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भोपाल में PHE दफ्तर के बाहर ठेकेदारों का ढोल-नगाड़ों के साथ प्रदर्शन, अफसरों की खींचतान में अटके भुगतान

भोपाल में PHE के जल भवन के बाहर एकल नल-जल योजना के ठेकेदारों ने ढोल-नगाड़ों के साथ प्रदर्शन किया। लंबित भुगतान और अधिकारियों के बीच फाइलों के विवाद का मामला सामने आया।
भोपाल में PHE दफ्तर के बाहर ठेकेदारों का ढोल-नगाड़ों के साथ प्रदर्शन, अफसरों की खींचतान में अटके भुगतान
PHE दफ्तर के बाहर ठेकेदारों का ढोल-नगाड़ों के साथ प्रदर्शन

भोपाल। राजधानी भोपाल में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग यानी PHE के प्रमुख अभियंता कार्यालय (जल भवन) के बाहर बुधवार को एकल नल-जल योजना के ठेकेदारों ने ढोल-नगाड़ों के साथ धरना दिया। ठेकेदार लंबे समय से लंबित भुगतान जारी करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। उनका आरोप है कि भुगतान का मामला विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव वित्त तक पहुंचने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। ठेकेदारों के प्रदर्शन के बीच PHE विभाग में वित्तीय फाइलों के मूवमेंट को लेकर प्रमुख अभियंता संजय अंधवान (ENC) और अपर संचालक वित्त अंजू सिंह के बीच चल रहा विवाद भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि दोनों अधिकारियों के बीच फाइलों की प्रक्रिया और भुगतान को लेकर बनी स्थिति का असर ठेकेदारों के बिलों पर पड़ा है। हालांकि प्रदर्शन के बाद विभाग की ओर से लंबित बिल लगाने और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई है।

जून में लगाए बिल अब तक लंबित

एकल नल-जल योजना के ठेकेदारों ने बताया कि उनके काम से संबंधित कई बिल जून 2026 में लगाए गए थे लेकिन अब तक भुगतान नहीं हुआ है। भुगतान अटकने के कारण ठेकेदारों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ठेकेदारों का कहना है कि विभाग के पास बजट उपलब्ध होने के बावजूद बिलों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने बुधवार को जल भवन के बाहर ढोल-नगाड़ों के साथ धरना दिया।

दो अधिकारियों के बीच फाइलों को लेकर टकराव

जानकारी के मुताबिक अपर संचालक वित्त अंजू सिंह की करीब दो महीने पहले PHE में पदस्थापना हुई है। इसके बाद उन्होंने भुगतान से जुड़ी फाइलों को लेकर पहले अधीनस्थ कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा और बाद में प्रमुख अभियंता संजय अंधवान से भी जवाब मांगा। इसके बाद फाइलों के मूवमेंट और वित्तीय प्रक्रिया को लेकर दोनों अधिकारियों के बीच मतभेद की स्थिति बनी। विभागीय फाइलों की प्रक्रिया प्रभावित होने का असर भुगतान पर भी पड़ने लगा। इसी बीच विभाग के OSD संजीव कुमार गुप्ता की ओर से अपर संचालक वित्त अंजू सिंह को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया।

SNS स्पर्श सिस्टम की मॉनिटरिंग पर सवाल

अपर संचालक वित्त को जारी शोकॉज नोटिस में SNS स्पर्श प्रणाली से होने वाले भुगतान की प्रगति का भी जिक्र किया गया है। नोटिस के मुताबिक 5 सितंबर को अपर मुख्य सचिव ने भुगतान की प्रगति की समीक्षा की थी। नोटिस में कहा गया कि अपर संचालक वित्त की ओर से पर्याप्त मॉनिटरिंग नहीं किए जाने के कारण प्रगति खराब रही। जिलों से डिमांड आने के बाद भी समय पर राशि जारी नहीं किए जाने से बिलों के भुगतान में देरी होने की बात भी नोटिस में कही गई है। न्यायालयीन मामलों से जुड़े गणना पत्रकों के सत्यापन और अनुमोदन में लापरवाही का भी उल्लेख किया गया है। नोटिस में कहा गया कि इसके कारण अवमानना से जुड़े मामलों का निराकरण समय पर नहीं हो पा रहा है। इस मामले में अपर संचालक वित्त से तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया था। जवाब नहीं मिलने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई की बात भी नोटिस में कही गई।

