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Paraquat Dichloride :क्या है 'पैराक्वाट डाइक्लोराइड'? जिस पर भारत सरकार ने लगाया बैन, जानें इंसानों के लिए कितना खतरनाक!

भारत सरकार ने खतरनाक हर्बिसाइड पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर बैन लगाने का फैसला किया है। इसके निर्माण, आयात, बिक्री और वितरण पर रोक लगेगी। जानिए यह केमिकल क्यों है जानलेवा, शरीर पर इसका क्या असर पड़ता है, किसानों के लिए कितना खतरनाक है और 74 देशों के बाद भारत ने यह कदम क्यों उठाया।
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क्या है 'पैराक्वाट डाइक्लोराइड'? जिस पर भारत सरकार ने लगाया बैन, जानें इंसानों के लिए कितना खतरनाक!
भारत सरकार ने खतरनाक हर्बिसाइड पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर बैन लगाने का फैसला किया

Paraquat Dichloride। भारत सरकार ने किसानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है, सरकार ने खेतों में इस्तेमाल होने वाले जानलेवा केमिकल ‘पैराक्वाट डाइक्लोराइड’ पर बैन लगा दिया है। इस खतरनाक हर्बिसाइड के निर्माण, इम्पोर्ट, सेल और डिस्ट्रिब्यूशन पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला किया है। 

भारत सरकार ने किसानों और आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने खेती में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक केमिकल पैराक्वाट डाइक्लोराइड  पर पूरी तरह बैन लगाने का फैसला किया है। इसके तहत इस केमिकल के निर्माण, आयात (इम्पोर्ट), बिक्री और वितरण पर रोक लगाई जाएगी। सरकार ने इस फैसले पर लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगने के लिए 30 दिनों का समय भी दिया है। इसके बाद यह केमिकल पूरी तरह प्रतिबंधित हो जाएगा। सरकार का कहना है कि इंसानों की जान की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है।

क्या है पैराक्वाट डाइक्लोराइड का इस्तेमाल?

पैराक्वाट डाइक्लोराइड एक बहुत तेज असर करने वाला खरपतवारनाशक यानी हर्बिसाइड है। किसान इसका इस्तेमाल खेतों में उगी बेकार घास और खरपतवार को खत्म करने के लिए करते थे। जब इसे पौधों पर स्प्रे किया जाता है, तो यह उनकी फोटोसिंथेसिस यानी भोजन बनाने की प्रक्रिया को रोक देता है। इसके बाद पौधे की पत्तियां और कोशिकाएं खराब होने लगती हैं और 24 से 48 घंटे के अंदर खरपतवार पूरी तरह सूखकर खत्म हो जाते हैं। इसी वजह से इसे खेती में काफी असरदार माना जाता था।

इंसानों के लिए कितना खतरनाक?

यह केमिकल जितना तेजी से खरपतवार को खत्म करता है, उतना ही खतरनाक इंसानों और जानवरों के लिए भी माना जाता है। अगर इसकी थोड़ी-सी मात्रा भी शरीर में चली जाए तो यह गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। कई मामलों में इसकी एक छोटी मात्रा भी जानलेवा साबित हो सकती है। इसके संपर्क में आने से फेफड़े, किडनी, लिवर और दिल जैसे जरूरी अंग प्रभावित हो सकते हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि मेडिकल साइंस के पास आज तक इस केमिकल का कोई पक्का इलाज या एंटीडोट मौजूद नहीं है। इसलिए डॉक्टर केवल मरीज की हालत संभालने की कोशिश कर सकते हैं।

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किसानों के लिए कैसे बनता है खतरा?

गांवों में कई किसान खरपतवार हटाने के लिए इस केमिकल का छिड़काव करते समय मास्क, दस्ताने या दूसरे सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करते। ऐसे में यह केमिकल सांस के जरिए या त्वचा के संपर्क से शरीर के अंदर पहुंच सकता है। कई बार किसान अनजाने में इसकी चपेट में आ जाते हैं। यही वजह है कि लंबे समय से वैज्ञानिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। उनका मानना था कि खेती में इसका फायदा कम और इंसानी जान को खतरा ज्यादा है।

शरीर में जाने पर क्या होता है असर?

अगर पैराक्वाट डाइक्लोराइड गलती से शरीर में चला जाए तो सबसे पहले यह मुंह, गले और सांस की नली को नुकसान पहुंचाता है। इसके बाद पेट दर्द, उल्टी, दस्त, सांस लेने में तकलीफ और शरीर के अंदरूनी अंगों पर असर पड़ने लगता है। गंभीर मामलों में फेफड़े, किडनी, लिवर और दिल तेजी से खराब होने लगते हैं। डॉक्टर ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट और सीटी स्कैन जैसी जांच से इसकी पहचान तो कर लेते हैं, लेकिन इसका कोई निश्चित इलाज नहीं होने की वजह से मरीज को बचाना काफी मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि इसे दुनिया के सबसे खतरनाक हर्बिसाइड्स में गिना जाता है।

74 देशों के बाद अब भारत ने भी लगाया बैन

पैराक्वाट डाइक्लोराइड के खतरों को देखते हुए दुनिया के 74 से ज्यादा देश पहले ही इस पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। अब भारत सरकार ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए इस जानलेवा केमिकल पर रोक लगाने का फैसला किया है। सरकार का मानना है कि खेती के लिए सुरक्षित विकल्प मौजूद हैं, इसलिए ऐसे केमिकल का इस्तेमाल जारी रखना सही नहीं है। इस फैसले से किसानों, खेतों में काम करने वाले मजदूरों और आम लोगों की सुरक्षा बेहतर होगी। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ तो 30 दिन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर पूरे देश में पूरी तरह प्रतिबंध लागू हो जाएगा।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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