इंदौर: एक लाख से कम के चेक लेने से नगर निगम का इनकार, 700 चेक बाउंस के बाद फैसले पर उठे सवाल

इंदौर। नगर निगम में सम्पत्तिकर, जल कर और कचरा शुल्क के लिए मिले छोटे मूल्य के चेक लगातार बाउंस होने की समस्या सामने आई थी। बीते वित्त वर्ष में करीब 700 चेक बाउंस हुए, जिनकी कुल राशि लगभग 50 लाख रुपये थी। निगम के मुताबिक, कई मामलों में चेक की राशि से ज्यादा खर्च कानूनी कार्रवाई और वकील फीस में हो रहा था। इसी वजह से एक लाख रुपये से कम राशि के चेक स्वीकार नहीं करने का निर्णय लिया गया। पूर्व पार्षद और कांग्रेसी नेता दीलिप कौशल ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए निगम सभापति को पत्र लिखा। अब सभापति मुन्नालाल यादव ने निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल से इस निर्णय का आधार स्पष्ट करने को कहा है।
चेक बाउंस से बढ़ा निगम का खर्च
नगर निगम स्तर पर लगातार बाउंस हो रहे छोटे मूल्य के चेक के कारण परेशानी बढ़ रही थी। सम्पत्तिकर, जल कर और कचरा शुल्क के लिए मिले चेक बाउंस होने के बाद निगम को उनकी वसूली के लिए नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत कोर्ट में कार्रवाई करनी पड़ती थी। निगम का तर्क था कि कम राशि के चेक के लिए कानूनी प्रक्रिया में होने वाला खर्च कई बार वसूल की जाने वाली रकम से अधिक हो जाता है। ऐसे में निगम के राजस्व विभाग पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा था। इसी समस्या को देखते हुए एक लाख रुपये से कम राशि के चेक स्वीकार नहीं करने का निर्णय लिया गया। निगम का कहना है कि इससे कानूनी कार्रवाई में होने वाले खर्च को रोका जा सकेगा।
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700 चेक बाउंस, करीब 50 लाख की राशि
राजस्व अपर आयुक्त आकाश सिंह के मुताबिक, बीते वित्त वर्ष में करीब 700 चेक बाउंस हुए थे, जिनकी कुल राशि लगभग 50 लाख रुपये थी। इनमें ज्यादातर चेक 25 से 50 हजार रुपये के बीच की राशि के थे। निगम ने जब इन चेक के बाउंस होने के बाद केस दायर करने में होने वाले खर्च का आकलन किया तो स्थिति चिंताजनक सामने आई। कई मामलों में चेक की राशि के मुकाबले वकील फीस और कोर्ट की हर तारीख पर होने वाला खर्च अधिक हो रहा था। आकाश सिंह के अनुसार, पांच हजार रुपये का चेक बाउंस होने पर उसकी वसूली के लिए करीब 25 से 30 हजार रुपये तक खर्च हो रहा था। इसी वजह से एक लाख रुपये से कम राशि वाले चेक नहीं लेने का निर्णय लिया गया।
पूर्व पार्षद ने उठाई आपत्ति, सभापति ने मांगा जवाब
इस व्यवस्था पर पूर्व पार्षद और कांग्रेसी नेता दीलिप कौशल ने आपत्ति जताई। उन्होंने नगर निगम सभापति मुन्नालाल यादव को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। पत्र मिलने के बाद सभापति यादव ने निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल को पत्र लिखा और पूछा कि एक लाख रुपये से कम राशि का चेक अस्वीकार करने जैसा निर्णय किस आधार पर लिया गया है। वहीं, बीते शुक्रवार को नगर निगम के विजय नगर जोन-8 में सहायक राजस्व अधिकारी और एक अभिभाषक के बीच भी इसी मुद्दे को लेकर बहस हो गई। अभिभाषक ने सवाल किया कि ऐसा कौन सा नियम है, जिसमें चेक से भुगतान स्वीकार नहीं करने की बात लिखी है।
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अब नियम और व्यवस्था के बीच फंसा निगम
नागरिकों की ओर से सवाल उठाया गया है कि अगर किसी व्यक्ति पर निगम का वैध बकाया है और वह नियमानुसार चेक के माध्यम से भुगतान करना चाहता है, तो केवल राशि कम होने के आधार पर उसका चेक कैसे अस्वीकार किया जा सकता है। विरोध के बाद निगम के सामने अपनी वसूली व्यवस्था और बैंकिंग नियमों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है। फिलहाल करदाताओं से अपील की गई है कि वे एक लाख रुपये से कम राशि का भुगतान यूपीआई या किसी अन्य पेमेंट मोड से करें। निगम आयुक्त को स्थिति स्पष्ट करने के लिए पत्र लिखा गया है। उनके जवाब के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। अपर आयुक्त आकाश सिंह ने कहा कि चेक बाउंस की वसूली में होने वाला खर्च बचाने के लिए यह निर्णय लिया गया था, लेकिन अभी यह विचाराधीन है।




















