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भोपाल के तीन बड़े ऑक्सीजन जोन खत्म:15 साल में तीन लाख पेड़ कटे, अब 13 हजार और पेड़ों पर संकट

यह वही भोपाल है, जिसकी पहचान कभी झीलों के साथ-साथ दूर तक फैली हरियाली और पेड़ों की घनी छांव से होती थी। लेकिन आज विकास के नाम पर हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं। हाल ही में अयोध्या बायपास को 10 लेन बनाने के लिए 7800 पेड़ों की बलि दी गई और अब भदभदा क्षेत्र में मेट्रो परियोजना के लिए लगभग 1 हजार पेड़ों पर संकट मंडरा रहा है।
15 साल में तीन लाख पेड़ कटे, अब 13 हजार और पेड़ों पर संकट

प्रवीण श्रीवास्तव, शाहिद खान भोपाल। इससे पहले मेट्रो के लिए सुभाष नगर, एमपी नगर, बोर्ड ऑफिस, करोंद और डीआईजी बंगला कॉरिडोर में 3 हजार से ज्यादा पेड़ हटाए जा चुके हैं। गुरुवार से ब्लू लाइन के लिए जवाहर चौक से इन पेड़ों की कटाई भी शुरू हो गई है। यानी 13 हजार से अधिक पेड़ ऐसे हैं जो विकास की कीमत चुका चुके हैं या चुकाने वाले हैं।

अयोध्या बायपास पर 7871 पेड़ों की बलि

अयोध्या बायपास पर 16 किलोमीटर हिस्से में हजारों पेड़ों की कटाई के बाद गर्मियों में तापमान और धूल दोनों बढ़ी हैं। स्थानीय रहवासी साकेत ठाकुर के अनुसार पहले यहां सड़क किनारे लगातार छांव रहती थी, लेकिन अब दोपहर में सड़क 'हीट कॉरिडोर' जैसी महसूस होती है। विकास परियोजना के बाद इलाके के पर्यावरणीय संतुलन पर असर साफ दिखाई देने लगा है। स्थानीय लोग भी बढ़ती गर्मी और बदलते माहौल को महसूस कर रहे हैं।

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एमपी नगर और बोर्ड ऑफिस क्षेत्र में घटती हरियाली

एमपी नगर, बोर्ड ऑफिस और ज्योति टॉकीज क्षेत्र में पिछले 10 वर्षों में व्यावसायिक निर्माण तेजी से बढ़ा है। यहां सड़क किनारे पुराने पेड़ों की संख्या लगातार कम हुई। यहां व्यवसाय करने वाले अंजुम महेश्वरी ने बताया कि दिन के समय यहां तापमान पुराने आवासीय इलाकों की तुलना में ज्यादा महसूस होता है। कंक्रीट के बढ़ते विस्तार ने इस क्षेत्र की प्राकृतिक ठंडक को प्रभावित किया है।

मेट्रो परियोजना में हजारों पेड़ हटाए गए

भोपाल मेट्रो के निर्माण के दौरान करोंद, सुभाष नगर और रेलवे स्टेशन क्षेत्र में करीब 1500 पेड़ हटाए गए। निर्माण एजेंसियों के अनुसार कई पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया गया, लेकिन पर्यावरण समूहों का कहना है कि ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ों का सर्वाइवल रेट बहुत कम रहा। अब मेट्रो ब्लू लाइन के लिए रत्नागिरी से भदभदा तक लगभग 1 हजार और पेड़ काटे जाने हैं। गुरुवार को जवाहर चौक के आसपास पेड़ों की कटाई भी शुरू हो गई।

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स्मार्ट सिटी और सड़क परियोजनाओं का असर

न्यू मार्केट, रोशनपुरा और टीटी नगर जैसे पुराने इलाकों में निर्माण के नाम पर करीब 6 हजार पेड़ काट दिए गए। यहां से 1500 पेड़ शिफ्ट किए गए। स्थानीय दुकानदार राजेश गुप्ता बताते हैं कि पहले बाजार क्षेत्र में दिनभर ठंडक रहती थी, लेकिन अब दोपहर में गर्मी और हीट रिफ्लेक्शन ज्यादा महसूस होता है। वहीं कोलार सिक्स लेन रोड प्रोजेक्ट में लगभग 4105 पेड़ काटे गए हैं और 11 माइल से बांगरसिया रोड चौड़ीकरण के लिए 1377 पेड़ काटने का प्रस्ताव है।

विशेषज्ञों ने जताई भविष्य को लेकर चिंता

पर्यावरणविद् सुभाष पांडे का कहना है कि शहर में बीते 10 वर्षों में 26 प्रतिशत हरियाली कम हो चुकी है। उनके अनुसार 50 से 100 साल पुराने पेड़ों के बदले नए पौधे लगाकर पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती। पूर्व वन अधिकारी केसी मल्ल का कहना है कि 60 सेंटीमीटर के एक परिपक्व पेड़ की बराबरी पांच हजार पौधे भी तुरंत नहीं कर सकते। वहीं एनवायरमेंट एक्टिविस्ट राशिदनूर खान के अनुसार यदि विकास परियोजनाओं में पेड़ों को बचाने की अनिवार्य योजना नहीं बनाई गई तो आने वाले वर्षों में भोपाल का तापमान और तेजी से बढ़ सकता है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

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