हिमंत बिस्वा सरमा फिर बने BJP विधायक दल के नेता, CM शपथ की तारीख फाइनल

दिसपुर। असम में नई सरकार को लेकर बड़ा राजनीतिक फैसला हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के हिमंत बिस्वा सरमा को एक बार फिर राज्य का मुख्यमंत्री बनाने पर सहमति बन गई है। बीजेपी विधायक दल और विधायक दल ने सर्वसम्मति से उन्हें अपना नेता चुन लिया है। इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि हिमंत बिस्वा सरमा 12 मई को दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।
शपथ ग्रहण समारोह की बड़ी तैयारी
शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन असम के खानापारा वेटरनरी कॉलेज मैदान में सुबह 11 बजे होगा। यह कार्यक्रम काफी भव्य और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसके अलावा केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री, एनडीए शासित 22 राज्यों के मुख्यमंत्री और गठबंधन दलों के नेता भी मौजूद रहेंगे।
विधायक दल की बैठक और चयन
बीजेपी ने विधायक दल का नेता चुनने के लिए पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी को पर्यवेक्षक नियुक्त किया था। इन्हीं की निगरानी में असम बीजेपी विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें औपचारिक रूप से नेता का चुनाव किया गया। बैठक में सभी विधायकों ने हिमंत बिस्वा सरमा के नाम पर सहमति जताई।
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इस्तीफे के बाद कार्यवाहक मुख्यमंत्री
हिमंत बिस्वा सरमा ने 6 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इस्तीफे के बाद उन्हें कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी दी गई थी। अब नई सरकार के गठन के साथ वे फिर से राज्य की कमान संभालेंगे और लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनेंगे। यह उनके राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत
असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में इस बार बीजेपी और उसके सहयोगियों ने मजबूत प्रदर्शन किया है। बीजेपी ने अकेले 82 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। वहीं उनके सहयोगी दल असम गण परिषद (AGP)स बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) ने 10-10 सीटें जीतीं।
इस तरह एनडीए गठबंधन को कुल 102 सीटें मिलीं। यह बीजेपी के लिए असम में अब तक की सबसे बड़ी जीतों में से एक मानी जा रही है।
विपक्ष का कमजोर प्रदर्शन
इस चुनाव में विपक्षी दलों का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा। कई जगहों पर विपक्ष एकजुट नहीं दिखा, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार विपक्ष की यह कमजोरी ही एनडीए की बड़ी जीत का एक प्रमुख कारण बनी।
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हिमंत बिस्वा सरमा का राजनीतिक सफर
हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। वे 90 के दशक में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (All Assam Students Union) से जुड़े रहे। इस दौरान उन्होंने असम के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई।
बाद में वे कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए और मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा। साल 2001 में उन्होंने जालुकबारी सीट से पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। तत्कालीन मुख्यमंत्री तरूण गोगोई के कार्यकाल में हिमंत बिस्वा सरमा को एक भरोसेमंद नेता माना जाता था।
वे स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को संभालते हुए एक मजबूत प्रशासनिक छवि बनाने में सफल रहे। 2015 में कांग्रेस नेतृत्व से मतभेद बढ़ने लगे।
खासकर पार्टी हाईकमान और राहुल गांधी के साथ विचारों में अंतर के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर ली। बीजेपी में शामिल होने के बाद हिमंत बिस्वा सरमा को नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA) का संयोजक बनाया गया। मणिपुर, त्रिपुरा और मेघालय जैसे राज्यों में पार्टी के विस्तार में उनकी रणनीतिक भूमिका को काफी सराहा गया।
2021 में असम के मुख्यमंत्री पद
2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने असम में पहली बार सरकार बनाई। इसमें हिमंत बिस्वा सरमा की रणनीति और संगठन क्षमता को अहम माना गया। वे उस समय सरकार में सबसे प्रभावशाली मंत्रियों में से एक थे। 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने उनके अनुभव और कामकाज को देखते हुए उन्हें असम का मुख्यमंत्री बनाया।











