PU Special :पढ़ाई और मोबाइल के लिए जेन जी-जेन अल्फा का नींद से समझौता, रात 1-2 बजे तक जागना और सुबह 6-7 बजे उठना बना रूटीन

भोपाल में बच्चों और किशोरों की नींद का पैटर्न तेजी से प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार कई बच्चे रोज 6-7 घंटे ही सो रहे हैं, जबकि उन्हें उम्र के अनुसार 8 से 12 घंटे की नींद जरूरी है। देर रात तक मोबाइल, गेमिंग, पढ़ाई और कोचिंग के कारण नींद की कमी से थकान, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
पढ़ाई और मोबाइल के लिए जेन जी-जेन अल्फा का नींद से समझौता, रात 1-2 बजे तक जागना और सुबह 6-7 बजे उठना बना रूटीन

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। किताब, कोचिंग, होमवर्क और मोबाइल के बीच बच्चों की नींद सबसे पहले कम हो रही है। शहर के अलग-अलग शिशु रोग विशेषज्ञों और मनोचिकित्सकों से मिली जानकारी के अनुसार कई बच्चे रोज सिर्फ 6-7 घंटे की नींद ले रहे हैं, जबकि 6 से 12 साल के बच्चों को 10-12 और 13 से 18 साल के किशोरों को 8-10 घंटे की नींद जरूरी है। देर रात तक पढ़ाई, मोबाइल, गेमिंग और सोशल मीडिया के बाद सुबह जल्दी स्कूल या कोचिंग के लिए उठने से स्लीप साइकिल लगातार बिगड़ रही है।

कम नींद से दिमाग और शरीर दोनों पर असर

जीएमसी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश टिक्कस के मुताबिक बच्चों में पर्याप्त नींद न होने पर दिनभर थकान, सुस्ती, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी दिखाई दे सकती है। नई चीजें सीखने और याद रखने की क्षमता भी प्रभावित होती है। उनकी ओपीडी में अब नींद से जुड़ी शिकायतों वाले रोज एक या दो बच्चे आ रहे हैं, जबकि कोरोना के पहले  ऐसे मामले महीने मे कुछ ही आते थे।

मोबाइल, पढ़ाई और बदलती बॉडी क्लॉक बिगाड़ रही नींद

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश मिश्रा के अनुसार देर रात मोबाइल, गेमिंग, सोशल मीडिया और पढ़ाई बच्चों की नींद का समय लगातार आगे कर रहे हैं। उनकी ओपीडी में अब स्लीप साइकिल बिगड़ने, देर से नींद आने और सुबह उठने में परेशानी की शिकायत मामले बढ़ रहे हैं। स्क्रीन की रोशनी और देर रात का मानसिक उत्तेजना वाला कंटेंट दिमाग को सक्रिय रखता है। परीक्षा और पढ़ाई का तनाव, कोचिंग, होमवर्क, कैफीन और अनियमित खानपान भी स्लीप साइकिल प्रभावित करते हैं।

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नींद बिगड़ी तो व्यवहार और मानसिक स्थिति में भी बदलाव

मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी के मुताबिक स्लीप साइकिल बिगड़ने पर बच्चों में चिड़चिड़ापन, बेचैनी, गुस्सा, ध्यान की कमी और मूड में बदलाव दिखाई दे सकता है। उनकी ओपीडी में अब नींद की कमी के साथ तनाव, एंग्जाइटी, चिड़चिड़ापन और ध्यान की समस्या लेकर रोज एक किशोर आ ही जाता है, जबकि करीब पांच साल पहले ऐसे मामले बहुत कम थे। लगातार नींद की कमी से पढ़ाई में रुचि कम होने, निर्देश समझने में परेशानी और काम पूरा करने में ज्यादा समय लगने जैसी शिकायतें भी सामने आ सकती हैं।

बच्चों की दिनचर्या कैसी हो

1. रात 9-10 बजे: सोने की तैयारी शुरू हो।

अभी गलती: इसी समय मोबाइल, गेमिंग या पढ़ाई में लगे रहने से सोने का समय रात 1-2 बजे तक खिंच रहा है।

2. सुबह 6-7 बजे: रोज तय समय पर उठें।

अभी गलती: नींद पूरी किए बिना स्कूल-कॉचिंग के लिए उठना पड़ रहा है।

3. दोपहर: स्कूल के बाद भोजन और जरूरत के अनुसार आराम।

अभी गलती: समय सीधे कोचिंग, होमवर्क या मोबाइल में चला जाता है।

4. शाम: 45-60 मिनट आउटडोर खेल या शारीरिक गतिविधि।

अभी गलती: खेल का समय स्क्रीन टाइम और कोचिंग में बदल रहा है।

5. रात: सोने से कम से कम एक घंटे पहले स्क्रीन बंद और शांत माहौल।

अभी गलती: बिस्तर पर जाने के बाद भी मोबाइल और सोशल मीडिया चलता रहता है।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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