फर्जी तकनीकी सहायता केंद्र से अमेरिका-कनाडा के लोगों को ठगा, ईडी का मप्र सहित आठ ठिकानों पर छापा

अमेरिका और कनाडा के लोगों से फर्जी तकनीकी सहायता के नाम पर कथित ठगी करने वाले कॉल सेंटर नेटवर्क के खिलाफ ईडी ने मध्यप्रदेश, पंजाब और चंडीगढ़-मोहाली में आठ ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई में करीब 20 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले, जबकि करीब 50 लाख रुपये की बैंक राशि पर रोक लगाई गई।
फर्जी तकनीकी सहायता केंद्र से अमेरिका-कनाडा के लोगों को ठगा, ईडी का मप्र सहित आठ ठिकानों पर छापा
फाइल फोटो

इंदौर। अमेरिका और कनाडा के लोगों को फर्जी तकनीकी सहायता के नाम पर ठगने वाले कथित कॉल सेंटर नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। 21 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय की टीम ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत चंडीगढ़-मोहाली, पंजाब और मध्यप्रदेश में आठ ठिकानों पर तलाशी ली।

ये ठिकाने विजय राज कपूरिया, वरिंदर राज, मेसर्स इन्फिमम एंटरप्राइजेज एलएलपी और उनसे जुड़े अन्य लोगों व संस्थाओं से संबंधित बताए गए हैं। तलाशी के दौरान करीब 20 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी, आपत्तिजनक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। इसके अलावा करीब 50 लाख रुपये की बैंक राशि पर रोक लगाई गई है। प्रवर्तन निदेशालय ने पंजाब के एसएएस नगर स्थित सोहाना थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की थी। यह मामला मोहाली के कथित फर्जी कॉल सेंटर संचालित किए जाने से जुड़ा है। जांच एजेंसी के अनुसार आरोपित विदेशों में मौजूद सहयोगियों के साथ मिलकर मुख्य रूप से अमेरिका और कनाडा के लोगों को निशाना बनाते थे। कंप्यूटर, प्रिंटर, आईपैड और एप्पल या माइक्रोसॉफ्ट की तकनीकी सहायता से जुड़े फर्जी संदेश और फोन के जरिए लोगों को बताया जाता था कि उनके उपकरण में गंभीर तकनीकी खराबी है। फर्जी संदेश या इंटरनेट संपर्क के माध्यम से ग्राहकों को एक टोल-फ्री नंबर दिया जाता था।

ऐसे करते थे फर्जीवाड़ा

जांच के अनुसार कॉल सेंटर में काम करने वाले लोग पहले से तैयार बातचीत के आधार पर ग्राहकों से संपर्क करते थे। उन्हें तकनीकी समस्या का हवाला देकर सहायता लेने के लिए तैयार किया जाता था। इसके बाद कथित तौर पर ग्राहकों के कंप्यूटर का दूरस्थ नियंत्रण लिया जाता था। फिर अनावश्यक या काल्पनिक तकनीकी सेवाओं के नाम पर उनसे पैसे लिए जाते थे। इस तरह प्राप्त रकम को अलग-अलग माध्यमों से आगे भेजा जाता था।

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पेपल, स्ट्राइप, बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी से रकम भेजी

प्रवर्तन निदेशालय की जांच में सामने आया कि कथित ठगी से प्राप्त रकम का लेनदेन पेपल, स्ट्राइप, बैंकिंग माध्यम, बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टो करेंसी तथा हवाला के जरिए किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार रकम को विदेशों में मौजूद विभिन्न संस्थाओं के खातों में भी भेजा गया। इनमें अमेरिका स्थित आरएचएल ऑपरेटिंग सॉल्यूशंस और आरजी सिक्योरिटी सॉल्यूशंस एलएलसी के नाम सामने आए हैं। मेसर्स इन्फिमम एंटरप्राइजेज एलएलपी के बैंक खाते में कई विदेशी संस्थाओं से राशि आई थी।

20 लाख रुपये नकद मिले

तलाशी के दौरान करीब 20 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी बरामद की गई। जांच एजेंसी ने करीब 50 लाख रुपये की बैंक राशि पर रोक लगाई है। अब जब्त दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के साथ कथित ठगी से प्राप्त रकम के पूरे लेनदेन और उसके विदेश तक पहुंचने की कड़ियों को खंगाला जा रहा है। 

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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