बंगाल चुनाव के बीच मोदी सरकार का बड़ा दांव :अशोक लाहिड़ी को NITI आयोग का उपाध्यक्ष बनाया, जानें किसकी जगह लेंगे?

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए वरिष्ठ अर्थशास्त्री और बीजेपी विधायक अशोक कुमार लाहिड़ी को नीति आयोग का अगला वाइस-चेयरमैन बनाने का निर्णय लिया है। वे मौजूदा उपाध्यक्ष सुमन बेरी की जगह लेंगे, जो मई 2022 से इस पद पर कार्यरत हैं। यह पद कैबिनेट मंत्री के बराबर माना जाता है, इसलिए इसकी अहमियत काफी ज्यादा होती है।
बंगाल चुनाव के बीच बड़ा फैसला
लाहिड़ी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल गर्म है। राज्य में पहले चरण की वोटिंग हो गई है। बीजेपी और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर चल रही है। लाहिड़ी फिलहाल बालुरघाट से विधायक हैं, हालांकि इस बार वे चुनावी मैदान में नहीं हैं। ऐसे में इस नियुक्ति को राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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देश के अनुभवी अर्थशास्त्रियों में शामिल हैं लाहिड़ी
अशोक लाहिड़ी का आर्थिक मामलों में लंबा अनुभव रहा है। वे भारत सरकार के 12वें मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं। उन्हें यह जिम्मेदारी 2002 में दी गई थी और उन्होंने 2007 तक इस पद पर काम किया। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग सरकारों के साथ काम करते हुए अपनी विशेषज्ञता का प्रदर्शन किया।
देश-विदेश के बड़े संस्थानों से रहा जुड़ाव
लाहिड़ी ने कोलकाता की प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की है। इसके अलावा वे एशियन डेवलपमेंट बैंक, बंधन बैंक और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी जैसे संस्थानों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने वर्ल्ड बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भी काम किया है, जिससे उनकी वैश्विक समझ मजबूत हुई है।
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गोबरधन दास भी बन सकते हैं नीति आयोग के सदस्य
इसी के साथ यह भी खबर है कि वैज्ञानिक गोबरधन दास को नीति आयोग का सदस्य बनाया जा सकता है। वे इम्यूनोलॉजी के क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं और IISER भोपाल के निदेशक रह चुके हैं। उनका राजनीतिक जुड़ाव भी रहा है और वे पश्चिम बंगाल चुनाव में उम्मीदवार रह चुके हैं।
नीति आयोग की दिशा पर पड़ेगा असर
MLA अशोक लाहिड़ी की नियुक्ति को सरकार की आर्थिक नीतियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। उनके अनुभव और विशेषज्ञता के आधार पर उम्मीद की जा रही है कि नीति आयोग आने वाले समय में नई दिशा और रणनीति के साथ आगे बढ़ेगा। जिससे केंद्र के कई आगामी फैसलों पर असर पड़ेगा। साथ ही यह आयोग प्लानिंग करने के लिए भी जिम्मेदारी रहता है।











