20 करोड़ की पाइपलाइन के ऊपर फिर धंसी सड़क, बारिश ने खोली निर्माण की पोल; पुरानी जांच भी अटकी

बारिश के बाद शहर में नगर निगम की करीब 20 करोड़ रुपए की वाटर डिजास्टर मैनेजमेंट योजना पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कुलदीप नर्सरी के नाले का पानी फूलबाग चौपाटी की ओर डायवर्ट करने के लिए बिछाई गई पाइपलाइन के ऊपर बुधवार को बसंत विहार गेट के पास सड़क धंस गई। सड़क बैठने से कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। सूचना मिलते ही नगर निगम का अमला मौके पर पहुंचा और मुरम-गिट्टी डालकर धंसे हिस्से को भरते हुए आवागमन बहाल कराया। यह पहली बार नहीं है जब पाइपलाइन वाले मार्ग पर सड़क धंसने की घटना सामने आई है। इससे पहले माधव नगर गेट के सामने भी सड़क बैठ चुकी है। उस मामले में नगर निगम ने जांच कमेटी गठित की थी, लेकिन कई सप्ताह बीतने के बाद भी जांच का कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।

कुलदीप नर्सरी से फूलबाग तक बिछाई गई है पाइपलाइन
कुलदीप नर्सरी के नाले का पानी डायवर्ट करने के लिए करीब 20 करोड़ रुपए की वाटर डिजास्टर मैनेजमेंट योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई जा रही है। यह पाइपलाइन कुलदीप नर्सरी से चेतकपुरी चौराहा, हरिशंकरपुरम, माधव नगर गेट और बसंत विहार गेट होते हुए फूलबाग मैदान के नीचे तक डाली गई है। परियोजना का काम मैसर्स राय एंड जैन द्वारा कराया जा रहा है। पाइपलाइन बिछाने के बाद उसके ऊपर सड़क की बहाली और भराई की गुणवत्ता अब सवालों के घेरे में है क्योंकि इसी मार्ग पर अलग-अलग स्थानों पर सड़क धंसने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

माधव नगर गेट पर सड़क धंसने की जांच अब तक अधूरी
कुछ महीने पहले माधव नगर गेट के सामने पाइपलाइन डालने के बाद सड़क अचानक धंस गई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन निगमायुक्त संघप्रिय ने जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी में अधीक्षण यंत्री सेल बाथम सहित अन्य अधिकारियों को शामिल किया गया था। कमेटी को मौके का निरीक्षण कर सड़क धंसने की वजह और पाइपलाइन के निर्माण कार्य की जांच करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि आदेश के कई सप्ताह बाद भी जांच आगे नहीं बढ़ सकी। इस दौरान कमेटी के एक सदस्य सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। इसके बावजूद सड़क धंसने के कारण, निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदारी को लेकर अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
नई घटना ने पुरानी जांच पर भी उठाए सवाल
बसंत विहार गेट के पास बुधवार को फिर सड़क धंसने की घटना ने पुरानी जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के बाद सड़क के बैठने से यह देखना जरूरी हो गया है कि पाइपलाइन डालने के बाद की गई मिट्टी की भराई और सड़क की मजबूती के लिए तय तकनीकी मानकों का पालन हुआ या नहीं। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि क्या पाइपलाइन वाले पूरे मार्ग के नीचे मिट्टी की स्थिति समान है। यदि अन्य हिस्सों में भी जमीन कमजोर हुई है तो आने वाले दिनों में बारिश के दौरान वहां भी सड़क धंसने का खतरा बना रह सकता है।
ये भी पढ़ें: बुधनी के मिडघाट में तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक को रौंदा, युवक की मौत, दो साथी घायल
मुरम-गिट्टी से भरकर रास्ता बहाल, लेकिन स्थायी समाधान पर सवाल
बसंत विहार गेट पर सड़क धंसने के बाद निगम के कर्मचारियों ने तत्काल मुरम और गिट्टी डालकर रास्ता चालू करा दिया। इससे यातायात तो बहाल हो गया लेकिन स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि बार-बार सड़क बैठने की स्थिति में केवल मुरम-गिट्टी डालना कितना प्रभावी समाधान है। स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क के नीचे की समस्या को दूर किए बिना सिर्फ ऊपरी हिस्से की मरम्मत की जाती रही तो दोबारा सड़क धंस सकती है। इससे वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है।

20 करोड़ की योजना में तकनीकी निगरानी पर सवाल
नगर निगम की करीब 20 करोड़ रुपए की योजना का उद्देश्य नाले के पानी को डायवर्ट कर जलभराव जैसी समस्याओं से राहत देना है। लेकिन परियोजना के मार्ग पर सड़क धंसने की घटनाएं निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं। जरूरत इस बात की है कि निगम केवल प्रभावित स्थानों की मरम्मत तक सीमित न रहे बल्कि पूरे पाइपलाइन कॉरिडोर का तकनीकी निरीक्षण कराए। साथ ही माधव नगर गेट पर पहले हुई सड़क धंसने की घटना की जांच को भी आगे बढ़ाकर वास्तविक कारण और जिम्मेदारी तय की जाए।
ये भी पढ़ें: ग्वालियर: लवजीत सुसाइड मामले में दंपति समेत वकील पर केस दर्ज, 30 लाख रुपए मांगने का आरोप
हाईकोर्ट ने मांगा है सड़कों को लेकर प्लान
नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी के मुताबिक, हाईकोर्ट ने शहर की सड़कों को लेकर निगम से प्लान मांगा है। उन्होंने कहा कि इसे सात दिन में प्रस्तुत किया जाएगा और सड़कों की स्थिति को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा रही है। आयुक्त अभिषेक चौधरी ने कहा हाईकोर्ट ने सड़कों को लेकर हमसे प्लान मांगा है। इसे सात दिन में सबमिट किया जाएगा। सड़कों को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा रही है।




















