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बांधवगढ़ में लोकप्रिय बाघिन डॉटी की मौत, जंगल में अकेले रह गए 15-16 महीने के दो शावक

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की 15 वर्षीय लोकप्रिय बाघिन डॉटी का शव मानपुर बफर के हरदिया इलाके में मिला। पोस्टमार्टम के बाद मौत की जांच जारी है। डॉटी के 15-16 महीने के दो शावकों की वन विभाग विशेष निगरानी कर रहा है।
बांधवगढ़ में लोकप्रिय बाघिन डॉटी की मौत, जंगल में अकेले रह गए 15-16 महीने के दो शावक

उमरिया। मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए दुखद खबर सामने आई है। रिजर्व की चर्चित बाघिन डॉटी का शव मानपुर बफर परिक्षेत्र के हरदिया इलाके में मिला है। 15 वर्षीय डॉटी की मौत 9 अक्टूबर को हुई। शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। वन विभाग की टीम डॉग स्क्वाड और वन्यजीव चिकित्सकों की मदद से मौत के कारणों की जांच कर रही है। फिलहाल बाघिन की मौत की असल वजह स्पष्ट नहीं हुई है। वन विभाग के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जरूरी परीक्षणों के बाद ही इस बारे में जानकारी सामने आ सकेगी।

माथे पर अंग्रेजी के 'D' जैसा निशान

डॉटी का जन्म वर्ष 2011-12 में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मगधी जोन में हुआ था। उसके माथे पर अंग्रेजी के अक्षर 'D' जैसा निशान था, इसी खास पहचान के कारण उसका नाम डॉटी रखा गया। वह पटिहा नाम की मादा बाघिन और ब्लू आई नाम के नर बाघ की संतान थी। अपने आकर्षक रूप और लंबे समय तक पार्क में मौजूदगी के कारण डॉटी पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय रही। उसने अपने जीवनकाल में तीन से चार बार शावकों को जन्म दिया और बांधवगढ़ में बाघों की आबादी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

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ताला जोन से मानपुर बफर तक बनाया नया ठिकाना

डॉटी ने अपने जीवन के दौरान जंगल में बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपना क्षेत्र भी बदला। जानकारी के मुताबिक, अपनी ही संतानों द्वारा क्षेत्र से बेदखल किए जाने के बाद उसने पहले ताला जोन में ठिकाना बनाया और बाद में मानपुर बफर परिक्षेत्र में रहने लगी। बांधवगढ़ जैसे बाघों के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र में डॉटी की मौजूदगी उसकी अलग पहचान बन चुकी थी। उसकी मौत से पार्क के वन्यजीव प्रेमियों और उसे देखने आने वाले पर्यटकों में मायूसी है।

मां की मौत के बाद दो शावकों की सुरक्षा चुनौती

डॉटी अपने पीछे करीब 15 से 16 महीने के दो शावक छोड़ गई है। दोनों फिलहाल जंगल में विचरण कर रहे हैं। मां की मौत के बाद उनकी सुरक्षा वन विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गई है। वन अमले को दोनों शावकों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। उनकी गतिविधियों, सुरक्षा और जंगल में रहने की स्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है, ताकि उन्हें किसी तरह का खतरा न हो।

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी मौत की वजह

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय के अनुसार, बाघिन डॉटी का शव मानपुर बफर परिक्षेत्र में मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आवश्यक जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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