मानसून में गुलजार हुआ मृगन्नाथ झरना, पहाड़ों के बीच झरते पानी और हरियाली ने बढ़ाई खूबसूरती

मोनू शर्मा, ग्यारसपुर। बरसात की पहली बूंदों के साथ ही विदिशा से करीब 50 किलोमीटर दूर हैदरगढ़ क्षेत्र का मृगन्नाथ झरना एक बार फिर अपने पूरे प्राकृतिक सौंदर्य के साथ गुलजार हो गया है। पहाड़ों की ऊंचाई से तेज धार के साथ गिरता पानी और चारों ओर फैली हरी-भरी वादियां यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। बारिश के बाद पहाड़ियों पर उगी हरियाली, चट्टानों से फिसलता पानी और झरने की कल-कल करती धारा मिलकर ऐसा नजारा पेश कर रही है, मानो प्रकृति ने खुद इस स्थान को सजाया हो। मानसून के मौसम में यहां की खूबसूरती देखते ही बनती है और आसपास का वातावरण सुकून के साथ रोमांच का भी एहसास कराता है।
धारा के बीच प्राचीन हनुमान मंदिर बना आस्था का केंद्र
मृगन्नाथ झरने की सबसे खास विशेषताओं में से एक यहां बीच धारा में स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर है। झरने की तेज बहती जलधारा और चट्टानों के बीच स्थित यह मंदिर श्रद्धा के साथ-साथ पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां पहुंचने वाले लोग पहले मंदिर में माथा टेकते हैं और इसके बाद झरने के ठंडे पानी में नहाकर मानसून की फुहारों का आनंद लेते हैं। पानी के गिरने की आवाज, पहाड़ियों से टकराकर लौटती गूंज और चारों ओर फैली हरियाली इस पूरे क्षेत्र को बेहद मनमोहक बना देती है।
वीकेंड पर उमड़ रही पर्यटकों की भीड़
शनिवार और रविवार को मृगन्नाथ झरने पर परिवारों और युवाओं की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिल रही है। कोई परिवार के साथ पिकनिक का आनंद लेने पहुंच रहा है तो कोई झरने और प्राकृतिक नजारों को कैमरे में कैद कर रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मानसून में मृगन्नाथ झरना विदिशा और आसपास के क्षेत्रों के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो जाता है। बारिश के मौसम में यहां बहते झरने, घने पेड़, चट्टानी पहाड़ियां और ठंडी हवाएं प्रकृति प्रेमियों को खास तौर पर आकर्षित करती हैं। हालांकि, तेज बहाव के दौरान पर्यटकों को सावधानी बरतना भी जरूरी है।
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