फाइलों के मूवमेंट को लेकर दोनों पक्षों में अलग-अलग दावे

वित्तीय फाइलों को लेकर अपर संचालक वित्त की ओर से की गई टिप्पणियों में प्रमुख अभियंता की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। कुछ फाइलों की टीप में अपर संचालक ने उल्लेख किया है कि 15 जून से 12 अगस्त 2026 के बीच करीब दो महीने में प्रस्तुत नोटशीट में फाइल का मूवमेंट केवल वित्त अधिकारी के IFSC पोर्टल का लॉगिन पासवर्ड प्राप्त करने तक सीमित रहा। टीप में आरोप लगाया गया है कि प्रमुख अभियंता द्वारा इसका अनधिकृत और नियम विरुद्ध इस्तेमाल किया गया तथा बजट आदेशों पर भी उनके स्तर से हस्ताक्षर किए जाते रहे। अपर संचालक की ओर से यह भी कहा गया कि वित्त अधिकारी को कार्य संपादन से अलग रखकर प्रमुख अभियंता द्वारा IFMIS पोर्टल पर किए गए कार्यों की समीक्षा जांच का विषय है।

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बजट आदेशों के हस्ताक्षर को लेकर भी सवाल

अपर संचालक वित्त की एक अन्य टिप्पणी में कहा गया है कि 5 सितंबर तक प्रस्तुत फाइलों में बजट आवंटन आदेश ऐसे प्रारूप में पेश किए जाते रहे, जिसमें प्रमुख अभियंता के हस्ताक्षर आदेश के मुख्य पेज पर होते थे, जबकि वित्त अधिकारी के हस्ताक्षर प्रतिलिपि पर किए जाते थे। टिप्पणी में दावा किया गया कि इस प्रक्रिया के चलते भुगतान में बार-बार देरी की स्थिति बनती रही। अपर संचालक वित्त ने भुगतान से जुड़ी जिम्मेदारी प्रमुख अभियंता पर होने की बात भी ई-फाइल में दर्ज की है। इन विभागीय टिप्पणियों के बीच दोनों अधिकारियों के बीच फाइलों के मूवमेंट और भुगतान प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आया है।

प्रदर्शन के बाद बिल लगाने के निर्देश

जल निगम के MD वीएस चौधरी कोलसानी ने कहा कि बुधवार को हुआ प्रदर्शन वित्तीय भुगतान से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि एकल नल-जल योजना के ठेकेदार अपने काम का भुगतान चाहते हैं। उनके मुताबिक अधिकारियों को बताया गया है कि विभाग के पास बजट उपलब्ध है। जिन ठेकेदारों के बिल लंबित हैं, उनसे बिल लगाने को कहा गया है, ताकि भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। उन्होंने PHE विभाग में अपर संचालक वित्त अंजू सिंह और ENC संजय अंधवान के बीच फाइलों के मूवमेंट को लेकर टकराव होने की बात भी स्वीकार की।

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ठेकेदारों को अब भुगतान का इंतजार

बुधवार के प्रदर्शन के बाद विभाग की ओर से लंबित बिलों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का भरोसा दिया गया है। ऐसे में अब ठेकेदारों की नजर भुगतान पर है। एक ओर ठेकेदार अपने लंबित भुगतान की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग के भीतर वित्तीय फाइलों की प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों के बीच मतभेद सामने आए हैं। अब यह देखना होगा कि विभाग लंबित बिलों का भुगतान कितनी जल्दी करता है और अधिकारियों के बीच फाइलों को लेकर बनी स्थिति का समाधान किस तरह होता है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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