पापा राव उर्फ मंगू करीब 56 साल का नक्सली कमांडर है, जो छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला बताया जाता है। वह नक्सल संगठन की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का सदस्य और पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज रहा है।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पापा राव लंबे समय तक बस्तर क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों की कमान संभालता रहा है। जंगलों और पहाड़ी इलाकों की गहरी जानकारी होने के कारण वह कई बार पुलिस कार्रवाई से बचकर निकल चुका है।

    पापा राव की प्रोफाइल

    जानकारी

    विवरण

    नाम

    पापा राव उर्फ मंगू

    उम्र

    56 वर्ष

    मूल निवास

    सुकमा, छत्तीसगढ़

    पद

    पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी इंचार्ज

    संगठन

    दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी

    इनाम

    करीब 25 लाख रुपए

    हथियार

    AK-47 समेत अन्य हथियार

    अनुभव

    कई बड़े हमलों की रणनीति में भूमिका

    17 साथियों के साथ सरेंडर की संभावना

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लंबे समय से फरार चल रहे पापा राव से बातचीत के बाद सरेंडर की स्थिति बनी है। बताया जा रहा है कि, पुलिस की एक टीम इंद्रावती नेशनल पार्क क्षेत्र के एक गोपनीय स्थान के लिए रवाना हुई है। संभावना है कि वहां से पापा राव और उसके साथियों को लेकर जगदलपुर लाया जाएगा।

    जानकारी के मुताबिक, पापा राव अपने 17 साथियों के साथ सरेंडर कर सकता है। सभी के पास हथियार भी मौजूद हैं। सरेंडर बस्तर रेंज आईजी पी. सुंदरराज के सामने हो सकता है। अगर यह आत्मसमर्पण होता है, तो बस्तर में नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लग सकता है।

    क्यों अहम है पापा राव का सरेंडर

    पापा राव को बस्तर के सक्रिय बड़े नक्सली चेहरों में गिना जाता है। हाल ही में कई टॉप नक्सली या तो मारे जा चुके हैं या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है। ऐसे में पापा राव को अंतिम बड़े फाइटर कमांडरों में से एक माना जा रहा था।

    सरेंडर से संभावित असर

    • पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी लगभग खत्म हो सकती है
    • नक्सल संगठन की ऑपरेशनल ताकत कमजोर होगी
    • बस्तर में माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगेगा
    • नक्सलवाद खत्म करने के अभियान को गति मिलेगी

    पापा राव से जुड़े बड़े हमले

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पापा राव का नाम कई बड़े हमलों में सामने आया है। इनमें से एक बड़ा हमला कुटरू-बेदरे रोड पर हुआ आईईडी ब्लास्ट था, जिसमें कई जवान शहीद हुए थे। इसके अलावा उसने कई एंबुश और सुरक्षाबलों पर हमलों की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी।

    पापा राव का पारिवारिक नेटवर्क भी नक्सली संगठन से जुड़ा रहा है। उसकी पत्नी उर्मिला भी पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की सदस्य थी। बताया जाता है कि वह एक मुठभेड़ में मारी जा चुकी है। 

    यह भी पढ़ें: छत्तीसगढ़ बोर्ड का बड़ा फैसला : 12वीं हिंदी परीक्षा रद्द, 10 अप्रैल को फिर होगा एग्जाम

    एक साल में ऐसे टूटा नक्सली नेटवर्क

    पिछले एक साल में सुरक्षाबलों की कार्रवाई से बस्तर में नक्सली नेटवर्क को बड़ा नुकसान हुआ है। कई बड़े नक्सली नेता मारे गए या उन्होंने हथियार डाल दिए।

    पिछले डेढ़ साल में मारे गए प्रमुख नक्सली

    नक्सली नेता

    पद

    माड़वी हिड़मा

    सेंट्रल कमेटी मेंबर

    बसवाराजू

    महासचिव

    जयराम उर्फ चलपति

    सेंट्रल कमेटी

    विवेक उर्फ प्रयाग मांझी

    सेंट्रल कमेटी

    गजरला रवि

    सेंट्रल कमेटी

    गणेश उइके

    सेंट्रल कमेटी

    सहदेव सोरेन

    सेंट्रल कमेटी

    इनके अलावा कई अन्य कमांडरों को भी सुरक्षा बलों ने मार गिराया है।

    2025 में नक्सल ऑपरेशन के आंकड़े

    पिछले साल के आंकड़े बताते हैं कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान काफी तेज हुआ है।

    गतिविधि

    संख्या

    पुलिस-नक्सली मुठभेड़

    99

    मारे गए नक्सली

    256

    गिरफ्तार नक्सली

    884

    सरेंडर करने वाले नक्सली

    1562

    बरामद हथियार

    645

    बरामद IED

    875

    शहीद जवान

    23

    मारे गए नागरिक

    46

    देवा के सरेंडर के बाद पापा राव ही बचा था

    बस्तर में बटालियन नंबर-1 का कमांडर देवा पहले ही हथियार डाल चुका है। इसके बाद पापा राव को ही पश्चिम बस्तर का सबसे सक्रिय फाइटर माना जा रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल बस्तर के अलग-अलग इलाकों में लगभग 200 से 300 आर्म्ड कैडर ही बचे हैं, जो छोटे-छोटे समूहों में छिपे हुए हैं।

    दो बड़े नक्सली अभी भी फरार

    हालांकि सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक नक्सल संगठन में अभी दो बड़े नेता सक्रिय हैं।

    मोस्ट वॉन्टेड नक्सली

    नाम

    इनाम

    मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति

    3.5 करोड़

    मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर

    1.30 करोड़

    इन दोनों को संगठन की मौजूदा कमान संभालने वाला माना जाता है।

    गणपति: नक्सल हमलों का मास्टरमाइंड

    मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति नक्सली संगठन का पूर्व महासचिव रह चुका है। 1992 से 2018 तक संगठन के कई बड़े हमले उसकी रणनीति के तहत हुए।

    गणपति से जुड़े बड़े हमले

    • 2003 - चंद्रबाबू नायडू पर हमला
    • 2007 - दंतेवाड़ा रानीबोदली हमला
    • 2010 - ताइमेटला हमला (76 जवान शहीद)
    • 2013 - झीरम घाटी हमला

    मिशिर बेसरा: एंबुश लगाने में माहिर

    मिशिर बेसरा झारखंड का रहने वाला है और नक्सल संगठन के पोलित ब्यूरो का सदस्य है। उसे एंबुश लगाने और बंकर बनाने में माहिर माना जाता है। उसका मुख्य काम संगठन के लिए धन जुटाना और नए लड़ाकों की भर्ती करना बताया जाता है।

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    बस्तर में नक्सलवाद का अंत करीब?

    सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि, अगर पापा राव सरेंडर करता है तो बस्तर में नक्सल नेटवर्क लगभग खत्म हो जाएगा। पिछले कुछ सालों में सुरक्षाबलों की कार्रवाई और लगातार सरेंडर की वजह से संगठन की ताकत काफी कमजोर हो चुकी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पापा राव सच में हथियार डालता है या नहीं। अगर ऐसा होता है तो बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में यह एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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