
नागपुर में हुए एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान मशहूर कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिन्हें बागेश्वर धाम सरकार के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने ऐसा बयान दिया जिसने राजनीति और समाज दोनों में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि हर परिवार को चार बच्चे पैदा करने चाहिए और उनमें से एक बच्चे को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को समर्पित करना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया है जब मंच पर कई बड़े नेता और संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे। इस वजह से उनके शब्दों का असर और ज्यादा गहरा हो गया है।
यह पूरा मामला नागपुर में भारत दुर्गा मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम से जुड़ा है। इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।
यह भी पढ़ें: धीरेंद्र शास्त्री का दावा : ‘इंट्यूशन’ से सुलझा गुमशुदा बच्चे का केस, कुछ घंटों में आरोपी तक पहुंची पुलिस
ऐसे बड़े मंच पर दिए गए इस बयान ने तुरंत ही चर्चा पकड़ ली। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने की संभावना जताई जा रही है। कुछ लोग इसे सांस्कृतिक अपील मान रहे हैं, तो कुछ इसे विवादास्पद बयान बता रहे हैं।
अपने भाषण के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि संघ देश के लिए काम कर रहा है और समाज को एकजुट करने में उसकी बड़ी भूमिका है।
इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अगर हर परिवार एक बच्चे को संघ को समर्पित करे, तो देश और समाज को मजबूत बनाया जा सकता है। उनकी इस अपील ने लोगों को चौंका दिया और चर्चा का केंद्र बना दिया।
ये भी पढ़ें: कोरबा में गूंजा बागेश्वर सरकार का बयान! धर्मांतरण पर सख्त चेतावनी, बोले- 'हालेलुया वालों की...'
यह पहली बार नहीं है जब बागेश्वर बाबा ने चार बच्चों को लेकर कोई बात कही हो। इससे पहले भी वे कई बार इस विषय पर अपनी राय जाहिर कर चुके हैं। हालांकि, इस बार उनका बयान ज्यादा चर्चा में इसलिए आया क्योंकि इसमें सीधे तौर पर एक बच्चे को RSS को देने की बात कही गई है।
इसी दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर भी एक कहानी सुनाई। उन्होंने दावा किया कि एक समय ऐसा आया जब शिवाजी महाराज युद्ध करते-करते थक गए थे और उन्होंने सत्ता छोड़ने का विचार किया था।
उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज अपने गुरु समर्थ रामदास स्वामी के पास गए और सत्ता त्यागने की इच्छा जताई। लेकिन उनके गुरु ने उन्हें समझाया कि एक शिष्य का कर्तव्य है कि वह अपने कर्तव्यों को निभाए। इसके बाद शिवाजी महाराज ने फिर से जिम्मेदारी संभाली।
कार्यक्रम के दौरान नासिक में हुई एक कॉर्पोरेट घटना को लेकर भी चर्चा हुई। इस पर बोलते हुए गोविंददेव गिरी महाराज ने कहा कि समाज में बुराई करने वाले लोग मौजूद हैं, लेकिन उन्हें खत्म करने की बजाय सुधारने की कोशिश करनी चाहिए।
उन्होंन कहा कि अगर ऐसी घटनाओं पर लोगों को गुस्सा नहीं आता, तो यह सोचने की जरूरत है कि समाज किस दिशा में जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपनी संस्कृति के अनुसार मजबूत बनने की अपील की।
फिलहाल यह बयान चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं। सोशल मीडिया से लेकर सियासत तक, हर जगह इस मुद्दे पर बहस तेज होने के आसार हैं।