CG NEWS: रिश्वत नहीं दी तो उपजाऊ जमीन को बना दिया बंजर! भारतमाला परियोजना में करोड़ों के मुआवजा फर्जीवाड़े का आरोप

राजनांदगांव के किसानों का बड़ा खुलासा, पटवारी-राजस्व अफसर और बिल्डर लॉबी पर मिलीभगत के आरोप, ACB से न्यायिक जांच की मांग भारतमाला परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे को लेकर ग्राम देवादा के किसानों ने एसीबी रायपुर का दरवाजा खटखटाया है। किसानों ने लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों, पटवारियों और बिल्डर लॉबी की मिलीभगत से मुआवजा वितरण में भारी अनियमितताएं की गई है
रिश्वत नहीं दी तो उपजाऊ जमीन को बना दिया बंजर! भारतमाला परियोजना में करोड़ों के मुआवजा फर्जीवाड़े का आरोप

RAIPUR RAJNADGAOWN NEWS। राजनांदगांव जिले के ग्राम देवादा में भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। किसानों ने पटवारी, राजस्व अधिकारियों और बिल्डर लॉबी पर गंभीर आरोप लगाते हुए एसीबी रायपुर में शिकायत दर्ज कराई है। किसानों का दावा है कि मुआवजा बढ़ाने के नाम पर लाखों रुपये की रिश्वत मांगी गई और रकम नहीं देने वालों की उपजाऊ सिंचित जमीन को रिकॉर्ड में बंजर और असिंचित बताकर मुआवजा कम कर दिया गया।

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ACB पहुंचा भारतमाला मुआवजा विवाद

भारतमाला परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे को लेकर ग्राम देवादा के किसानों ने एसीबी रायपुर का दरवाजा खटखटाया है। किसानों ने लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों, पटवारियों और बिल्डर लॉबी की मिलीभगत से मुआवजा वितरण में भारी अनियमितताएं की गई हैं।

'रिश्वत दो, मुआवजा बढ़ाओ' का खेल?

किसानों का आरोप है कि भूमि का अधिक मूल्यांकन करवाने के लिए दो से तीन लाख रुपये तक की मांग की गई। जिन किसानों ने पैसे देने से इनकार किया, उनकी जमीन को कम उपजाऊ और असिंचित बताकर मुआवजा राशि घटा दी गई। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कई लोगों ने कथित रूप से पैसे देकर अधिक मुआवजा हासिल किया।

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सिंचित खेतों को रिकॉर्ड में बना दिया बंजर

ग्रामीणों के अनुसार जिन खेतों में नहर और नालियों के जरिए नियमित सिंचाई होती है, उन्हें सरकारी दस्तावेजों में एक फसली या बंजर भूमि दर्शाया गया। किसानों का कहना है कि इससे भूमि का बाजार मूल्य कम आंका गया और उन्हें करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

खसरा रिकॉर्ड में हेरफेर का आरोप

किसानों ने आरोप लगाया है कि कुछ खसरा नंबर अवॉर्ड सूची में शामिल नहीं थे, लेकिन उनके नाम पर मुआवजा भुगतान दिखाया गया। वहीं कुछ ऐसी जमीनों को भी प्रभावित बताया गया जो सड़क परियोजना की सीमा में आती ही नहीं थीं। ग्रामीणों ने इसे रिकॉर्ड में हेरफेर और फर्जी भुगतान का मामला बताया है।

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बिल्डर लॉबी पर दबाव बनाने के आरोप

शिकायत में यह भी कहा गया है कि अधिग्रहण के बाद बची जमीन को सस्ते दामों पर खरीदने के लिए किसानों पर दबाव बनाया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि सीमांकन और नक्शों में बदलाव कर कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।

कागजों में कालोनी और सैकड़ों पेड़ उगा दिए!

ग्रामीणों का दावा है कि गांव में जहां कोई विकसित कालोनी मौजूद नहीं है, वहां दस्तावेजों में कालोनी दर्शाकर मुआवजा तैयार किया गया। इसी तरह कई स्थानों पर वास्तविकता से अधिक पेड़ और फसलें दिखाकर सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका पैदा हुई है।

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किसानों की मांग: न्यायिक जांच और दोषियों पर कार्रवाई

ग्रामीणों ने पूरे मामले की एसीबी और न्यायिक जांच कराने, भूमि मूल्यांकन की दोबारा समीक्षा करने तथा दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। किसानों का कहना है कि जांच होने पर भारतमाला परियोजना के मुआवजा वितरण में बड़े घोटाले का खुलासा हो सकता है।

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...Read More

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