Hemant Nagle
3 Feb 2026
Naresh Bhagoria
3 Feb 2026
Naresh Bhagoria
3 Feb 2026
भोपाल। एम्स की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा का मामला अब केवल एक व्यक्तिगत मेडिकल इमरजेंसी नहीं रह गया है। इस घटना ने देश के बड़े सरकारी मेडिकल संस्थानों में डॉक्टरों पर बढ़ते प्रशासनिक दबाव, मानसिक स्वास्थ्य और कार्यस्थल के माहौल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रॉमा एंड इमरजेंसी विभाग के HOD डॉ. मोहम्मद यूनुस को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा दिया गया है। मामला इतना संवेदनशील हो चुका है कि स्वास्थ्य मंत्रालय तक हलचल मच गई है।

गुरुवार रात डॉ. रश्मि वर्मा की घर पर अचानक तबीयत बिगड़ गई। उनके पति, ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. मनमोहन शाक्य, उन्हें तुरंत एम्स भोपाल लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचते ही इमरजेंसी टीम ने उपचार शुरू किया और CPR देकर उन्हें रिवाइव किया गया। फिलहाल वे मेन आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं और उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
जानकारी के मुताबिक, एनेस्थीसिया की हाई डोज दवा लेने के बाद डॉ. रश्मि का दिल करीब सात मिनट तक धड़कना बंद रहा। इस दौरान दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाई, जिससे उन्हें ग्लोबल हाइपोक्सिया ब्रेन इंजरी हो गई। 72 घंटे बाद की गई MRI जांच में ब्रेन डैमेज की पुष्टि हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की चोट में रिकवरी को लेकर कुछ भी निश्चित नहीं कहा जा सकता।
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि डॉ. रश्मि अस्पताल से केनुला यानी आईवी लाइन लगवाकर घर गई थीं। वहीं उन्होंने खुद को एनेस्थीसिया की हाई डोज दवा इंजेक्ट की। दवा सीधे नस में जाने के कारण कुछ ही मिनटों में शरीर ने गंभीर प्रतिक्रिया दी। जब तक उन्हें दोबारा एम्स लाया गया, तब तक कार्डियक अरेस्ट हो चुका था। इमरजेंसी में तीन बार CPR देने के बाद हार्टबीट तो लौट आई, लेकिन तब तक ब्रेन को गंभीर नुकसान हो चुका था।
इस घटना ने एम्स प्रशासन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को झकझोर कर रख दिया। हालात की गंभीरता को देखते हुए रविवार को छुट्टी के दिन भी हाई लेवल मीटिंग बुलाई गई। बैठक में संकेत मिले कि मामला केवल व्यक्तिगत तनाव का नहीं हो सकता, बल्कि यह टॉक्सिक वर्क कल्चर और प्रशासनिक दबाव से भी जुड़ा हो सकता है।
बैठक के बाद ट्रॉमा एंड इमरजेंसी विभाग के HOD डॉ. मोहम्मद यूनुस को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया। उन्हें एनेस्थीसिया विभाग से अटैच किया गया है। इसके साथ ही एम्स ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए ट्रॉमा और इमरजेंसी मेडिसिन विभाग को अलग कर दिया। अब ट्रॉमा विभाग न्यूरोसर्जरी के अंतर्गत और इमरजेंसी मेडिसिन मेडिसिन विभाग के अधीन काम करेगा।
इस पूरे मामले की जांच के लिए अब एक हाई लेवल कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी गोपनीय जांच कर अपनी रिपोर्ट सीधे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपेगी। सूत्रों के अनुसार, ट्रॉमा एंड इमरजेंसी विभाग में पहले भी एक महिला डॉक्टर ने HOD के खिलाफ शिकायत की थी, जिसकी जांच रिपोर्ट अब तक लंबित है।
एम्स प्रबंधन का कहना है कि फिलहाल घटना के पीछे के कारण स्पष्ट नहीं हैं। घर से कोई सुसाइड नोट या संदेश नहीं मिला है। डॉ. रश्मि के पति के अनुसार, घटना के समय घर का माहौल सामान्य था और सभी अपने काम में व्यस्त थे।
डॉ. रश्मि वर्मा का शैक्षणिक और पेशेवर करियर बेहद उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने प्रयागराज के एमएलएन मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर से जनरल मेडिसिन में एमडी की डिग्री हासिल की। वे डायबिटीज में सर्टिफिकेट कोर्स कर चुकी हैं और एम्स भोपाल सहित कई मेडिकल संस्थानों में पढ़ा चुकी हैं।