नगर निगम की कार्रवाई से भड़के व्यापारी, रोशनपुरा चौराहे पर किया चक्काजाम, सड़क पर उतरकर जताया विरोध

भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक संस्थानों पर नगर निगम की कार्रवाई का विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में व्यापारी सड़क पर उतर आए। रोशनपुरा चौराहे और आसपास के इलाकों में व्यापारियों ने नारेबाजी करते हुए चक्काजाम किया। उनके हाथों में विरोध के पोस्टर और बैनर थे। व्यापारियों का कहना है कि शहर के कई रहवासी इलाकों में दुकानें, ऑफिस और दूसरे व्यावसायिक संस्थान कई साल से चल रहे हैं। इनसे सिर्फ कारोबारियों को ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों और दूसरे लोगों को भी रोजगार मिला हुआ है। ऐसे में अचानक इन संस्थानों को बंद कराने की कार्रवाई से कई परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है। व्यापारी नगर निगम की कार्रवाई को पूरी तरह रोकने की मांग कर रहे हैं। साथ ही उनका कहना है कि सरकार को ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे वर्षों से चल रहे इन कारोबारों को नियमों के तहत नियमित किया जा सके।
रोशनपुरा चौराहे पर व्यापारियों का प्रदर्शन
नगर निगम की कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को व्यापारी रोशनपुरा चौराहे पर जमा हुए। व्यापारियों ने सड़क पर नारे लगाए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। व्यापारियों का कहना है कि रहवासी क्षेत्रों में कारोबार अचानक शुरू नहीं हुआ है। कई जगहों पर वर्षों से दुकानें और दूसरे संस्थान चल रहे हैं। यहां काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी काफी है। अगर इन संस्थानों को बंद किया गया तो इसका असर सीधे रोजगार पर पड़ेगा। व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि सीलिंग या कार्रवाई करने से पहले नियमितीकरण का विकल्प दिया जाए।
750 से ज्यादा संस्थानों पर कार्रवाई की तैयारी
नगर निगम ने रहवासी क्षेत्रों में चल रहे 750 से ज्यादा व्यावसायिक संस्थानों को गतिविधियां बंद करने के लिए अंतिम समय देने की तैयारी की है। इन संस्थानों को करीब तीन दिन का समय दिया जाएगा। इनमें अरेरा कॉलोनी, बावड़िया कलां और रोहित नगर के 429 संस्थान भी शामिल हैं। नगर निगम के उपायुक्त भुवन गुप्ता के अनुसार, इन संस्थानों को अंतिम सूचना पत्र जारी किए जा रहे हैं। अगर तय समय के अंदर व्यावसायिक गतिविधियां बंद नहीं की गईं तो नगर निगम की ओर से सीलिंग और अतिक्रमण हटाने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। इस खबर के सामने आने के बाद व्यापारियों में नाराजगी बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में संस्थानों को एक साथ बंद करना व्यावहारिक नहीं है।
250 कारोबारियों ने निगम को दिए जवाब
नगर निगम ने इससे पहले अरेरा कॉलोनी, बावड़िया कलां और रोहित नगर में 429 संस्थानों को नोटिस जारी किए थे। इनमें से 60 संस्थानों को 24 घंटे का अंतिम नोटिस भी दिया गया था। नोटिस मिलने के बाद करीब 250 संस्थानों के संचालकों ने नगर निगम को अपना जवाब दिया। उन्होंने अपने जवाब में कई बातें रखीं। कुछ संचालकों ने कहा कि वे कमर्शियल टैक्स जमा कर रहे हैं। कुछ ने व्यावसायिक बिजली कनेक्शन होने की बात कही। वहीं कुछ लोगों ने बताया कि उनके भवन 18 मीटर चौड़ी सड़क पर स्थित हैं। हालांकि, नगर निगम अधिकारियों ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना। निगम का कहना है कि केवल कमर्शियल टैक्स जमा करने या व्यावसायिक बिजली कनेक्शन होने से किसी भवन का स्वीकृत उपयोग अपने आप नहीं बदल जाता।
अब तक 6,589 नोटिस जारी
नगर निगम की कार्रवाई का दायरा काफी बड़ा है। अब तक कुल 6,589 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। रविवार तक नगर निगम ने 5,778 नोटिस जारी किए थे। इसके बाद सोमवार को 811 और नोटिस जारी किए गए। इस तरह कुल नोटिस की संख्या 6,589 पहुंच गई है। इनमें से करीब 750 मामलों में अगले तीन दिनों के अंदर अंतिम अवधि पूरी होने वाली है। वहीं अरेरा कॉलोनी, बावड़िया कलां और रोहित नगर के 429 संस्थान भी कार्रवाई की सूची में हैं। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में भोपाल में नगर निगम और व्यापारियों के बीच विवाद और बढ़ सकता है।
व्यापारियों ने कहा- 'रोजगार पर पड़ेगा सीधा असर'
व्यापारियों का कहना है कि रहवासी इलाकों में कई व्यावसायिक गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं। समय के साथ शहर का स्वरूप भी बदल गया है। जिन इलाकों में पहले सिर्फ घर थे, वहां अब दुकानें, ऑफिस, क्लीनिक और दूसरे कारोबार भी चल रहे हैं। व्यापारियों का तर्क है कि अगर इन संस्थानों को अचानक बंद कराया गया तो इसका असर सिर्फ मालिकों पर नहीं पड़ेगा। वहां काम करने वाले कर्मचारी, छोटे कारोबारी, सप्लायर और दूसरे जुड़े लोग भी प्रभावित होंगे। उनका कहना है कि किसी भी कार्रवाई से पहले सरकार को कारोबारियों के साथ बातचीत करनी चाहिए और ऐसी नीति बनानी चाहिए जिससे नियमों का पालन भी हो और लोगों का रोजगार भी न छिने।
गुजरात की तरह नियमितीकरण की मांग
व्यापारी अब मध्यप्रदेश सरकार से नियमितीकरण की नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि गुजरात में जिस तरह अनधिकृत निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को नियमों के तहत नियमित करने के लिए कानून बनाया गया है, उसी तरह मध्यप्रदेश में भी व्यवस्था होनी चाहिए। व्यापारियों ने मांग की है कि भोपाल का नया मास्टर प्लान जल्द लागू किया जाए। इसके साथ ही मिक्स लैंड यूज का प्रावधान भी किया जाए, ताकि ऐसे इलाकों में जहां घरों के साथ कारोबार लंबे समय से चल रहे हैं, वहां स्पष्ट नियम बनाए जा सकें। व्यापारियों का कहना है कि वर्षों से चल रहे कारोबार को सीधे बंद करने के बजाय उन्हें नियमों के दायरे में लाने का मौका मिलना चाहिए।
सरकार के फैसले पर टिकी नजर
फिलहाल भोपाल में नगर निगम की कार्रवाई और व्यापारियों के विरोध के बीच मामला गर्म है। एक तरफ निगम का कहना है कि भवनों का इस्तेमाल स्वीकृत नियमों के अनुसार होना चाहिए। दूसरी तरफ व्यापारी लंबे समय से चल रहे कारोबार को नियमित करने की मांग कर रहे हैं।











