अंतरिक्ष की दुनिया से एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, जिसने वैज्ञानिकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। हमारा पड़ोसी लाल ग्रह मंगल ग्रह (Mars) अब पहले की तुलना में तेजी से घूम रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के मिशन से मिले ताजा डेटा के अनुसार मंगल ग्रह अपनी धुरी पर पहले के मुकाबले तेजी से घूम रहा है। जिससे लाल ग्रह पर दिन अब छोटे होते जा रहे हैं। हालांकि यह बदलाव बेहद सूक्ष्म है लेकिन अंतरिक्ष विज्ञान के लिए यह एक बड़ी खोज मानी जा रही है। वैज्ञानिक अब इस रहस्य को समझने में जुटे हैं कि आखिर मंगल की चाल क्यों तेज हो रही है और इसका आने वाले समय में क्या असर पड़ेगा।
मंगल ग्रह भी पृथ्वी की तरह अपनी धुरी पर घूमता है, जिससे वहां दिन और रात होते हैं। अब वैज्ञानिकों ने पाया है कि इस घूर्णन गति में हल्की लेकिन लगातार वृद्धि हो रही है। मंगल की गति हर साल करीब 4 मिली आर्कसेकंड बढ़ रही है। इसका असर यह है कि वहां का एक दिन बहुत ही मामूली समय-सेकंड के हजारवें हिस्से- जितना छोटा होता जा रहा है। यह बदलाव भले ही आम नजर से न दिखे, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए यह संकेत है कि ग्रह के भीतर या सतह पर कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन हो रहे हैं।
इस अहम खोज में इनसाइट लैंडर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस मिशन के तहत लगाए गए RISE उपकरण ने रेडियो सिग्नलों के जरिए मंगल की गति को बेहद सटीकता से मापा। यह तकनीक इतनी संवेदनशील है कि ग्रह के घूमने में होने वाले सूक्ष्म बदलाव भी पकड़ लेती है। वैज्ञानिकों ने लंबे समय तक इस डेटा का अध्ययन किया और पाया कि मंगल की घूर्णन गति में लगातार वृद्धि हो रही है। इस खोज ने अंतरिक्ष विज्ञान में नई जिज्ञासा पैदा कर दी है।
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वैज्ञानिक अभी भी इसके सटीक कारण की खोज कर रहे हैं, लेकिन कुछ संभावनाएं सामने आई हैं:
1. ध्रुवीय बर्फ में बदलाव
मंगल के ध्रुवों पर जमी बर्फ समय के साथ घटती-बढ़ती रहती है। जब यह बर्फ पिघलती है या जमा होती है, तो ग्रह के द्रव्यमान का वितरण बदल जाता है। इससे उसकी घूर्णन गति प्रभावित हो सकती है।
2. आंतरिक संरचना की हलचल
मंगल के कोर और मेंटल के बीच होने वाले बदलाव भी इसकी गति को प्रभावित कर सकते हैं। अगर अंदरूनी हिस्सों में कोई हलचल होती है, तो उसका असर पूरे ग्रह की गति पर पड़ सकता है।
मंगल पर एक दिन जिसे सोल कहा जाता है, पृथ्वी के मुकाबले थोड़ा लंबा होता है- लगभग 24 घंटे 37 मिनट। लेकिन अब यह अवधि धीरे-धीरे कम हो रही है। हालांकि यह कमी बेहद छोटी है, लेकिन लंबे समय में यह अंतर बड़ा हो सकता है और ग्रह के समय चक्र को प्रभावित कर सकता है।
मंगल की घूर्णन गति में बदलाव का सीधा असर अंतरिक्ष मिशनों पर पड़ सकता है। जब भी कोई यान मंगल पर उतरता है या वहां काम करता है, तो उसे ग्रह की सटीक गति की जानकारी होना जरूरी होता है। इस तरह की जानकारी भविष्य के मानव मिशनों और Artemis Program जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि गति में बदलाव जारी रहता है, तो मिशनों की योजना और नेविगेशन सिस्टम को भी अपडेट करना होगा।
यह खोज केवल मंगल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रहों की संरचना और उनके विकास को समझने में भी मदद करती है। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि ग्रहों के अंदर क्या चल रहा है, उनका द्रव्यमान कैसे बदलता है और समय के साथ उनकी गति कैसे प्रभावित होती है। यह अध्ययन भविष्य में अन्य ग्रहों के बारे में नई जानकारियां जुटाने में भी सहायक होगा।
फिलहाल यह बदलाव इतना छोटा है कि इसका कोई तात्कालिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर यह प्रक्रिया लंबे समय तक जारी रहती है, तो मंगल का समय मापन और कैलेंडर सिस्टम बदल सकता है। हजारों वर्षों में यह अंतर इतना बढ़ सकता है कि वहां के दिन और साल की परिभाषा ही बदल जाए।
मंगल ग्रह हमेशा से वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। अब उसकी बढ़ती रफ्तार ने एक नया रहस्य जोड़ दिया है। यह खोज बताती है कि ब्रह्मांड में अभी भी बहुत कुछ ऐसा है, जिसे हम पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं। हर नई जानकारी हमें अंतरिक्ष के और करीब ले जाती है।