इंदौर में नर्मदा परियोजना के चौथे चरण की शुरुआत के साथ ही मालवा क्षेत्र की जल व्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में 1356 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सिंहस्थ 2028 में उज्जैन की शिप्रा नदी में शिप्रा का ही जल प्रवाहित होगा और श्रद्धालु उसी जल में स्नान और आचमन करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते सिंहस्थों में नर्मदा और गंभीर नदी के पानी का उपयोग किया गया था, लेकिन अब सरकार शिप्रा को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए गंभीरता से काम कर रही है। शिप्रा नदी को पूरे साल प्रवाहमान बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार की गई है, जिसमें जल संरक्षण और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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इस योजना के तहत एक बड़ा तालाब बनाया जा रहा है, जिसमें वर्षा का पानी एकत्र किया जाएगा। इस पानी को आवश्यकता के अनुसार धीरे-धीरे शिप्रा नदी में छोड़ा जाएगा, ताकि पूरे साल नदी में जल बना रहे। मुख्यमंत्री ने बताया कि शिप्रा नदी के आसपास कोई हिम स्रोत नहीं है, इसलिए वर्षा जल का संग्रहण ही इसका मुख्य आधार है और इसी दिशा में काम किया जा रहा है।
शिप्रा नदी को स्वच्छ बनाए रखने के लिए भी कई कदम उठाए जा रहे हैं। कान्ह नदी से आने वाले गंदे पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए अंडरग्राउंड नहर बनाई जा रही है। इस नहर के माध्यम से गंदे पानी को अलग कर उसे ट्रीट किया जाएगा और फिर कृषि कार्यों में उपयोग किया जाएगा, जिससे नदी का पानी साफ बना रहेगा और प्रदूषण भी कम होगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 1356 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली इस परियोजना से इंदौर सहित पूरे मालवा क्षेत्र को फायदा होगा। नर्मदा के पानी से न केवल पेयजल व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि औद्योगिक और कृषि क्षेत्र को भी राहत मिलेगी। इससे प्रदेश की जल आपूर्ति प्रणाली और अधिक सुदृढ़ होगी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विधानसभा के रिकॉर्ड में दर्ज है कि कांग्रेस के नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्रियों ने कभी मालवा में नर्मदा का पानी लाने की संभावना से इनकार किया था। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय 500 मीटर नीचे से पानी लिफ्ट करना असंभव बताया गया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे संभव कर दिखाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब नर्मदा का पानी इंदौर तक पहुंच चुका है और चौथे चरण के जरिए इसे और विस्तार दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश की नदियों को पुनर्जीवित किया जाए और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर आम लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सके।