भोपाल मेट्रो के दूसरे फेज पर विवाद:संत रविदास मंदिर और 40 से ज्यादा घर-दुकानों पर अधिग्रहण का खतरा

भोपाल मेट्रो परियोजना के दूसरे फेज को लेकर जिंसी चौराहा क्षेत्र में नया विवाद खड़ा हो गया है। संत रविदास मंदिर समिति और स्थानीय रहवासियों ने आरोप लगाया है कि मेट्रो लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से नहीं की जा रही। लोगों का कहना है कि मंदिर समेत कई घर और दुकानें अधिग्रहण की जद में आ रही हैं।
संत रविदास मंदिर हटने की आशंका
मंदिर के कोशाध्यक्ष माधव सिंह अहिरवार के मुताबिक मेट्रो परियोजना के तहत संत रविदास मंदिर की करीब ढाई हजार स्क्वायर फीट जमीन अधिग्रहण क्षेत्र में आ रही है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे मंदिर को हटाने की नौबत आ सकती है।
भोपाल मेट्रो के दूसरे फेज का काम शुरू
दरअसल, भोपाल मेट्रो की ऑरेंज लाइन परियोजना के दूसरे फेज पर काम शुरू हो चुका है। यह लाइन सुभाष नगर से करोंद तक प्रस्तावित है। इसी रूट के तहत जिंसी चौराहा और संत रविदास मंदिर क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।
नपाई में गड़बड़ी के आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जमीन की नपाई तय मानकों के अनुसार नहीं की जा रही। रहवासियों के मुताबिक कहीं 6 मीटर, कहीं 9 मीटर और कहीं 15 मीटर तक जमीन की माप की जा रही है, जिससे लोगों में भ्रम और नाराजगी बढ़ रही है।
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प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए बदला रूट
जिंसी चौराहे पर दुकान चलाने वाले जमीरुद्दीन ने आरोप लगाया कि मेट्रो अधिकारियों ने 200 फीट रोड का विकल्प छोड़कर जानबूझकर लाइन को इस इलाके से निकाला है। उनका कहना है कि प्रभावशाली लोगों की दुकानों को बचाने के लिए रूट बदला गया और अब इसका असर आम लोगों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर प्रस्तावित डबल सर्विस लेन यहां से निकली तो 40 से ज्यादा घर और दुकानें प्रभावित होंगी।
बिना सहमति खातों में डाल रहे मुआवजा
धन लक्ष्मी मार्बल के संचालक मनीष साहू ने आरोप लगाया कि बिना पूर्व सूचना उनके खातों में मुआवजे की राशि जमा कर दी गई। उनका कहना है कि अधिकारियों ने यह तक नहीं बताया कि कितनी जमीन अधिग्रहित की जा रही है और मुआवजे की गणना किस आधार पर हुई है।
टैक्स एमपी नगर का, मुआवजा ओल्ड भोपाल के हिसाब से
वर्षा साहू ने आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा घर तोड़ने की चेतावनी दी जा रही है लेकिन सही जानकारी नहीं दी जा रही। उन्होंने कहा कि उनसे टैक्स एमपी नगर क्षेत्र के हिसाब से लिया जाता है जबकि मुआवजा ओल्ड भोपाल के रेट पर तय किया जा रहा है। उनका कहना है कि बिना सहमति खातों में राशि ट्रांसफर कर दी गई जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया है।












