PlayBreaking News

भोपाल:पेयजल को लेकर बड़ा दावा, यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास 70% नमूने मिले दूषित

भोपाल गैस त्रासदी पीड़ित संगठनों की जांच में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास 30 बस्तियों से लिए गए 63 में से 43 पेयजल नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म मिला। संगठनों ने नगर निगम पर दूषित पानी की आपूर्ति का आरोप लगाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और सीवर-ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने की मांग की।
Follow on Google News
पेयजल को लेकर बड़ा दावा, यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास 70% नमूने मिले दूषित
यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास 70% नमूने मिले दूषित

यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भोपाल गैस त्रासदी पीड़ितों के चार संगठनों ने दावा किया है कि नगर निगम द्वारा फैक्ट्री के आसपास के इलाकों में सीवेज से दूषित पानी की आपूर्ति की जा रही है। संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो शहर में इंदौर के भागीरथपुरा जैसी स्थिति बन सकती है। संगठनों ने शुक्रवार को अपनी ओर से कराई गई पेयजल जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की। रिपोर्ट के अनुसार 30 बस्तियों से लिए गए 63 पानी के नमूनों में से 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म (मल से जुड़े बैक्टीरिया) पाए गए। यानी जांचे गए करीब 70 प्रतिशत नमूने पीने योग्य नहीं मिले।

30 बस्तियों से लिए गए थे 63 नमूने

भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने बताया कि इस महीने यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास स्थित 30 बस्तियों के नलों से कुल 63 पानी के नमूने एकत्र किए गए थे। जांच में 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म मिलने की पुष्टि हुई। उनके मुताबिक इसका अर्थ है कि 30 में से 19 क्षेत्रों में लोगों को दूषित पेयजल की आपूर्ति हो रही है।

बड़ा तालाब और कोलार डैम की सप्लाई पर भी सवाल

रिपोर्ट के अनुसार, बड़ा तालाब (अपर लेक) से सप्लाई किए गए पानी के करीब 90 प्रतिशत नमूने दूषित पाए गए जबकि कोलार डैम से आपूर्ति किए गए पानी के 25 प्रतिशत नमूनों में भी फीकल कोलीफॉर्म की मौजूदगी मिली। संगठनों का आरोप है कि प्रभावित इलाकों के लोग लंबे समय से सीवेज मिश्रित पानी पीने को मजबूर हैं।

जलजनित बीमारियों का बढ़ रहा खतरा

संगठनों का कहना है कि दूषित पानी की वजह से इन क्षेत्रों में दस्त, उल्टी, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कई परिवार एक साथ बीमार पड़ रहे हैं और निजी क्लीनिकों में टाइफाइड के मरीजों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।

ये भी पढ़ें: भिवंडी में आधी रात मचा हड़कंप! देखते ही देखते ढही चार मंजिला इमारत, 9 की मौत, कई लोग मलबे में फंसे, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का दिया हवाला

भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा कि वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे से आसपास का भूजल रसायनों और भारी धातुओं से प्रदूषित हो चुका है। इसके बाद प्रभावित क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। वहीं भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने बताया कि अगस्त 2018 में पेयजल में मल मिलने की शिकायतों पर सुप्रीम Court ने नगर निगम को प्रभावित क्षेत्रों में सीवर लाइन और बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने का आदेश दिया था। नगर निगम ने तीन महीने में कार्य पूरा करने का आश्वासन दिया था लेकिन 8 वर्ष बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

ये भी पढ़ें: Bijapur News: इंद्रावती उफान पर: आधी रात तक चला रेस्क्यू, बढ़ते जलस्तर से बीजापुर के कई गांवों पर बाढ़ का खतरा

जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की सदस्य रचना धींगरा ने दूषित पेयजल आपूर्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी कर लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डाला जा रहा है। उन्होंने मांग की कि भागीरथपुरा जैसी घटना का इंतजार करने के बजाय जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में सीवर और ड्रेनेज परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए तथा पेयजल की गुणवत्ता की स्वतंत्र निगरानी की व्यवस्था भी शुरू की जाए।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts