PU Special :भोपाल-इंदौर में 210 किमी और बढ़ेगा मेट्रो नेटवर्क, दूसरे-तीसरे फेज में बनेंगे छह-छह नए रूट

अशोक गौतम, भोपाल। वर्तमान में दोनों शहरों में पहले फेज के तहत करीब 64.48 किलोमीटर मेट्रो कॉरिडोर का काम है, जबकि करीब 24.2 किलोमीटर हिस्से में मेट्रो सेवा उपलब्ध है। भोपाल में फेज-1 के दो कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 30.95 किलोमीटर है, जिसमें करीब 7.2 किलोमीटर हिस्से में यात्री सेवा शुरू हो चुकी है। इंदौर मेट्रो के फेज-1 की येलो लाइन 33.53 किलोमीटर लंबी है और वर्तमान में करीब 17 किलोमीटर के हिस्से पर संचालन बताया गया है। नए रूटों का प्रस्ताव जल्द ही मंत्रि-परिषद के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाएगा और कैबिनेट की स्वीकृति के बाद डीपीआर तैयार की जाएगी। मेट्रो के पटरी और अन्य कार्यों में करीब 300 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर लागत आंकी गई है, जबकि अंडरग्राउंड में यही लागत 800 करोड़ रुपए तक पहुंच जाती है।
भोपाल में बैरागढ़ से मीनाल और एयरपोर्ट से बंजारी तक प्रस्ताव
भोपाल में दूसरे और तीसरे चरण के तहत नए रूट प्रस्तावित किए गए हैं। दूसरे चरण में बैरागढ़ से मीनाल और एयरपोर्ट से बंजारी तक मेट्रो रूट प्रस्तावित है। तीसरे चरण में बैरागढ़ से फंदा, बंजारी चौराहा से इनायपुर, एनएलआईयू से भदभदा और हबीबगंज से मंडीदीप तक के रूट प्रस्तावित किए गए हैं। वर्तमान में भोपाल मेट्रो के फेज-1 में दो कॉरिडोर हैं, जिनकी कुल लंबाई करीब 30.95 किलोमीटर है। इनमें ऑरेंज लाइन और ब्लू लाइन शामिल हैं। दिसंबर 2025 में लगभग 7.2-7.5 किलोमीटर के प्राथमिकता कॉरिडोर पर यात्री सेवा शुरू हुई थी और बाकी हिस्से का निर्माण जारी है।
ये भी पढ़ें: विधायक संजय पाठक की फर्म से 1.5 करोड़ की ठगी करने वाले 4 आरोपी गिरफ्तार, 28 लाख रुपए फ्रीज
इंदौर में भी छह नए रूटों की प्लानिंग
इंदौर में दूसरे चरण में अरविंदों हॉस्पिटल से राजेन्द्र नगर और सिरपुर लेक से पिपलियाना चौराहा तक रूट प्रस्तावित हैं। तीसरे चरण में अरविंदों से इंदौर इंटरनेशनल लॉ कॉलेज, राजेन्द्र नगर से अम्बेडकर नगर, सिरपुर से गोलांदा और पिपलियाना से विचौलियर मदर्ना तक रूट प्रस्तावित किए गए हैं। इंदौर मेट्रो के फेज-1 की येलो लाइन 33.53 किलोमीटर लंबी है। शुरुआती 6.3 किलोमीटर सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मई 2025 से संचालन शुरू हुआ। इसके बाद 2026 में सेवा का विस्तार हुआ और वर्तमान में करीब 17 किलोमीटर के हिस्से पर संचालन बताया गया है। इस हिसाब से दोनों शहरों में फेज-1 के तहत कुल करीब 64.5 किलोमीटर मेट्रो कॉरिडोर का काम है, जबकि करीब 24 किलोमीटर पर मेट्रो सेवा उपलब्ध है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद तैयार होगी डीपीआर
नए चरणों को जमीन पर उतारने से पहले सरकार को इसके लिए आवश्यक वित्तीय प्रबंधन भी करना होगा। नए रूटों का प्रस्ताव जल्द ही मंत्रि-परिषद के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाएगा। कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद प्रस्ताव आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय को भेजा जाएगा। मंत्रालय की मंजूरी के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी और इसके आधार पर मेट्रो विस्तार की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मेट्रो अधिकारियों का मानना है कि दोनों शहरों में नेटवर्क का विस्तार होने के बाद ही मेट्रो सार्वजनिक परिवहन के व्यापक विकल्प के रूप में आम लोगों को अधिक प्रभावी लाभ दे सकेगी। एमडी मप्र मेट्रो ट्रेन कारपोरेशन लिमिटेड एस. कृष्ण चैतन्य ने कहा कि सीएमपी की रिपोर्ट के आधार पर भोपाल और इंदौर में कुछ नए रूटों की प्लानिंग की जा रही है और इन रूटों की योजना बनाकर सरकार के पास भेजी जाएगी।
ये भी पढ़ें: ‘अब लड़कियां बोलेंगी, देश सुनेगा’, ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर राहुल गांधी का बड़ा ऐलान
300 करोड़ प्रति किलोमीटर लागत
मेट्रो के पटरी और अन्य कार्यों में करीब 300 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर लागत आंकी गई है। अंडरग्राउंड में यही लागत 800 करोड़ रुपए तक पहुंच जाती है। अब जो परियोजनाएं बनाई जा रही हैं, उनमें जमीन की सतह पर होंगी। कुछ जगह पर सड़क के ऊपर का प्रस्ताव है, जिसकी लागत करीब 310-315 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर तक आती है। भोपाल मेट्रो की लागत में बदलाव के तहत मूल स्वीकृत लागत 6,941.40 करोड़ रुपए और संशोधित परियोजना लागत 10,033.60 करोड़ रुपए बताई गई है, जबकि लागत में बढ़ोतरी करीब 3,092.20 करोड़ रुपए है। वहीं, भोपाल मेट्रो परियोजना की संशोधित लागत करीब 13,566 करोड़ रुपए और इंदौर मेट्रो परियोजना की संशोधित लागत 12,889.38 करोड़ रुपए बताई गई है।













