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भोपाल:शहर में कचरा फेंकना पड़ेगा महंगा! ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नए नियमों पर मंथन

भोपाल नगर निगम के आईएसबीटी स्थित मीटिंग हॉल में मंगलवार को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नए नियमों को लेकर प्रजेंटेशन दिया गया। बैठक में निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी की मौजूदगी में एक्सपर्ट ने नियमों के बारे में बताया। इस दौरान सत्ता और विपक्ष के पार्षदों ने सफाई व्यवस्था, संसाधनों की कमी और नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई अहम सवाल उठाए।
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शहर में कचरा फेंकना पड़ेगा महंगा! ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नए नियमों पर मंथन

भोपाल। नगर निगम द्वारा प्रस्तावित नए नियमों के तहत कचरा प्रबंधन को लेकर सख्ती बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि पार्षदों ने जमीनी स्तर की चुनौतियों, कर्मचारियों की कमी और सफाई व्यवस्था में खामियों को प्रमुख मुद्दा बताया। बैठक में नियमों के साथ-साथ उनके क्रियान्वयन की क्षमता पर भी व्यापक चर्चा देखने को मिली।

खुले में कचरा फेंकने और जलाने पर होगी सख्ती

बैठक में विशेषज्ञ अतुल खरे ने नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों की जानकारी देते हुए बताया कि सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने या जलाने वालों के खिलाफ निगम जुर्माने की कार्रवाई करेगा। इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति या संस्था 100 से अधिक लोगों का आयोजन करती है तो उसे कार्यक्रम से कम से कम तीन दिन पहले नगर निगम को सूचना देना अनिवार्य होगा। अधिकारियों का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य शहर को अधिक स्वच्छ और व्यवस्थित बनाना है। साथ ही कचरा प्रबंधन की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

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विपक्ष ने उठाया नालों की सफाई का मुद्दा 

बैठक के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने शहर की मौजूदा सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे मोहम्मद सरवर ने कहा कि पॉलीथिन प्रतिबंध के बावजूद शहर में इसका उपयोग जारी है और प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सूखा और गीला कचरा अलग-अलग एकत्रित करने के दावे कई क्षेत्रों में धरातल पर दिखाई नहीं देते। नालियों की सफाई के बाद कचरा लंबे समय तक सड़कों पर पड़ा रहता है, जिससे स्वच्छता प्रभावित होती है। पार्षदों ने पहले व्यवस्थाओं को सुधारने और फिर नए नियम लागू करने की बात कही।

'कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए'

कांग्रेस पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान सहित कई जनप्रतिनिधियों ने कहा कि नए नियमों को लागू करने से पहले नगर निगम को अपनी कार्यक्षमता बढ़ानी होगी। उनका कहना था कि कई वार्डों में कचरा वाहन खराब होने पर कई दिनों तक कचरा नहीं उठता। कर्मचारियों की कमी के कारण नियमित सफाई भी नहीं होती। बीजेपी पार्षद विलास राव घाड़गे ने भी माना कि वार्डों में कर्मचारियों की संख्या लगातार कम हो रही है, जबकि कचरे की मात्रा बढ़ती जा रही है। ऐसे में संसाधनों और सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ोतरी की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

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सफाई व्यवस्था पर हुई बहस 

बैठक के दौरान सफाई व्यवस्था को लेकर सत्ता और विपक्ष के पार्षदों के बीच बहस भी देखने को मिली। कांग्रेस पार्षद देवांशु कंसाना ने अपने वार्ड में गिरे पेड़ को हटाने में हुई देरी और सफाई कार्यों की धीमी गति पर नाराजगी जताई। इस पर बीजेपी पार्षद बृजला सचाण सहित अन्य पार्षदों ने असहमति जताते हुए कहा कि उनके क्षेत्रों में ऐसी कोई समस्या नहीं है। वहीं महापौर मालती राय ने कहा कि जमीनी हकीकत को वही पार्षद बेहतर जानते हैं जो नियमित रूप से अपने क्षेत्र का निरीक्षण करते हैं। 

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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