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PU Special :बांधवगढ़ में आज सजेगा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेला, प्रवेश के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 4 सितंबर को होने वाले पारंपरिक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेले के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। इस बार केवल 8 हजार श्रद्धालुओं को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए प्रवेश मिलेगा। 345 अधिकारी-कर्मचारी और 4 हाथी तैनात रहेंगे।
बांधवगढ़ में आज सजेगा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेला, प्रवेश के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी
उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व स्थित बांधवाधीश मंदिर।

संजय दुबे, उमरिया। विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 4 सितंबर को आयोजित होने वाले पारंपरिक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेले को लेकर प्रशासन और वन विभाग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। बुधवार को इको सेंटर ताला में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने व्यवस्थाओं की रूपरेखा तय की। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष केवल 8 हजार श्रद्धालुओं को ही ताला मेनगेट से प्रवेश दिया जाएगा। प्रवेश के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है।

12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, 65 साल के बुजुर्गों को प्रवेश नहीं 

सुरक्षा मापदंडों के तहत 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और 65 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों के मंदिर क्षेत्र में प्रवेश पर रोक रहेगी। ऐसे श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ताला गेट के बाहर बड़ी स्क्रीन लगाई जा रही है, जिससे वे मंदिर के सीधे दर्शन कर सकें। पूरे मेला क्षेत्र में पॉलीथीन, गुटखा, अगरबत्ती, जिलेटिन और अन्य ज्वलनशील सामग्रियों को ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

345 अधिकारी-कर्मचारी और 4 हाथी रहेंगे तैनात

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि, मेला मार्ग और संवेदनशील इलाकों की निगरानी के लिए 29 ड्यूटी पॉइंट बनाए गए हैं, जहां 110 वनकर्मी तैनात रहेंगे। पार्क प्रबंधन के करीब 135 और अन्य विभागों के 100 से अधिक कर्मचारी व्यवस्था संभालेंगे। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 6 जिप्सियां मुस्तैद रहेंगी, जबकि लक्ष्मण, श्याम, रामा और सूर्या नामक हाथी गश्त करेंगे। ताला मेनगेट पर मेडिकल टीम, दवाएं और स्ट्रेचर की व्यवस्था की गई है। वन्यजीवों की निगरानी के लिए पशु चिकित्सक डॉ. राजेश तोमर रेस्क्यू दल के साथ मौजूद रहेंगे।

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भगवान राम को कान्हा और माता सीता को राधा रानी के रूप में पूजते हैं

गौरतलब हो कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जन्माष्टमी की परंपरा कुछ अलग है। ताला गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर घने जंगल और ऊंचे पहाड़ पर स्थित ऐतिहासिक प्राचीन किला (बांधवाधीश मंदिर) मौजूद है। यहां पहाड़ की चोटी पर स्थित सैकड़ों वर्ष पुराने श्री राम जानकी मंदिर में भगवान श्री राम को कान्हा और माता सीता को राधा रानी के रूप में पूजने की परंपरा है। मंदिर के पट आम दिनों में श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं और वर्ष में केवल एक दिन कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर खोले जाते हैं। इस दिन यहां विशेष पूजा अर्चना के साथ मेले का भी आयोजन होता है।

महाराजा मार्तंड सिंह ने रखी थी शर्त

स्थानीय निवासी बहादुर सिंह बघेल ने बताया कि बांधवगढ़ में कभी बघेल राजाओं का शासन था। यहां से अपने राज्य का विस्तार किए और बाद में तत्कालीन महाराजा मार्तंड सिंह ने मध्य प्रदेश शासन को टाइगर रिजर्व के लिए बांधवगढ़ का क्षेत्र दान किया। महाराजा मार्तंड सिंह ने सरकार के सामने महत्वपूर्ण शर्त रखी कि बांधवगढ़ किले में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर लगने वाले पारंपरिक मेले और धार्मिक आयोजन को बंद नहीं किया जाएगा। इसी परंपरा के कारण वर्ष में एक दिन जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालुओं को किले के भीतर स्थित मंदिर तक पहुंचाने की अनुमति मिलती है।

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इसलिए नाम पड़ा 'बांधवगढ़'

बताया जाता है कि, 70 के दशक में बांधवगढ़ क्षेत्र को टाइगर रिजर्व का स्वरूप मिलने के बाद जंगल में लोगों के स्वतंत्र आगमन पर रोक लगी, लेकिन कृष्ण जन्माष्टमी के दिन सदियों पुराने आस्था से जुड़ी यह परंपरा आज भी जारी है। बांधवगढ़ किले को लेकर धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं भी रोचक हैं। माना जाता है कि भगवान श्री राम ने वनवास से लौटने के बाद अपने भाई लक्ष्मण को यह किला उपहार में दिया था। इसी कारण इसका नाम बांधवगढ़ पड़ा, जिसका अर्थ भाई का किला।

ताला गेट से किसी को नहीं मिलेगा प्रवेश

मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और पार्क के नियमों का पालन सर्वोपरि है। इस बार बिना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के किसी भी व्यक्ति को ताला गेट से प्रवेश नहीं दिया जाएगा। मेले की सभी आवश्यक तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं।

राहुल किरार, परिक्षेत्र अधिकारी, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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