PU Special :पंचायत-निकाय चुनाव के लिए 229 करोड़ की मांग, 1.48 लाख EVM की जरूरत

अशोक गौतम, भोपाल। मध्यप्रदेश में वर्ष 2027 में प्रस्तावित पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। चुनाव के लिए पर्याप्त इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM उपलब्ध कराने की चुनौती आयोग के सामने है। आयोग ने नई EVM की खरीद के लिए राज्य सरकार से करीब 229 करोड़ रुपए की बजट मांग की है। यदि पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव एक साथ कराने का फैसला होता है, तो आयोग को करीब 1.48 लाख EVM की जरूरत पड़ सकती है। दूसरी ओर आयोग के पास मौजूद करीब 55 हजार EVM अपनी निर्धारित 15 साल की उपयोग अवधि पूरी करने की स्थिति में हैं। ऐसे में चुनाव से पहले इन मशीनों को बदलना जरूरी होगा।
55 हजार पुरानी EVM होंगी बाहर
प्रदेश में प्रस्तावित स्थानीय चुनाव के दौरान एक लाख से अधिक मतदान केंद्र बनाए जाने की संभावना है। ऐसे में पर्याप्त संख्या में EVM उपलब्ध कराना आयोग के लिए बड़ी चुनौती है। जो EVM अपनी निर्धारित उपयोग अवधि पूरी कर चुकी हैं, उन्हें चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड यानी ECIL के पास भेजकर नियमानुसार नष्ट कराया जाएगा। इसके बाद उनकी जगह नई मशीनों की खरीद करनी होगी। खास बात यह है कि EVM की निर्धारित लाइफ 15 साल तक होती है। भारत निर्वाचन आयोग भी 15 साल से अधिक पुरानी EVM के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देता।
सरकार के सामने EVM खरीदने के तीन विकल्प
EVM की जरूरत और उपलब्ध बजट को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार के सामने तीन विकल्प रखे हैं।
पहला विकल्प: करीब 1.5 लाख नई EVM एक साल के भीतर खरीदी जाएं, ताकि एक साथ चुनाव होने की स्थिति में पर्याप्त मशीनें उपलब्ध रहें।
दूसरा विकल्प: बजट कम मिलने की स्थिति में करीब 1 लाख नई EVM खरीदने की योजना पर काम किया जाए।
तीसरा विकल्प: यदि नई मशीनों की खरीद के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं होता है, तो दूसरे राज्यों से EVM लेकर जरूरत पूरी की जाए।
इस तरह चुनाव की तारीख नजदीक आने से पहले मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आयोग की प्राथमिकता बन गया है।
EVM के साथ बैलेट यूनिट की भी होगी जरूरत
स्थानीय निकाय चुनाव में केवल EVM की संख्या ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि पर्याप्त संख्या में बैलेट यूनिट उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा। पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव में एक वार्ड या पंच पद के लिए कई उम्मीदवार मैदान में हो सकते हैं। कई बार एक पंचायत में 20 से 25 तक प्रत्याशी भी होते हैं। ऐसे में उम्मीदवारों की संख्या के हिसाब से बैलेट यूनिट की जरूरत बढ़ जाती है। यही वजह है कि आयोग को EVM के साथ पर्याप्त बैलेट यूनिट की व्यवस्था भी करनी होगी।
कई चरण में होगा चुनाव
पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव कितने चरणों में कराए जाएंगे, इसका अंतिम फैसला सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के बीच होने वाली बैठक में होगा। चुनाव से करीब एक महीने पहले पुलिस बल, कर्मचारियों, EVM और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता को लेकर सरकार और आयोग के बीच बैठक होती है। इसी दौरान उपलब्ध संसाधनों के आधार पर चुनाव कार्यक्रम और चरणों की संख्या तय की जाती है। राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव के मुताबिक यदि सरकार पर्याप्त पुलिस बल, कर्मचारी और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध करा देती है और एक चरण में चुनाव कराने का निर्णय लिया जाता है तो आयोग इसके लिए तैयार है।
कम चरणों में चुनाव कराने पर भी चर्चा
स्थानीय चुनावों की प्रक्रिया को कम समय में पूरा करने और आचार संहिता की अवधि घटाने को लेकर भी मंथन शुरू हो गया है। लंबे समय तक आचार संहिता लागू रहने से विकास कार्य प्रभावित होने की बात सामने आती रही है। इसी को देखते हुए कम चरणों में चुनाव कराने और चुनावी प्रक्रिया को कम अवधि में पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी विषय को लेकर मध्यप्रदेश समेत विभिन्न राज्यों के राज्य निर्वाचन आयोगों की रायपुर में होने वाली बैठक में भी चर्चा प्रस्तावित है। बैठक में कम से कम चरणों में चुनाव कराने, आचार संहिता की अवधि घटाने और चुनाव से पहले पर्याप्त EVM उपलब्ध रखने की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
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2027 के चुनाव में बड़ी होगी संसाधनों की चुनौती
वर्ष 2027 के पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव मध्यप्रदेश में प्रशासनिक और चुनावी तैयारियों की बड़ी परीक्षा होंगे। एक साथ चुनाव कराए जाने की स्थिति में करीब 1.48 लाख EVM की जरूरत और करीब 55 हजार पुरानी मशीनों के उपयोग से बाहर होने के कारण नई मशीनों की व्यवस्था करना जरूरी होगा। इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से मांगे गए 229 करोड़ रुपए का प्रस्ताव अब सरकार के स्तर पर महत्वपूर्ण वित्तीय फैसला बन गया है। बजट कितना मिलता है, कितनी नई EVM खरीदी जाती हैं और जरूरत पड़ने पर दूसरे राज्यों से कितनी मशीनें उपलब्ध कराई जाती हैं, इससे चुनाव की तैयारियों की दिशा तय होगी।




















