लेबनान। बीते 24 घंटों में लेबनान की राजधानी बेरूत में इजरायली हमलों में 254 लोगों की मौत हो गई। यह जानकारी लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी। यह संख्या एक ही दिन में हुई मौतों के मामले में अब तक की सबसे बड़ी है। हमलों में नागरिकों के साथ-साथ कई पत्रकार भी शिकार बने हैं।


इजरायल के हमलों के बाद लेबनान की शिया समूह हिजबुल्लाह ने तुरंत जवाबी रॉकेट हमला शुरू कर दिया। गुरुवार को हिजबुल्लाह ने इजरायल के कई इलाकों में रॉकेट दागे। इससे दोनों तरफ तनाव और बढ़ गया है और क्षेत्र में सुरक्षा हालात बेहद नाजुक हो गए हैं।
ईरान ने भी हमलों पर गुस्सा जताया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो दुनिया के महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्गों में से एक है, को दोबारा बंद कर दिया गया। ईरान का कहना है कि लेबनान पर इजरायली हमले सीजफायर उल्लंघन हैं और उनके शर्तों को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस कदम ने वैश्विक तेल और शिपिंग मार्केट में हलचल मचा दी है।
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बुधवार को अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच हुई सीजफायर समझौता फिलहाल पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। कई इलाकों से सीजफायर उल्लंघन की खबरें आ रही हैं। खासकर इजरायल और अमेरिका ने यह स्पष्ट किया कि लेबनान को इस समझौते में शामिल नहीं किया गया है। इससे ईरान और हिजबुल्लाह की नाराजगी बढ़ गई है।
इजरायली हमलों में पत्रकार भी शिकार बने। गाजा में अल-जजीरा के संवाददाता मोहम्मद विशाह को ड्रोन हमले में मारा गया। लेबनान में दो पत्रकार, घदा दयेख और सुजान खलील भी हमलों में जान गंवा बैठीं। इजरायली सेना का कहना है कि मोहम्मद विशाह हमास का सदस्य था और उसने 2024 में हमास की सैन्य शाखा में प्रमुख पद संभाले थे।
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ईरान में बीते दिन पूर्व सुप्रीम लीडर खामेनेई की शहादत के 40 दिन पूरे होने पर बुशहर परमाणु केंद्र पर भारी भीड़ जमा हुई। लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और खामेनेई को याद किया। यह घटना इजरायल और अमेरिका के हमलों के बीच ईरानी भावनाओं को और भड़का रही है।
लेबनान में इजरायली हमले और हिजबुल्लाह के जवाबी हमले के बीच क्षेत्रीय तनाव चरम पर है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो सीजफायर पूरी तरह टूट सकता है। इससे मध्य पूर्व में नई जंग का खतरा मंडराने लगा है।