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TET और नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता की मांग को लेकर शिक्षकों का प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान

भोपाल में TET की अनिवार्यता खत्म करने, पुरानी पेंशन और पहली नियुक्ति से वरिष्ठता की गणना की मांग को लेकर शिक्षकों ने धरना दिया। शिक्षकों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
TET और नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता की मांग को लेकर शिक्षकों का प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान
TET और पुरानी पेंशन की मांग को लेकर शिक्षकों का प्रदर्शन

भोपाल। शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET की अनिवार्यता खत्म करने और पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग को लेकर रविवार को मध्यप्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से शिक्षक राजधानी भोपाल पहुंचे। लिंक रोड नंबर-2 स्थित अंबेडकर पार्क में शिक्षक संघर्ष समिति और वरिष्ठता बहाली मंच के बैनर तले धरना दिया गया। प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने साफ कहा कि वे किसी भी स्थिति में TET नहीं देंगे और सरकार से पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे अध्यापकों से दोबारा पात्रता परीक्षा लेने का फैसला उचित नहीं है। उनका तर्क है कि उनकी नियुक्ति पहले से निर्धारित D.Ed.-B.Ed. जैसी शैक्षणिक पात्रताओं के आधार पर हुई थी। ऐसे में वर्षों की सेवा के बाद फिर से परीक्षा की अनिवार्यता लागू करने का वे विरोध कर रहे हैं।

प्रदेश के अलग-अलग संभागों से पहुंचे शिक्षक

रविवार को सुबह करीब 11 बजे से शिक्षक अंबेडकर पार्क में जुटना शुरू हुए, जबकि दोपहर करीब 1 बजे से धरना शुरू किया गया। प्रदर्शन में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, शहडोल, सागर और रीवा संभाग के विभिन्न जिलों से शिक्षक और शिक्षिकाएं शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग TET की अनिवार्यता खत्म करना है। इसके साथ ही शिक्षक अपनी सेवा अवधि, वरिष्ठता और पेंशन से जुड़े मामलों का भी स्थायी समाधान चाहते हैं। प्रदेश में शिक्षक संगठनों की ओर से TET से छूट और वरिष्ठता बहाली को लेकर अलग-अलग चरणों में आंदोलन पहले भी किए जा रहे हैं।

भारत भार्गव बोले- वर्षों की सेवा के बाद परीक्षा क्यों

अध्यापक संघर्ष समिति के पदाधिकारी भारत भार्गव ने सरकार के TET संबंधी फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों से फिर पात्रता परीक्षा लेने का फैसला उन्हें स्वीकार नहीं है। भार्गव ने कहा कि 1998 या उसके बाद नियुक्त किए गए शिक्षकों की योग्यता और सेवा को देखते हुए इतने वर्षों बाद दोबारा परीक्षा लेना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, इन शिक्षकों का चयन पहले ही D.Ed.-B.Ed. जैसी निर्धारित पात्रताओं के आधार पर हुआ था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब शिक्षक अपनी सेवा के अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं तो उनसे दोबारा परीक्षा लेना किस लिहाज से उचित है। उनका कहना है कि शिक्षक परीक्षा से डर नहीं रहे, लेकिन वर्षों की सेवा के बाद इस तरह की बाध्यता पर सवाल जरूर है।

10 साल का छठा और ढाई साल का सातवां वेतनमान नहीं मिलने का दावा

भारत भार्गव ने शिक्षकों की दूसरी समस्याओं का जिक्र करते हुए दावा किया कि उन्हें 10 साल का छठा वेतनमान और करीब ढाई साल का सातवां वेतनमान नहीं दिया गया। उन्होंने सेवा अवधि की गणना को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। भार्गव के मुताबिक उनकी नियुक्ति वर्ष 1998 में हुई थी और अब तक करीब 28 साल की सेवा हो चुकी है। इसके बावजूद सरकारी पोर्टल पर उनकी सेवा अवधि केवल 8 साल दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सेवा अवधि और वरिष्ठता से जुड़े इस तरह के अंतर का असर शिक्षकों के वेतन, पदोन्नति और दूसरी सेवा सुविधाओं पर पड़ता है। शिक्षक संगठनों की ओर से लंबे समय से पहली नियुक्ति की तारीख से सेवा अवधि और वरिष्ठता की गणना की मांग उठाई जाती रही है।

पुरानी पेंशन को लेकर भी सरकार से सवाल

प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने पुरानी पेंशन योजना यानी OPS लागू करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। भारत भार्गव ने कहा कि सांसद और विधायक आजीवन पेंशन, वेतन और भत्तों जैसी सुविधाएं लेते हैं और शिक्षकों ने कभी इसका विरोध नहीं किया। उन्होंने सवाल किया कि जब जनप्रतिनिधियों के लिए पेंशन की व्यवस्था है तो लंबे समय तक सेवाएं देने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना क्यों नहीं लागू की जा रही। मध्यप्रदेश सरकार पहले विधानसभा में स्पष्ट कर चुकी है कि 1 जनवरी 2005 या उसके बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए नई पेंशन योजना लागू है, जबकि 2005 से पहले नियुक्त कर्मचारी पुरानी पेंशन नियमों के दायरे में आते हैं। पुरानी पेंशन की व्यापक बहाली को लेकर सरकार ने पूर्व में कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं होने की जानकारी भी दी थी।

शिक्षकों का कहना- TET किसी भी हाल में नहीं देंगे

धरने में शामिल शिक्षकों ने कहा कि वे किसी भी हाल में TET देने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों के लिए सेवा के इस पड़ाव पर दोबारा पात्रता परीक्षा की शर्त लागू करना उचित नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत दी जाए और सेवा अवधि तथा वरिष्ठता से जुड़े मामलों का भी समाधान किया जाए। हाल के दिनों में भोपाल में TET के विरोध में शिक्षक संगठनों के अलग-अलग धरने और उपवास-सत्याग्रह भी चल रहे हैं। एक संगठन ने TET से छूट के साथ पहली नियुक्ति से सेवा गणना और ई-अटेंडेंस से जुड़ी मांगें भी उठाई हैं।

आंदोलन आगे भी जारी रखने की चेतावनी

शिक्षक संघर्ष समिति और वरिष्ठता बहाली मंच ने साफ किया है कि मांगों का समाधान होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को शिक्षकों की लंबित समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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